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सरोगेसी की मदद से मां बनी एकता कपूर, जानें इस तकनीक के फायदे और नुकसान

महिला स्‍वास्थ्‍य By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 01, 2019
सरोगेसी की मदद से मां बनी एकता कपूर, जानें इस तकनीक के फायदे और नुकसान

टीवी की क्वीन और वेटरन एक्टर जितेंद्र कपूर की बेटी एकता कपूर हाल ही में मां बन गई हैं। दरअसल, एकता कपूर ने मां बनने का सुख प्राप्त करने के लिए अपने भाई तुषार कपूर की तरह सरोगेसी तकनीक का सहारा लिया है। लंबे इंतजार के बाद 27 जनवरी को एकता के बेटे न

टीवी की क्वीन और वेटरन एक्टर जितेंद्र कपूर की बेटी एकता कपूर हाल ही में मां बन गई हैं। दरअसल, एकता कपूर ने मां बनने का सुख प्राप्त करने के लिए अपने भाई तुषार कपूर की तरह सरोगेसी तकनीक का सहारा लिया है। लंबे इंतजार के बाद 27 जनवरी को एकता के बेटे ने आखिरकार उन्हें मां बना ही दिया है। एकता कपूर की डॉक्टर एकता नंद‍िता पालशेटकर का कहना है कि एकता कपूर कई साल पहले से उनके पास मां बनने की इच्छा लेकर गई थी। लेकिन यह सपना उनका 2019 में पूरा हुआ है। एकता की डॉक्टर का कहना है कि सरोगेसी को उन्होंने सबसे लास्ट विकल्प रखा था। इससे पहले उन्होंने एकता की प्रेग्नेंसी के ल‍िए IUI के कई साइकल किए, कई साइकल IVF के भी ट्राई किए। लेकिन इन सब की विफलताओं के चलते उन्हें सरोगेसी तकनीक का सहारा लेना पड़ा।

एकता कपूर सरोगेसी के जरिए मां बनी हैं। बता दें कि, भाई तुषार कपूर की तरह एकता ने भी सरोगेसी के जरिए मां बनने का विकल्प चुना था। खबर के मुताबिक 27 जनवरी को उनके घर बेटे का जन्म हुआ है। एकता का बेटा पूरी तरह से स्वस्थ है और एकता जल्द ही उन्हें अपने घर ले आएंगी। एकता कपूर से पहले उनके भाई तुषार कपूर सरोगेसी के जरिए पिता बने थे। इनके साथ ही साथ निर्माता-निर्देशक करण जौहर भी इसी तरह पिता बने थे। करण के दो जुड़वां बच्चे हैं, जिनके नाम यश और रूही है। बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान के बेटे अबराम खान का जन्म भी सरोगेसी के जरिए हुआ है।

जानिए क्या होता है सरोगेसी

मां बनना एक महिला को संपूर्ण होने का अहसास दिलाता है। कुछ वजहों से अगर प्राकृतिक रूप से महिलाएं मां बनने में असमर्थ है तो वो सरोगेसी की मदद लेती है। सरोगेसी का मतलब होता है किराए की कोख। सरोगेसी में तीन लोग शामिल होते है। मां-बाप और एक अन्य महिला जो शुक्राणुओं का मेल परखनली विधि से करवा कर भ्रूण को सरोगेट मदर की बच्‍चेदानी में प्रत्‍यारोपित कर दिया जाता है। इसमें बच्‍चे का जैनेटिक संबंध माता-पिता दोनों से होता है। शाहरूख खान और आमिर खान दोनों ने ही इस तरीके को अपनाया है। इसके अलावा ट्रेडिशनल सरोगेसी में पिता के शुक्राणुओं को एक अन्य महिला के अंडाणुओं के साथ निषेचित किया जाता है। इसमें जैनेटिक संबंध सिर्फ पिता से होता है, जिसके जरिए तुषार कपूर पिता बने हैं। सरोगेसी की ज्यादातर जरूरत नि:संतान कपल को होती है जो या तो किसी बीमारी, आईवीएफ तकनीक के फेल हो जाने पर, बार-बार गर्भपात की स्थिति या शारीरिक असमक्षतों के चलते अपना बच्चा नहीं कर पा रहें हो। 

सरोगेसी के फायदे

  • यह तकनीक उन लोगों के लिए एक वरदान है जो किसी कारणवश माता पिता बनने का सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
  • आजकल बड़ी उम्र में शादी करना मानो एक ट्रेंड बन गया है। बड़ी उम्र में गर्भवती होने से महिलाओं की बच्चेदानी कई बार सपोर्ट नहीं कर पाती है। ऐसे लोग सरोगेसी तकनीक का फायदा उठा सकते हैं।
  • यदि किसी कपल्स में से किसी एक पार्टनर की किसी हादसे में मौत हो जाती है तो पहले के समय में उसके बाद जीने का कोई माध्यम नहीं बचता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है, ऐसे लोग सरोगेसी से अपना खुद का बच्चा प्राप्त कर सकते हैं।
  • जो लोग शादी नहीं करते हैं या किसी कारणवश नहीं हो पाती है वह भी बिना शादी के माता या पिता बनने का सुख प्राप्त कर सकते हैं। 
  • आम लोग ही नहीं बल्कि कई बॉलीवुड सेलेब्स भी इस तकनीक का लाभ उठा चुके हैं।

क्या हैं सरोगेसी के नुकसान

आजकल सरोगेसी का प्रयोग एक फैशन की तरह होने लगा है। कई महिलाएं लेबर पेन से बचने व कामकाज के ज्यादा व्यस्त होने के कारण अपनी संतान के लिए इसका सहारा लेनी लगी है। इसी के चलते सरोगेसी का दुरोपयोग भी होने लगा है। अन्य देशों की तुलना में भारत में ज्यादा आसान और सस्ती मानी जाती है। जहां हॉस्पिटल कपल से अच्छी कीमत वसूल कर गरीब व जरूरतमंद महिला से सस्ते में गर्भधारण करा लेते है। इन्ही कारणों के चलते देश में सरोगेसी बिल बनाने की जरूरत पड़ी। एक जानकारी के मुताबिक सरोगेसी के मामले में दुनिया में सर्वाधिक भारत में ही होते हैं। यदि पूरी दुनिया में साल में 500 सरोगेसी के मामले होते हैं तो उनमें से 300 सिर्फ भारत में होते हैं।

सरोगेसी बिल क्या है

सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 के तहत अब बिना शादीशुदा, लिव-इऩ कपल, विदेशी और समलैंगिक जोड़े सरोगेसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। सरोगेट मदर का भी आपका रिश्तेदार होना बहुत जरूरी है साथ वह महिला पहले ही मां बन चुकी हो। सरोगेसी क्लीनिक का रजिस्टर्ड होना ज़रूरी होगा। अगर क्लीनिक सरोगेट मां की उपेक्षा करता है या फिर पैदा हुए बच्चे को छोड़ने में हिस्सा लेता है तो क्लीनिक चलाने वालों पर 10 वर्ष की सज़ा और 10 लाख तक का ज़ुर्माना लग सकता है। सरोगेसी के लिए जोड़े की शादी को कम से कम पांच साल हो जाने चाहिए। जोड़े का कोई अपना बच्चा हो या फिर उन्होंने कोई बच्चा गोद ले रखा हो, तो उन्हें सरोगेसी की इजाज़त नहीं होगी। इसके लिए राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड बनेगा जिसके प्रमुख स्वास्थ्य मंत्री होंगे। इस बोर्ड के सदस्यों में दो महिला लोकसभा सांसद औऱ एक राज्यसभा महिला सांसद होगी।

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