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किसे है बढ़े हुए प्रोस्‍टेट का खतरा

पुरुष स्वास्थ्य By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 19, 2014
किसे है बढ़े हुए प्रोस्‍टेट का खतरा

उम्र बढ़ने के साथ-साथ ही व्‍यक्ति बीमारियों का पुलिंदा बनने लगता है, इनमें से एक बीमारी है प्रोस्‍टेट ग्रंथि का बढ़ना।

उम्र बढ़ने के साथ-साथ ही व्‍यक्ति बीमारियों का पुलिंदा बनने लगता है। 50 की उम्र के बाद ऐसा समय आता है जब आदमी को कई बीमारियां घेर चुकी होती हैं। इनमें से एक बीमारी है प्रोस्‍टेट ग्रंथि का बढ़ना।

बार-बार पेशाब जाने, सोते वक्‍त डिस्‍चार्ज हो जाना, बालों का सफेद होना, आदि कई ऐसे लक्षण प्रोस्‍टेट के बढ़ने का संकेत देते हैं। मेडिकल के शब्‍दों में इनलार्ज प्रोस्‍टेट को कई और नामों से भी जाना जाता है, जैसे - बीनाइन प्रोस्‍टेट, बीपीएच, और हाइपरप्‍लेसिया। इस लेख में हम आपको बताते हैं कि किसे इसका खतरा अधिक होता है।

Enlarged Prostat

उम्र

वे पुरुष जिनकी आयु 50 वर्ष या उससे अधिक है, उन्हें बीनाइन प्रोस्टेटिक हायपरप्लासिया (बीपीएच) होने का खतरा ज्‍यादा होता है। अंडकोश में बनने वाला हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन बीपीएच के विकसित होने में मदद करता है। बीपीएच होने वाले 85 फीसदी मामलों में पुरुषों की आयु 60 वर्ष से अधि‍क होती है। और तो और 40 वर्ष की आयु के बाद भी इस रोग के होने की आशंका कम होती है।

अंडकोष का निकलना

वे पुरुष जिनके अंडाशय किसी युवावस्था में आने से पहले ही किसी कारण से निकाल लिये जाते हैं, उन्हें बीपीएच होने का खतरा कभी नहीं होता। ऐसे पुरुष जिनके अंडाशय युवावस्था के बाद, लेकिन बीपीएच के लक्षण सामने आने से पहले निकाल लिये जाते हैं, उन्हें भी यह रोग होने का खतरा काफी कम होता है।

Enlarged Prostate: Who's At Risk

 

पारिवारिक इतिहास

यदि आपके परिवार में इस रोग का इतिहास है, तो आपको भी यह रोग होने की आशंका हो सकती है। इसलिए यदि ऐसा है, तो आपको अपनी नियमित जांच करते रहना चाहिए और किसी भी प्रकार का संदेह होने पर फौरन चिकित्सीय सहायता भी लेनी चाहिए।  

दिल की बीमारी और बीपीएच में संबंध

ऐसे भी कुछ प्रमाण मिले हैं कि दिल की बीमारी के लिए उत्तरदायी कुछ कारण भी बीपीएच के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इनमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का कम होना, डायबिटीज, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज, अनियमित जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियां कम करना, धूम्रपान, असंतुलित खानपान आदि शामिल हैं।


इन जोखिम कारकों से बचकर आप खुद को इस बीमारी से दूर रख सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने अंडाशयों की नियमित जांच करते रहें। यदि आपको कभी कोई भी अनियमितता दिखायी दे तो फौरन चिकित्सीय सहायता लें। इससे आप बीमारी के खतरों को कम कर सकते हैं।

 

 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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