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बच्चों को भी हो सकता है इस्नोफिलिया रोग, जानें कारण और लक्षण

घरेलू नुस्‍ख By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 09, 2018
बच्चों को भी हो सकता है इस्नोफिलिया रोग, जानें कारण और लक्षण

इस्नोफीलिया एक ऐसा रोग है जो भले ही बहुत कम लोगों को होता है लेकिन किसी खतरनाक बीमारी से कम नहीं है। 

इस्नोफीलिया एक ऐसा रोग है जो भले ही बहुत कम लोगों को होता है लेकिन किसी खतरनाक बीमारी से कम नहीं है। अक्सर लोग इस्नोफिलिया को एलर्जी समझ लेते हैं। जबकि ये रोग एलर्जी से कई मायनों में अलग है। इस्नोफीलिया ल्यूकोसाइट का एक हिस्सा है, जिसे सामन्यता 1 से 6 प्रतिशत तक ही होना चाहिए। इसकी संख्या बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे कि एलर्जीजन्य बुखार, दमा, फाईलेरिएसिस, त्वचा रोग, घातक एनीमिया या ट्रौपिकल इस्नोफीलिया।

क्यों होती है ये बीमारी

इस्नोफिलिया किसी भी व्‍यक्ति को हो सकती है। यह हमारे शरीर के इम्‍यून सिस्‍टम की प्रतिक्रिया दिखाती है। इस्नोफिलिया से बचने के लिए हमारा इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत होना जरूरी है। जब हमारा शरीर किसी विशेष प्रकार के बाहरी तत्‍व के संपर्क में आता है, तो उसकी प्रतिक्रिया स्‍वरूप हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली का व्‍यवहार इस्नोफिलिया के रूप में सामने आता है। इस्नोफिलिया करने वाले पदार्थों को 'एर्लजंस' कहते हैं। पराग, धूल और कुछ प्रकार के आहार आदि एलर्जी का कारण बन सकते हैं। हर व्‍यक्ति को अलग चीज से एलर्जी होती है। जरूरी नहीं कि किसी एक व्‍यक्ति को जिस चीज से एलर्जी हो, दूसरे को भी वही परेशानी हो।

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जानें इस्नोफीलिया के लक्षण

  • बलगम निकलने के साथ कठिनाई होना।
  • सांस लेने में परेशानी होना, गले के चारों ओर दवाब महसूस होना।
  • बरसात या नम मौसम में ठंड लगना। 
  • सर्दी या स्पर्श के प्रति संवेदनशील, ढीला-सा बलगम।
  • खांसी आने से पहले सांस लेने में में कठिनाई, गले में सुरसुराहट, छाती के निचले सिरे में सुई चुभने या पूरी शरीर में दर्द होना, आदि।

क्या है इसका उपचार

  • तीन चम्‍मच आलू का आटा एक गिलास पानी में घोल लें। इस पानी को अपने नहाने के पानी की बाल्‍टी में मिला लें। इस पानी से नहाने से रेशेज दूर होते हैं।
  • रेशेज होने पर अवाकाडो का पेस्‍ट लगाने से भी बहुत फायदा होता है। अवाकाडो में एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स काफी भरपूर मात्रा में होते हैं। यह ल्‍यूटीन का उच्‍च स्रोत है, जो आंखों की बीमारी से बचाने में मदद करता है।
  • इस्नोफिलिया से दूर रखने में ग्रीन टी काफी महत्‍वपूर्ण होती है। अगर आपको ग्रीन टी पसंद नहीं है, तो आप ब्‍लैक टी का सेवन भी कर सकते हैं। कैमोमाइल टी भी इसका एक विकल्‍प है। इसमें शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार लेने से इस्नोफिलिया दूर होती है।
  • दिन में दो बार एक-दो चम्‍मच शहद का सेवन इस्नोफिलिया को दूर करने का अच्‍छा घरेलू उपाय माना जाता है। शहद में मौजूद तत्‍व आपके शरीर के विषैले पदार्थों को दूर करने का काम करते हैं।
  • इस्नोफिलिया को दूर करने के लिए अदरक की उपयोगिता हमेशा से मानी जाती रही है। अदरक को एक टुकड़े को छीलकर उसके टुकड़े को मसलकर एक मग में डाल दें। अब इसमें उबलता हुआ पानी मिला दें। इसे थोड़ी देर तक पानी में डुबा रहने दें और फिर एक सांस में इसे पी जाएं। यह सर्दी-खांसी की अच्‍छी दवा मानी जाती है और साथ ही एलर्जी में इसे सर्वश्रेष्‍ठ डायट माना जाता है।

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