Fact Check: भारतीय छात्र द्वारा कोरोना का घरेलू उपाय बनाने वाली खबर वायरल, जानें क्‍या है इस वायरल खबर का सच

Updated at: Jul 15, 2020
Fact Check: भारतीय छात्र द्वारा कोरोना का घरेलू उपाय बनाने वाली खबर वायरल, जानें क्‍या है इस वायरल खबर का सच

कोरोना के इलाज में लोग तमाम घरेलू नुस्खे आजमा रहे हैं लेकिन क्या ये आपके लिए फायदेमंद हैं, जानें एक नए वायरल मैसेज की सच्चाई।

Jitendra Gupta
विविधWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 15, 2020

सोशल मीडिया पर खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं, इस बात को लगभग हर व्यक्ति जानता है फिर चाहे वे अच्छी हों या बुरी। मौजूदा वक्त में कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हुई है। कोरोनावायरस से बचाव के लिए यूं तो कोई दवा या वैक्सीन हमारे बीच नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप लोग अपने-अपने तरीके से इस घातर संक्रमण से बचने के लिए नुस्खे आजमा रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर  एक मैसेज बहुत ज्यादा वायरल हो रहा है, जिसमें ये झूठा दावा किया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने काली मिर्च पाउडर, शहद और अदरक के रस के मिश्रण को नोवल कोरोनोवायरस के इलाज के रूप में मंजूरी दे दी है। बता दें कि सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर ये मैसेज पिछले महीने 11 जून से वायरल हो रहा है।

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भले ही इस मैसेज में कोई सच्चाई न हो लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि शहद और अदरक के सुखदायक प्रभाव हो सकते हैं लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये मिश्रण COVID-19 को ठीक कर सकता है।

वायरल मैसेज के मुताबिक, पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी के एक भारतीय छात्र ने COVID-19 के लिए यह घरेलू उपाय खोजा है, जिसे WHO ने भी स्वीकार कर लिया है। मैसेज में कोरोना के इलाज के लिए एक बड़ी चम्मच काली मिर्च पाउडर, शहद के दो बड़े चम्मच और थोड़ा से अदरक के रस को मिलाना है। मैसेज में कहा गया है कि इस मिश्रण को अगर पांच दिनों तक लिया जाए तो ये कोरोनावायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।

क्या है इस मैसेज की सच्चाई, जानिए 

ये अपनेआप में ऐसा कोई पहला वायरल मैसेज नहीं है, जो COVID-19 को ठीक करने की क्षमता रखने वाले प्राकृतिक घरेलू उपचारों के बारे में दावा करता हो। पहले भी कई मैसेज कोरोना को ठीक करने का दावा कर चुके हैं जैसे हैंड सैनिटाइजर पीना,  धूप में खड़े रहना आदि, जिनसे सिर्फ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। बता दें कि पहले की तरह इनमें से कोई भी तरीका COVID-19 का इलाज करने में कारगर साबित नहीं हुआ है। इसके अलावा नोवल कोरोनावायरस के लिए अभी भी कोई उचित इलाज नहीं है और दुनिया अभी भी वैक्सीन बनने और उसे मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है।

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वास्तव में, डब्ल्यूएचओ ने अप्रैल 2020 में इस बात से इनकार किया था कि अदरक और शहद का बीमारी को ठीक करने या इलाज करने में कोई भी प्रभाव है। डब्ल्यूएचओ हेल्थ इमर्जेंसी प्रोग्राम के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइकल रयान ने जिनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए कहा था कि भले ही इस मिश्रण के सुखदायक प्रभाव हों और ये किसी बीमारी के दौरान आराम देने का आश्वासन प्रदान कर सकता हो लेकिन इसका ये मतलब  नहीं है कि इसे COVID-19 के उपचार में भी प्रभावी नहीं माना जाना चाहिए।

डॉ. माइकल रयान ने कहा था, “मुझे लगता है कि हमें उन घरेलू उपायों से सावधान रहना होगा, जिन्हें हम उन पारंपरिक उपचारों के रूप में मानते हैं जिनका उपयोग लोग आम सर्दी या फ्लू या इस किसी भी आम बीमारी के दौरान खुद को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। हम सभी बीमार पड़ते हैं और हममें से कुछ लोग शहद के साथ अदरक का का पेय लेना पसंद करते हैं। लेकिन यह कहना अलग बात है कि इस बीमारी के इलाज में ऐसा कुछ कारगर है। इस समय कोई ऐसी चिकित्सा नहीं है, जो COVID-19 के उपचार में कारगर साबित हुई हो। ”

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खुद से दवा लेने के खिलाफ डॉक्टर 

डॉ. रयान के अलावा दुनिया भर के एक्सपर्ट मानते हैं कि इस बात का कोई चिकित्सा आधार या सबूत नहीं है कि इनमें से कोई भी तत्व COVID-19 को ठीक कर सकता है। एक्सपर्ट की मानें तो भले ही ये सब तत्व मिलकर लक्षणों को शांत कर सकते हैं और किसी तरह से इम्यून-बूस्टर हो सकते हैं लेकिन किसी भी तरह से वे संक्रमण का इलाज नहीं करते हैं। एक बार जब आपको संक्रमण हो जाता है तो ये तत्व इसका इलाज नहीं कर सकते हैं। कोरोनोवायरस के उपचार में उनकी कोई निश्चित सिद्ध भूमिका नहीं है। 

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अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, काली मिर्च और शहद में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जिन्हें कुछ वायरल संक्रमण के उपचार के लिए एंटीवायरल दवाओं का एक अच्छा विकल्प माना जाता है। वर्तमान में अमेरिका में एक अध्ययन हो रहा है, जिसमें जांचकर्ता COVID-19 रोगियों के उपचार में प्राकृतिक शहद की प्रभावकारिता निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। 

इसके अलावा, अदरक को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में जाना जाता है लेकिन ये नोवल कोरोनावायरस के लिए कोई इलाज नहीं है।

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