जब रिश्तें में बढ़े भावनात्मक असुरक्षा, तो करें ये 5 काम

Updated at: Dec 21, 2017
जब रिश्तें में बढ़े भावनात्मक असुरक्षा, तो करें ये 5 काम

भावनात्मक जुड़ाव अधिक होने पर ही भावनात्मक असुरक्षा भी पनपती है। 

Rashmi Upadhyay
डेटिंग टिप्सWritten by: Rashmi UpadhyayPublished at: Dec 21, 2017

जब भी कोई किसी से नया रिश्ता बनाता है तो वह उससे पहले भावनात्मक रूप से ही जुड़ता है। लेकिन कई बार भावनात्मक जुड़ाव इतना ज्यादा हो जाता है कि भावनात्मक असुरक्षा पनपने लगती है। भावनात्म‍क रिश्तों में असुरक्षा की भावना पनपना आम बात है। कई बार भावनात्मक असुरक्षा से पीडि़त होने की स्थिति, भावनात्मक शोषण को भी जन्म देती है। भावनात्मक शोषण से बचने के लिए जरूरी है मानसिक-भावनात्म‍क और व्यावहारिक तैयारी। आप अपने आप को मजबूत बनाकर इस समस्या से निपट सकते हैं। आइए जानें भावनात्मक असुरक्षा के लक्षणों के बारे में।

इसे भी पढ़ें : शादी के बंधन को मजबूत रखने का 10 बेस्‍ट फॉर्मूला

  • अकेलापन भावनात्मसक असुरक्षा का सबसे बड़ा लक्षण हो सकता है। जब कोई व्यक्ति अपनों के साथ होते हुए भी अकेलापन महसूस करें तो इसका अर्थ है कि उनमें असुरक्षा की भावना पनपने लगी है।
  • कई बार व्यक्ति बिना वजह चिड़चिड़ा हो जाता है और छोटी-छोटी बात पर गुस्सा करने लगता है जिससे भावनात्मक रिश्ते भी प्रभावित होने लगते है।
  • कुछ व्यक्ति भावनात्म‍क रूप से किसी अन्य व्यक्ति से इतना अधिक जुड़ जाते हैं कि उनमें कुछ खोने या अपने साथी से दूर होने का खतरा बना रहता है। नतीजन वे अजीब-अजीब से काम करने लगते हैं और भावनात्मक रूप से परेशान हो जाते हैं।
  • कई बार संबंधों में दरार या किन्ही कारणों से जब दूसरा साथी सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं करता तो व्यक्ति भावनात्मनक रूप से परेशान होने लगता है और सही प्रतिक्रिया पाने के लिए और अपने साथी के साथ डेटिंग करने के लिए अपना भावनात्मक शोषण करवाता रहता है।
  • जब भी कोई व्यक्ति भावनात्मक असुरक्षा की भावना से गुजर रहा होता है, तो उससे उबरने के लिए उसे मानसिक-भावनात्मक और व्यवहारिक तैयारी करनी जरूरी होती है।
  • भावनात्मक असुरक्षा की भावना के अन्य लक्षणों में व्यक्ति  केयरलैस हो जाता है और वह अपनी और अपने साथी की कोई परवाह नहीं करता।
  • व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता। इतना ही नहीं वह हर समय तनाव में रहने लगता है।
  • भावनात्मक असुरक्षा महसूस होने पर व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर संवेदनशील होकर रोने लगता है।
  • वह अपने साथी का ठीक प्रकार से ख्याल नहीं रख पाता पाता।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Relationship In Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK