साल 2050 तक हर 4 में से 1 व्यक्ति को होगी बहरेपन की समस्या, WHO ने किया अलर्ट

Updated at: Mar 03, 2021
साल 2050 तक हर 4 में से 1 व्यक्ति को होगी बहरेपन की समस्या, WHO ने किया अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बहरेपन या हियरिंग लॉस को लेकर जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक 4 में से 1 व्यक्ति को होगी सुनने की समस्या।

Prins Bahadur Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Prins Bahadur SinghPublished at: Mar 03, 2021

दुनियाभर में लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए काम करने वाली संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने सुनने की शक्ति, बहरेपन और हियरिंग लॉस को लेकर विश्व की पहली रिपोर्ट जारी की है। डब्ल्यूएचओ की तरफ से जारी इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। ग़ौरतलब हो कि 3 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व श्रवण दिवस (World Hearing Day) मनाया जाता है। वर्ल्ड हियरिंग डे के मद्देनज़र विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बहरेपन और सुनने की शक्ति को लेकर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2050 तक दुनिया के एक चौथाई लोगों को सुनने से संबंधित समस्याओं से जूझना पड़ेगा। आपको बता दें कि दुनियाभर में बहरेपन (हियरिंग लॉस) और कानों की सेहत को लेकर जागरूकता फ़ैलाने के लिए 3 मार्च को मनाए जा रहे वर्ल्ड हियरिंग डे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी थीम 'हिअरिंग केयर फॉर ऑल – जाँच, पुनर्वास संवाद' रखी है। विश्व श्रवण दिवस (World Hearing Day) को लेकर ही बहरेपन या सुनने शक्ति में कमी पर आधारित दुनिया की पहली भी जारी की गई है।

hearing loss problem

दुनिया भर में 2.5 बिलियन लोग होंगे प्रभावित (World Health Organization Report on Hearing Problems)

WHO ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि साल 2050 तक पूरी दुनिया में लगभग 2.5 बिलियन लोग सुनने की शक्ति या बहरेपन की समस्या से किसी न किसी रूप में ग्रसित होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस विषय पर कोई ठोस कदम नही उठाया गया तो लगभग 700 मिलियन लोगों को सुनने से संबंधित समस्या होगी जिसमें उन्हें किसी न किसी प्रकार के इलाज की जरूरत पड़ेगी। बहरेपन या सुनने की शक्ति को लेकर जारी की गयी दुनिया की पहली रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि, "हमारी सुनने की क्षमता अनमोल है। अगर हियरिंग लॉस या बहरापन का समुचित इलाज नही हुआ तो यह लोगों के कम्युनिकेट करने की क्षमता, पढाई-लिखाई और रोज़गार पर व्यापक प्रभाव कर सकता है।"

hearing loss WHO Report

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेबियस ने कहा है कि इसकी वजह से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रिपोर्ट बहरेपन के होने वाले प्रभावों को दर्शाती है और उसके साथ ही एविडेंस बेस्ड समाधान भी देगी जिसको दुनियाभर के देश अपने हेल्थ सिस्टम के द्वारा लागू कर लोगों की जिंदगी बेहतर कर सकते हैं।

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रिपोर्ट में दी गई अहम जानकारी (Main findings of the report)

बहरेपन और सुनने की शक्ति को लेकर WHO द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों में इसको लेकर सही जानकारी का अभाव है। सही जानकारी के अभाव में लोग बहरेपन या हियरिंग लॉस के लक्षणों पर गौर नही करते हैं और ऐसी स्थिति को नज़रअंदाज़ करते हैं। रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इतना ही नही हेल्थ केयर की सुविधा देने वाले संस्थानों को भी बहरापन, हियरिंग लॉस और कानों की उचित देखभाल और इनसे बचने के उपायों की सही जानकारी नही है। बहरेपन के जोखिमों की बात करते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर देशों में कान और सुनने की शक्ति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ सिस्टम में कोई पहल नही की गई है।

कम आय वाले देशों में प्रति मिलियन की आबादी के हिसाब से लगभग 78 प्रतिशत कान, नाक और गले के विशेषज्ञों की कमी है और प्रति मिलियन लोगों पर एक ऑडियोलॉजिस्ट की संख्या 93 प्रतिशत कम है। सुनने की क्षमता को लेकर पहली बार सामने आई विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की वैश्विक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि बहरेपन और हियरिंग लॉस की समस्या पर लगाम लगाने के लिए देशों को राष्ट्रीय स्तर पर सुधार करने पड़ेंगे।

बहरेपन या हियरिंग लॉस का मुख्य कारण (Main Causes of Deafness or Hearing Loss)

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बहरेपन या इससे जुड़ी हुई समस्याओं का मुख्य कारण सही जानकारी का अभाव और कान की बीमारी में लापरवाही है। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों में बहरेपन की समस्या के कारण  रूबेला और मेनिन्जाइटिस को टीका करण, उचित देखभाल और स्क्रीनिंग के माध्यम से 60 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। बच्चों के अलावा बड़े लोगों में इस समस्या को ध्वनि नियंत्रण जैसे कि तेज आवाज़ से दूरी, कानों की सुनने की क्षमता के अनुसार आवाज़ को सुनने और ओटोटॉक्सिक दवाओं के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। बहरेपन और कानों से जुड़े रोगों की पहचान कर इसका उचित इलाज किये जाने पर भी यह समस्या कम हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि COVID-19 की तरह इसकी भी स्क्रीनिंग की जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक बहरेपन या हियरिंग लॉस की समस्या के बढ़ने के पीछे ये कारण हैं।

  • उचित जानकारी का अभाव
  • कानों को लेकर उचित इलाज की कमी
  • संक्रमण या जन्म दोष
  • बढ़ता शोर और आधुनिक जीवनशैली
  • ध्वनि प्रदूषण
ear problems

समस्या पर काबू पाने के लिए होगी बड़े निवेश की जरूरत (Estimated Cost to Deal with Hearing Loss)

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बहरेपन और सुनने की क्षमता को लेकर जारी की गई दुनिया की पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समस्या को रोकने के लिए दुनियाभर के देशों को आगे आना पड़ेगा। कानों और सुनने से जुड़ी समस्याओं में शुरुआती लक्षण दिखने पर जांच और उचित इलाज बेहद जरूरी है। सुनने की शक्ति को बेहतर करने के लिए मौजूद आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाये गए कदमों से इसमें कमी आएगी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि हियरिंग लॉस या बहरेपन से जूझ रहे लोगों को कैप्शनिंग और साइन लैंग्वेज के जरिए संवाद स्थापित करने में आसानी होती है इसलिए ऐसी शिक्षा पद्धति को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए लगभग 100 रूपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से प्रतिवर्ष का खर्च आएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इस रिपोर्ट में बताए गए क़दमों को लागू करने के लिए अमेरिकी डॉलर के हिसाब से 1.33 डॉलर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च उठाना पड़ेगा।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेबियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) के मुताबिक, 'उचित समय पर सही कदम न उठाने की वजह से हियरिंग लॉस या बहरेपन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए हर साल एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान भी झेलना पड़ेगा।' मौजूदा वक्त में वैश्विक स्तर पर 20 फीसदी लोग सुनने की समस्या से ग्रसित हैं ऐसे में इसके खिलाफ उचित कदम उठाने की सख्त जरूरत है। इस रिपोर्ट के मुताबिक जागरूकता और इलाज को लेकर सभी देशों ने उचित कदम नही उठाया तो 20 प्रतिशत की जगह यह आंकड़ा 2050 में बढ़कर 2.5 बिलियन हो जायेगा।

यह आर्टिकल विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) द्वारा वर्ल्ड हियरिंग डे के मद्देनज़र बहरेपन या हियरिंग लॉस पर जारी की गई दुनिया की पहली रिपोर्ट पर आधारित है। आर्टिकल में दिए गए सभी आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में से लिए गए हैं। WHO द्वारा जारी इस रिपोर्ट को आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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