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Arachnophobia: खतरनाक हो सकता है म‍कडि़यों का डर (अरचनोफोबिया), जानें लक्षण और बचाव के तरीके

अन्य़ बीमारियां By शीतल बिष्‍ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 23, 2019
Arachnophobia: खतरनाक हो सकता है म‍कडि़यों का डर (अरचनोफोबिया), जानें लक्षण और बचाव के तरीके

Arachnophobia: हर इंसान को किसी न किसी चीज का फोबिया यानि डर होता है। किसी को पानी, तो किसी को ऊंचाई से डर लगता है। फोबिया कई तरह के हो सकते हैं, ऐसा ही एक फोबिया है अरचनोफोबिया यानि मकडि़यों का डर। 

मुझे आज भी याद है जब कि एक फिल्म से जहां एक दुर्घटना के कारण मकड़ियां रात भर के लिए बेकाबू हो गयी थी। जिसके बाद वह अपने आसपास अव्यवस्था फैलाने  लगी। उस समय मैंने खुद को मकड़ियों नापसंद करते हुए और उनसे डर महसूस करते हुए पाया। हालांकि, मेरा मकड़ियों का डर सिर्फ एक बुरी याद है और इससे आगे कुछ भी नहीं। लेकिन कुछ लोगों के लिए, मकड़ियों का डर वास्तव में उनके जीवन की गुणवत्ता में हस्तक्षेप कर सकता है और उन्हें चिंता का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है। जी हां मकड़ियों का डर यानि अरचनोफोबिया एक गंभीर स्थिति है,जो व्यक्ति को गहरे स्तर पर प्रभावित कर सकती है। लेकिन यह गंभीर कैसे होती होता है और हम मकड़ियों से इतना डरते क्यों हैं? आइए इन सभी बातों के जवाब हम आपको बताते हैं। 

Arachnophobia

अर्चनोफोबिया के कारण 

वैज्ञानिकों का कहना है, मकड़ियों के डर से विकासवादी सिद्धांत का कुछ लेना हो सकता है। पुराने समय से मकड़ियों को भोजन और पानी के संदूषण के स्रोत के रूप में माना जाता था और इसलिए उन्हें लोगों में फैलने वाली घृणित बीमारियों के रूप में समझा जाता था। शुरुआत में मकड़ियों को बुबोनिक प्लेग के पीछे का कारण माना जाता था, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया। क्योंकि इसके बाद चूहे-पिस्सू को इसका मुख्य दोषी के रूप में खोजा गया था। यह गलत आशंका कई पीढ़ियों से चली आ रही है और हमारे मन में व्याप्त हो गई है।

बचपन या किशोरावस्था में किसी घटना की वजह से मकड़ियों का डर भी विकसित हो सकता है। कोई आघात गहरी जड़ें पैदा करना शुरू कर देता है और अंततः एक यादगार प्रक्रिया बन जाता है। कभी-कभी मकड़ियों के आसपास होने की आशंका से मकड़ियों का डर भी हो सकता है।

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अर्चनोफोबिया के लक्षण

एक व्यक्ति जो मकड़ियों से डरता है, जरूरी नहीं कि उसे फोबिया हो। अरचनोफोबिया एक गंभीर स्थिति है, जहां पीड़ित में लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-

  • चक्कर आना
  • कंपकंपी या पसीना आना
  • रैपिड हार्ट रेट
  • चिंता
  • हॉट या कोल्ड फ्लैश
  • सांस फूलना
  • गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या
  • जी मिचलाना
  • छाती में दर्द

अर्चनोफोबिया के लिए उपचार

यदि अर्चनोफोबिया के लक्षण छह महीने से अधिक समय तक बने रहते हैं, तो यह व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में हस्तक्षेप करना शुरू कर देता है। ऐसे में उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूरी है। आप चाहें, तो एक मनोचिकित्सक से भी सलाह लें सकते हैं।

सिस्टेमैटिक डिसेन्सिटाइजेशन

यह थेरेपी का सबसे विश्वसनीय और प्रचलित रूप है सिस्टम डिसेन्सिटाइजेशन। पीड़ित को मकड़ियों के अपने डर का सामना करने और रणनीतिक तरीके से सामना करने के लिए बनाया जाता है। इस थेरेपी में दी गई आरामदायक तकनीकों में श्वास नियंत्रण, मांसपेशियों पर नियंत्रण और ध्यान शामिल है। इस थेरेपी का प्राथमिक उद्देश्य एक नियंत्रित और आराम से वातावरण में जोखिम को कम करके डर को कम करना है। जब तक कि व्यक्ति को अंततः उनके भय के साथ सामना नहीं कर पाता। 

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कॉग्निटिव बिहेवियरल थरेपी(सीबीटी)

सीबीटी सबसे आम थेरेपी है, जब इस फोबिया के प्रबंधन की बात आती है। तो डॉक्‍टर फोबिया से पीड़ित को यह थेरेपी देता है, यह थेरेपी अर्चनोफोबिया की जड़ को इंगित करने में मदद करता है। सीबीटी अधिक सकारात्मक और सहनीय विचारों के साथ नकारात्मक विचारों को रोकने में मदद करती है। 

दवा

कुछ मामलों में, चिकित्सक थेरेपी के साथ-साथ दवाओं की सलाह देते हैं। एंटी-डिप्रेशन और एंटी-एंजाइटी की गोलियाँ सबसे अधिक चरम लक्षणों वाले रोगियों के लिए निर्धारित की जाती हैं।

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सावधानियां 

  • मकड़ियों के बारे में जितना अधिक आप सोचते हैं, इस डर की उतनी अधिक संभावना होती है। 
  • आप मकड़ियों के डर को दूर कर सकते हैं। क्‍योंकि ज्‍यादातर मकड़ियां मनुष्यों के लिए नुकसानदेहक नहीं होती हैं। क्योंकि वे आम तौर पर कीड़े और अन्य कीट जैसे जीव के समान होती हैं। 
  • इसलिए डर को निकालने के लिए एक बार हिम्‍मत से उसका सामना करके देखें।  
  • कुछ मामलों में, मकड़ी के काटने से एलर्जी हो सकती है। हालांकि, काली और भूरे रंग की मकड़ी विषैली होती हैं, उनका काटना खतरनाक हो सकता है। 
  • कोशिश करें कि मकड़ियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें। अपने घर और गैराज को मकडि़यों के जाल न लगने दें। 
  • अपने फोबिया से निकलने की कोशिश करें और समझ और धैर्य के साथ काम करें।

यह लेख डॉ. बिनीता प्रियबंदा, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल टीम (डॉकप्राइम.कॉम) से बातचीत पर आधरित है। इन्‍हें जनरल सर्जरी और फैमिली मेडिसिन और चिकित्सा क्षेत्र में दोहरी विशेषज्ञता में 16 साल का व्यापक अनुभव है। 

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