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दूर से ही दें कबूतर को दाना, नहीं तो हो जाएगी 'बर्ड फैंसियर्स लंग' बीमारी

संक्रामक बीमारियां By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 15, 2018
दूर से ही दें कबूतर को दाना, नहीं तो हो जाएगी 'बर्ड फैंसियर्स लंग' बीमारी

मकान की छत पर, कॉलोनी के गार्डन में, मंदिरों व मस्जिदों के सामने अक्सर बड़ी संख्या में कबूतर दाना चुगते दिखते हैं।

Quick Bites
  • पक्षी निमोनिया या बर्ड फैंसियर्स लंग की बीमारी बढ़ा रहे हैं। 
  • बर्ड ड्रापिंग को एलर्जी उत्पन्न करने वाला बेहद तीव्र पदार्थ माना जाता है।
  • पक्षियों के पंख से निकलने वाले छोटे अंश फेफड़ों को धीरे-धीरे जाम करते हैं।

मकान की छत पर, कॉलोनी के गार्डन में, मंदिरों व मस्जिदों के सामने अक्सर बड़ी संख्या में कबूतर दाना चुगते दिखते हैं। उन्हें दाना डालने वाले भी उतने ही चाव से ये दाना डालते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। कबूतरों के पंख से निकलने वाले फीदर डस्ट मनुष्यों में अति संवेदनशील निमोनिया या बर्ड फैंसियर्स लंग की बीमारी बढ़ा रहे हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि जो लोग कबूतरों को करीब से या फिर गोद में बैठाकर दाना देने का शौक रखते हैं वह बहुत जल्द फेफड़ों की बीमारी के शिकार हो सकते हैं।

अत्यधिक एलर्जी होती है इसमें

बर्ड ड्रापिंग को एलर्जी उत्पन्न करने वाला बेहद तीव्र पदार्थ माना जाता है, जिसके कारण फेफड़े गंभीर रूप से सूजन का शिकार होते हैं। सामान्य परिस्थिति में इसे चिकित्सक आम निमोनिया समझ लेते हैं जबकि यह बर्ड ड्रापिंग्स से होने वाली अतिसंवेदनशील निमोनिया या बर्ड फैंसियर्स लंग की बीमारी होती है।

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शहरों में बढ़ रही है ये बीमारी

मकानों में एसी लगाने के स्थान व पाइप कबूतरों के निवास बन गए हैं। ऐसे में छतों पर दाना चुग कर वे वहीं बैठते हैं। उनके पंखों से निकले कण एसी के जरिए घरों में घुसते हैं। इस विषय पर देश में पिछले साल ही एक स्टडी हुई। इसमें यह बात सामने आई कि जागरूकता न होने के कारण लोग इलाज में चार-चार साल तक की देरी कर चुके होते हैं।

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क्या कहते हैं डॉक्टर

पक्षी विज्ञानी डॉ. रजत भार्गव का कहना है कि पक्षियों के पंख से निकलने वाले छोटे अंश फेफड़ों को धीरे-धीरे जाम करते हैं जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। जो लोग इनके नजदीक रहते हैं उन्हें मास्क लगाकर रहना चाहिए। घर के आस-पास कबूतरों को दाना डालने से बचना चाहिए।

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Written by
Rashmi Upadhyay
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMay 15, 2018

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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