जानें क्‍यों महिलाओं के लिए असहनीय बीमारी है फिस्‍टुला

Updated at: Mar 21, 2016
जानें क्‍यों महिलाओं के लिए असहनीय बीमारी है फिस्‍टुला

महिलाओं को पुरुषों से इतर भी कई समस्‍यायें होती हैं और ये समस्‍यायें बहुत कष्‍टदायक भी होती हैं, ऐसी ही एक अहसनीय बीमारी है फिस्‍टुला, इस लेख में इसके बारे में विस्‍तार से जानें।

Gayatree Verma
महिला स्‍वास्थ्‍यWritten by: Gayatree Verma Published at: Mar 17, 2016

एक बार एक रजिया नाम की महिला असहनीय प्रसव पीड़ा से पीड़ित होती है। मरी हुई बच्ची को जन्म देती है। कुछ दिनों बाद उसकी योनि से मल निकलने कि परेशानी शुरू हो जाती है। गांव वाले और घरवाले उसका बहिष्कार कर देते हैं। उसे नहीं मालुम होता की उसे क्या है। बस उसे एक बुजुर्ग महिला बताती है कि उसे फिस्टुला है। तब वो शहर के फिस्टुला सेंटर जाती है और छह महीने के इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो जाती है। इस बीमारी को फिस्टुला कहते हैं। दूर एक गांव में ऐसी ही कई अन्य महिलाएं रजिया की तरह ही इस बीमारी से पीड़ित होती है और इससे अनजान होने के कारण इसी में मर जाती है। जो कि जीने के अधिकार के साथ अन्याय है। आपके साथ ये अन्याय ना हो इसलिए फिस्टुला से संबंधित सारी जानकारी यहां पढ़ें।

अफ्रीका और एशिया में ज्यादा

  • यह बीमारी गंदगी या सही से ध्यान न रख पाने के बाद होती है। इसे एक अभियान के तहत यूरोप और अमरीका में जड़ से समाप्त कर दिया गया है और अब वहां इसके बारे में शायद ही कोई जानता हो।
  • वर्तमान में क़रीब 20 लाख महिलाएं दुनियाभर में इससे पीड़ित हैं। इनकी तादाद अफ्रीका और एशिया में आधुनिक देखभाल और इलाज उपलब्ध ना होने के कारण सबसे अधिक है।

फिस्टुला

 

क्या है फिस्टुला

फिस्टुला एक जटिल बीमारी है औऱ इसे भंगदर भी कहते हैं। इसमें गुदा के मार्ग में एक से अधिक पिंडिकाएं उत्पन्न हो जाती हैं। इसमें रोगी उठ-बैठ नहीं पाता। सही समय पर इलाज नहीं मिलने पर ये पिंडिकाएं नासुर बन कर गुदा के दूसरी तरफ मार्ग बना लेता है। इसके बढ़ने पर गुदा में ये दूसरा मार्ग और  अधिक बढ़ने लगता है जो नितंब या जांघों तक भी बन जाता है। इन मार्गों से लगातार खून, लसिका और बदबूदार मल निकलते रहता है।


फिस्टुला के लक्षण

  • इस बीमारी की शुरुआत गुदा मार्ग में फुंसियों से होती है।
  • कुछ हफ्तों के बाद इन फुंसियों से मवाद निकलने लगता है जो पूरे गुदा मार्ग को खराब कर देता है।
  • इसमें रोगी ना पीठ के बल लेट पाता है ना पेट के बल।
  • सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में तकलीफ होती हैं।
  • रोगी को बैठने में तकलीफ होती है।

 

ये दो तरह के होते हैं

  • अपूर्ण फिस्टुला- जब नासुर का मार्ग एक तरफ ही खुलता है। ये मार्ग मलाशय में बाहर की तरफ खुलता है।  
  • पूर्ण फिस्टुला- नासुर का दूसरा सिरा भी गुदा मार्ग में खुल जाता है और ये बढ़ने लगता है।

 

ये हैं कारण

  • गुदा मार्ग के गंदे रहने और लंबे समय तक कब्ज रहने से।
  • खुजली होने पर गुदामार्ग को अधिक खुजला देने पर।
  • गुदा-मार्ग में चोट लग जाने पर।
  • गुदा मार्ग की फुंसी को नजरअंदाज कर देने पर।   

 

इलाज

इसका इलाज तुरंत करवाएं। अगर इसे लेकर थोड़ी भी दुविधा हो और आपको शक हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

 

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