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आंखों में दर्द के कारण, निदान और उपचार

आंखों के विकार By सम्‍पादकीय विभाग , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 19, 2011
आंखों में दर्द के कारण, निदान और उपचार

आँखों का दर्द एक सामान्य लक्षण है, जिसके कारण डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ सकता है। बीमारी की स्थिति पर ही इलाज का तरीका निर्भर करता है। नेत्ररोग विशेषज्ञ ही समझ सकता है कि आपको तकलीफ के लिए किस इलाज की आवश्‍कता होगी।

आंखों का दर्द एक सामान्य लक्षण है, जिसके कारण डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ सकता है। आंखों के दर्द विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं-जैसे-जलन, चुभन, आंखों में कुछ पड़ जाने जैसी अनुभूति, दर्द, फड़कन, या अचानक उठनेवाला तेज दर्द आदि। आंखों में दर्द के लक्षण सिरदर्द एवं साइनस के लक्षणों से मिलते हैं, इसलिए आपके लिए इनके बीच अंतर करना कठिन हो सकता है।

कारण

कई रोगों के कारण आंखों या इसके आसपास दर्द हो सकता है। अगर आपका दर्द स्थायी और तीव्र हो, या इसके साथ आंखों की रोशनी कम हो गई हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आंखों के दर्द के कुछ आम कारण हैं-

  • कंजक्टिविटी(पिंक आई) या पलकों का सूजन
  • कॉन्टेक्ट लेंस कम्पलीकेशन्स
  • आंखों में बाहरी किसी चीज का होना
  • संक्रमण, चोट या कोई अन्य तकलीफ
  • कार्नियल पर चोट या घाव (बाहरी कोई चीज, घर्षण)
  • आंखों की सर्जरी
  • ग्लूकोमा (आंखों पर दबाव बढना)
  • माइग्रेन का दर्द
  • साइनस
  • जल जाना
  • पलक पर फुंसी (होर्डिओलम)

eye care


लक्षण

आंखों के दर्द की तीव्रता भिन्न-भिन्न हो सकती है, और प्रत्येक व्यक्ति इस दर्द से अलग-अलग सीमा तक प्रभावित हो सकते हैं। आंखों की समस्या से पीड़ित लोगों में निम्नलिखित लक्षण मिल सकते हैं-

  • आंख या इसके आस-पास दर्द
  • द़ष्टि कमजोर पड़ना (आंशिक रूप से या पूर्णतः)
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
  • दो-दो चीजें दिखना
  • प्रकाश स्रोत के चारों ओर प्रकाशवृत्त दिखना
  • हवा में बुलबुले, धब्बे या छाया दिखना
  • आंखों को घुमाने में अक्षमता
  • आंखों को घुमाने में दर्द
  • प्रकाश की कौंध या धारियां दिखना
  • आंख के दर्द के साथ तेज सिरदर्द


जांच और रोग की पहचान

डॉक्टर के लिए आपके दर्द के कारणों की पहचान के लिए रोगी के पहले के चिकित्सकीय और अन्य परिस्थितियों की जानकारी आवश्यक होती है। डॉक्टर आपसे पूछ सकता है कि दर्द कब शुरू हुआ, कहां दर्द है, कितनी देर तक रहता है, किस वजह से दर्द बढता या घटता है, क्या आप कॉंन्टेक्ट लेंस का उपयोग करते हैं; आंखों में चोट या सर्जरी का अगर कोई इतिहास रहा हो तो उससे संबंधित तथ्य भी पूछा जा सकता है। आपके डॉक्टर आंखों की जांच सहित पूरी शारीरिक जांच करेगें, जैसे-आपकी दृष्टि, आंखों और इसके आस-पास के ऊतकों का निरीक्षण, आंखों की गति, दृष्टि क्षेत्र(परिधीय दृष्टि), पुतली का प्रकाश से प्रतिक्रिया। आपके इतिहास औऱ परीक्षणों के आधार पर डॉक्टर इनमें से कुछ या सभी की सलाह दे सकते हैं-

  • ऑप्थेल्मोस्कोप के द्वारा आंखों की जांच-आंखों के पीछे देखने के लिए। इससे ऑप्टिक डिस्क औऱ रक्त नलिकाएं देखी जा सकती हैं।
  • स्लिट लैंप परीक्षणः यह एक सूक्ष्मदर्शी है, जिससे आंख की सतह को गौर से देखा जा सकता है, जैसे-कॉर्निया का घर्षण या अल्सर/घाव होना।
  • अगर ग्लूकोमा का संदेह हो तो स्लिट लैंप या टोनोपेन् नाम के उपकरण पर टोनोमीटर लगाकर इसकी मदद से अपनी आंखों पर दबाव की जांच करें।
  • आंखों में दर्दनिवारक दवा की एक बूंद डालकर इसका परीक्षण करें। अगर आंखों की सतह पर दर्द हो तो यह दर्द ठीक हो जाएगा, जबकि अगर दर्द आंखों की भीतरी संरचना में हो तो यह ठीक नहीं होगा।
  • फ्लोरेसिन जांचः इस जांच में आंख में फ्लोरेसिन नाम का एक रंजक डाला जाता है, जिससे घर्षण, घाव या कॉर्निया में किसी तकलीफ का पता लगाया जा सके।

eye treatment

उपचार

आंख के दर्द के पीछे पलकों पर हुई छोटी सी फुंसी से लेकर गंभीर समस्याएं, जैसे-ग्लूकोमा या कोई दूसरी बड़ी समस्या तक हो सकती है। चिकित्सा रोग की स्थिति पर निर्भर करता है औऱ नेत्ररोग विशेषज्ञ इसे सबसे सही समझ सकता है।

  • कंजक्टिवाइटिस(पिंक आई या आंख लाल होना)-बैक्टीरिया या वायरस से हुए संक्रमण में अंतर करना कठिन है, इसलिए संक्रमण की आशंका होने पर आई ड्रॉप, मल्हम, और दर्द की दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। एलर्जी से कंजक्टिवाइटिस होने पर इसके इलाज में एंटीहिस्टामिन, या दूसरी एंटीएलर्जिक आई ड्रॉप का उपयोग किया जाता है।
  • कॉर्नियल घर्षण या घावः एंटीबायोटिक आई ड्रॉप(संक्रमण रोकने के लिए), आंखों का मल्हम, और दर्द की दवाएं काम में लाई जाती हैं।

 

Image Courtesy- Getty Images

 

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