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    इस 1 कारण से फायरफाइटर्स को हो रही है हार्ट अटैक की समस्या

    विभिन्न By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 18, 2017
    इस 1 कारण से फायरफाइटर्स को हो रही है हार्ट अटैक की समस्या

    फायर फाइटर का काम आग लगने पर तुंरत पहुंचकर वहां पर अधिक से अधिक लोगों की जान−माल की रक्षा करना होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं ऐसे में उन्‍हें बहुत अधिक तापमान में रहने लगता है, जिनसे उन्‍हें हार्ट अटैक की समस्या हो रही है।

    आज युवा कुछ ऐसा करने की चाहत रखते हैं जो बेहद ही साहसिक और अलग हो। ऐसे में वह बेहद ही जोखिमभरा यानी फायरफाइटर बनना पसंद करता है। इसमें सफलता साथ-साथ लोगों का प्‍यार और सम्‍मान प्राप्‍त होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ऐसे में उन्‍हें बहुत अधिक तापमान में रहने लगता है, जिनसे उन्‍हें हार्ट अटैक की समस्या हो रही है।  

    जी हां एक फायर फाइटर का काम आसपास के क्षेत्र में आग लगने पर तुंरत पहुंचकर वहां पर अधिकाधिक लोगों की जान−माल की रक्षा करना होता है। ऐसे में कभी−कभी उन्‍हें भयंकर ज्वलनशील केमिकल व विस्फोटकों की मौजूदगी में भी अपना काम करना होता है। हाल में ही हुए एक नए अध्‍ययन में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ने इस बात को समझा, कि ऑन-ड्यूटी फायरफाइटर्स में मौत का प्रमुख कारण हृदय रोग क्यों है?

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    गाढ़ा खून

    जर्नल 'सर्कुलेशन' पत्रिका में प्रकाशित और ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन (बीएचएफ) द्वारा किए इस शोध में उन्‍नीस नॉन-स्‍मोकिंग और हेल्‍दी फायरफाइटर को एकाएक लिया गया। उन्होंने एक्‍सरसाइज में हिस्सा लिया, जिसमें दो मंजिला ढांचे को बचाने का नकली बचाव प्रयास किया गया, जिसमें उन्हें बेहद ऊंचे तापमान तक पहुंचा दिया गया, हालांकि उन्‍होंने हार्ट मॉनिटर पहने हुए थे।


    शोध के परिणाम

    • तीन से चार घंटे तक फायर के संपर्क में आने से उनके शरीर का तापमान बहुत हाई रहा।  
    • उनका ब्‍लड गाढ़ा हो गया और हानिकारक क्लॉट्स बनने की संभावना 66 प्रतिशत अधिक थी।
    • ब्‍लड वेसल्स दवा लेने के बावजूद रिलैक्‍स होने में विफल थी।


    शोध दल का मानना ​​है कि थक्के में वृद्धि पसीने के कारण होने वाली द्रव के नुकसान और फायर हीट के कारण होने वाली भड़ाकाऊ प्रतिक्रिया के संयोजन से हुई थी, जिसके परिणामस्‍वरूप ब्‍लड अधिक केंद्रित होता है और थक्‍का होने की अधिक संभावना होती है। एशियाई हार्ट इंस्टीट्यूट के डॉक्टर, जो मुंबई के फायरफाइटर्स के सीपीआर कार्यक्रम के लिए काम कर रहे हैं, इस बात से सहमत हैं।


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    एशियाई हार्ट इंस्टिट्यूट के मेडिकल डायरेक्‍टर, डॉक्‍टर विजय डीसिलवा कहते हैं कि ''किसी भी इंसान के उच्‍च तापमान के संपर्क में आने से, हेमो-कंसंट्रेशन बढ़ता है, जिससे उस इंसान के क्लॉट्स बनने की संभावना बढ़ती है। इस तरह से सीपीआर ट्रेनिंग फायरफाइटर के लिए उपयोगी है, न केवल समुदायों की सहायता के लिए, लेकिन उनके साथियों के लिए भी।''

    शोध में हीट और फायरफाइटर की फिजीकल लेवल और हार्ट अटैक के जोखिम के बीच एक सीधा संपर्क दिखाया है। अच्‍छी बात यह है कि कुछ सरल उपायों की मदद से जैसे खुद को अच्‍छे से हाइड्रेटेड रख कर फायरफाइटर इस जोखिम को कम कर सकते हैं।
     

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    Image Source : Getty

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