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दमा के रोगियों के लिए अमृत है मछली का ऐसा उपयोग

अस्‍थमा By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 01, 2017
दमा के रोगियों के लिए अमृत है मछली का ऐसा उपयोग

दमा एक ऐसी बीमारी है जिसका सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है।

Quick Bites
  • दमा एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी।
  • दमा रोग में मछली खाना लाभदायक है।
  • यह बीमारी फेफड़ों से हवा के मार्ग को अवरूद्घ करती है।

दमा एक ऐसी बीमारी है जिसका सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है। इस रोग में श्वसन नली में सूजन आ जाती है जिसके चलते सांस के निकास में बहुत दिक्कत होती है। यानि कि हवा संकुचित मार्ग से ठीक से पास नहीं हो पाती जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। यह रोग सर्दियों में बहुत तेजी से बढ़ता है। क्या आप जानते हैं विश्व में लगभग तीस करोड़ लोग दमा से पीड़ित हैं। ऐसे में सर्दियां आते ही दमा पीड़ित लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं।

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दमा/अस्थमा के लक्षण

दमा रोग जितना गंभीर है इसके लक्षण भी उतने ही गंभीर होते हैं। घरघराहट होना, थकान होना, गले में खराश होना, सामान्य सर्दी होना, सीने में जकड़न होना और खांसी के दौरान तकलीफ होना आदि दमा के मुख्य लक्षण हैं। अगर किसी व्यक्ति को अपने शरीर में इनमें से कोई 2 लक्षण भी महसूस हो तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। क्योंकि जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति में दमा के सभी लक्षण दिखें। अस्थमा से होने वाली खांसी अक्सर रात को या बहुत सवेरे होती है। यह सांस लेना कठिन बना देता है। सफेद गाढ़ा बलगम आता हो, सांस लेने पर घर्र- घर्र की आवाज़ तथा सीने पर किसी ने कसकर कपड़ा बांध दिया हो, ऐसा अहसास दमे के मुख्य लक्षणों में से है।

दमा के लिए मछली

मछली में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन अगर दमा की बात करें तो मछली का नियमित सेवन इस रोग को जड़ से काटता है। जब बात हो अस्थमा की तो अस्थमैटिक मरीजों को अस्थमा से जुड़ी समस्याओं से निजात पाने के लिए निश्चित रूप से मछली का सेवन करना चाहिए। फैटी फिश अस्थमा रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अस्थमा के मरीजों को सप्ताह में कम से कम दो बार मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे ना सिर्फ वे आसानी से सांस ले सकते हैं बल्कि उनके गले की सूजन, खराश, संकरी श्‍वासनली इत्यादि में भी सुधार होता है। क्या आप जानते हैं जो अस्थमैटिक मरीज सप्ताह में दो बार मछली का सेवन करते हैं, ऐसे मरीजों में लगभग 90 फीसदी अस्थमा की समस्याएं कम हो जाती हैं।

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मछली के तेल का सेवन

समुद्री मछली, सैल्मन, ट्यूना और कॉड लिवर इत्यादि को मिलाकर ही फिश ऑयल और फिश के अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है। फिश ऑयल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि बहुत जल्दी अस्‍थमा रोगियों को ठीक करने में कारगार है। यानी यदि अस्थमा रोगी फिश ऑयल का सेवन करते हैं तो ये उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभदायक है। इससे गले में आने वाली सूजन से निजात मिलती हैं। जो बच्चे श्वास दमा (bronchial asthma) के शिकार होते हैं उनके लिए फिश ऑयल का सेवन बहुत फायदेमंद है।

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Written by
Rashmi Upadhyay
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागDec 01, 2017

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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