Subscribe to Onlymyhealth Newsletter

भूखा दिमाग करता है बच्‍चों का विकास धीमा

लेटेस्ट
By Bharat Malhotra , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 27, 2014
भूखा दिमाग करता है बच्‍चों का विकास धीमा

बच्‍चे हर समय चॉकलेट और अन्‍य चीजों के खाने की मांग करते रहते हैं। इसके पीछे बड़ी वजह उनका भूखा मस्तिष्‍क होता है। एक अध्‍ययन के मुताबिक पांच साल तक के बच्‍चों के मस्तिष्‍क को संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए इस दौरान बच्&z

human brainछोटे बच्‍चे हर वक्त आईसक्रीम, चॉकलेट या और मीठी चीजें खाने की जिद करते हैं। कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्‍यों होता है। एक अध्ययन के अनुसार बचपन में हमारा शारीरिक विकास धीमा होता है।

 

इस दौरान हमारे विकासशील मस्तिष्क को ऊर्जा देने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधन चाहिये होते हैं। अध्ययन में बताया गया है कि जीवन के शुरुआती दौर में मानव की अधिकतर ऊर्जा की खपत दिमाग में होती है। शायद यही कारण है कि बचपन के दौरान मानव के शारीरिक विकास की प्रक्रिया धीमी होती है।



नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के वीनबर्ग कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में एंथ्रोपोलॉजी के प्रोफेसर क्रिस्टोफर कुजावा का कहना है कि बतौर मनुष्य, हमें काफी कुछ सीखने की जरूरत होती है। और सीखने की प्रक्रिया के लिए जटिल और ऊर्जा का भूखा मस्तिष्क पहली जरूरत है।



पांच साल के बच्चे के दिमाग को भारी मात्रा में ऊर्जा की दरकार होती है। इस उम्र में बच्‍चे का दिमाग सामान्‍य व्‍यस्‍क के दिमाग की तुलना में दोगुना ग्‍लूकोज इस्‍तेमाल करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दिमाग पांच साल की उम्र में सबसे ज्यादा ग्लूकोज की खपत करता है। चार साल की उम्र में दिमाग, शरीर के 66 फीसदी ग्लूकोज की खपत करता है।



कुजावा ने बताया कि मध्य-बाल्यकाल में मस्तिष्क का विकास तेजी पर होता है क्योंकि मस्तिष्क को अधिकतर सूत्रयुग्मन इसी उम्र में करना होता है, जिस समय सफल मनुष्य बनने के लिए हमें बहुत सारी चीजें सीखने की जरूरत होती है। इस उम्र में शरीर की कुल कैलोरी में से दो तिहाई कैलोरी की खबत अकेले मस्तिष्क करता है और शेष कैलोरी का प्रयोग पूरा शरीर करता है।



नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के सह-लेखक विलियम लियोनार्ड ने बताया कि हमरे मस्तिष्क की भारी ऊर्जा की मांग पूरी करने के कारण बच्चे थोड़ी धीमी गति से बढ़ते हैं और शारीरिक गतिविधियां भी कम करते हैं। परिणाम बताते हैं कि हमारे बहुमूल्य और व्यस्त बचपन के दिमाग को ऊर्जा देने के कारण बचपन के दिनों में मनुष्य का शारीरिक विकास धीमा होता है। यह अध्ययन 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज' जर्नल में प्रकाशित हुआ।

 

Image Courtesy- getty images

Written by
Bharat Malhotra
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 27, 2014

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Trending Topics
More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK