• shareIcon

अस्‍थमा रोगी के लिए अद्भुत है फिश ऑयल

अस्‍थमा By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 21, 2017
अस्‍थमा रोगी के लिए अद्भुत है फिश ऑयल

अगर आप अस्‍थमा से परेशान है और इससे बचने के उपायों की खोज कर रहे हैं तो फिश ऑयल आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।

अस्‍थमा फेफड़ों में होने वाला गंभीर रोग है, जो श्‍वसन मार्ग में बाधा पहुंचाता है। यानी यह बीमारी फेफड़ों से हवा के मार्ग को अवरूद्घ करती है। जिससे श्वसन नली में सूजन आ जाती है और यह श्वसन नली के मार्ग संकरा कर देता है। इससे हवा संकुचित मार्ग से ठीक से पास नहीं हो पाती और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।  

अस्थमा की समस्‍या होने पर सांस लेने के दौरान घरघराहट, थकान, गले में खराश, सामान्य सर्दी, सीने में जकड़न होना, खांसी के दौरान तकलीफ आदि समस्याएं होती हैं। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि एक नए शोध के अनुसार, अगर आप अपने आहार में फिश ऑयल को शामिल करते हैं तो अस्‍थमा से होने वाले समस्‍याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यानी फिश ऑयल से अस्थमा का उपचार संभव है।


इसे भी पढ़ें : घर बैठे करें अस्थमा का उपचार

अस्‍थमा के लिए फिश ऑयल

फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड्स अस्थमा जैसी बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए बहुत लाभदायक होता है। न्यूयार्क की रोचेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए शोधों के परिणामों के अनुसार फिश ऑयल और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर दूसरे उत्पाद एंटीबाडिज की उत्पत्ति को रोक सकते हैं। यह एंटीबॉडी एलर्जी और अस्थमा की वजह होते हैं। शोधकर्ता पी फिलिप्स ने कहा कि ओमेगा-3 फैटी एसिड से स्वास्थ्य को दूसरे कई फायदे भी हैं। यह प्रतिरक्षा प्रणाली पर कोई बुरा प्रभाव डाले सूजन पर अंकुश लगा सकता है।

हालांकि अस्‍थमा से गंभीर रूप से ग्रस्‍त जो मरीज स्‍टेरॉइड का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं उनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड अधिक प्रभावी नहीं होता क्योंकि कोर्टिकोस्टेरॉइड इसके लाभदायी प्रभावों को कम कर देता है। इसके अलावा पहले अध्ययनों से यह भी पता चला है कि फिश ऑयल में कुछ निश्चित फैटी एसिड्स पाए जाते हैं जो 'बी कोशिकाओं' के कार्य को नियमित करते हैं।



इसे भी पढ़ें : दमा के लिए वैकल्पिक चिकित्सा

अध्‍ययन के अनुसार

जेसीआई इनसाइट पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन में टीम ने 17 मरीजों के ब्‍लड के नमूने लिए और प्रयोगशाला में उनके बी इम्यून कोशिकाओं को अलग करके देखा गया कि आईजीई और अन्य कण जो इस बीमारी के लिए जिम्‍मेदार होते हैं, उन पर शुद्ध ओमेगा 3 फैटी एसिड्स का क्या प्रभाव पड़ता है? रोचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रमुख लेखक रिचर्ड पी. फिप्पस ने बताया कि परिणामों से पता चलता है कि सभी ने कुछ सीमा तक ओमेगा 3 के प्रति प्रतिक्रिया दिखाई जिसके परिणामस्वरूप आईजीई के स्तर में कमी आई।

लेकिन जो मरीज स्‍टेरॉइड का सेवन करते थे वह इस ओमेगा-3 उपचार के प्रति कम संवेदनशील थे। शोधकर्ताओं की चेतावनी के अनुसार ग्राहकों को फिश ऑयल खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि सभी फिश ऑयल समान नहीं होते।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

 
Image Source : Getty

Read More Articles on Asthma in Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK