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दिमाग पर डायबिटीज़ का प्रभाव

डायबिटीज़ By Gayatree Verma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 12, 2012
दिमाग पर डायबिटीज़ का प्रभाव

डायबटीज एक भयानक बीमारी है क्योंकि इससे शरीर के कई भाग प्रभावित होते हैं जिसमें दिमाग भी शामिल है।

Quick Bites
  • ब्लड शुगर नियंत्रित न होने का परिणाम है डायबिटीज।
  • डायबिटीज विभिन्न अंगों के साथ दिमाग को भी प्रभावित करता है।
  • यह रोग मोटे या कम मेहनत करने वालों को अधिक होता है।
  • इससे हाइपोग्लाइसीमिया और कीटोएसिडोसिस रोग होने का भी खतरा होता है।

 

डायबिटीज एक भयानक बीमारी है क्योंकि इससे शरीर के कई भाग प्रभावित होते हैं जिसमें दिमाग भी शामिल है। जब ब्लड शुगर निंयत्रित नहीं होता है, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं। यह समस्याएं उचित ईलाज लेने से कुछ समय में ठीक भी हो सकती हैं और कभी-कभी जीवन भर भी ईलाज करना पड़ सकता है।

 Diabetes

क्या है डायबिटीज

मधुमेह (डायबिटीज) वह रोग है जिसमें ग्लूकोज की मात्रा का शरीर में सही तरीके से प्रयोग नहीं हो पाता है। यह रोग ज्यादातर मोटे व कम शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों में होता है। भोजन में ज्यादा मात्रा में मीठा, दूध, दही और मांस-मछली, नये चावल, आलू, चीनी आदि का ज्यादा सेवन करने से या कफ वाली चीजों का सेवन करने से भी मधुमेह (डायबटीज) का रोग हो जाता है।


आईए जानें डायबटीज से दिमाग पर होने वाले असर के बारे में।

  • कीटोएसिडोसिस

कीटोएसिडोसिस(ketoacidosis) में इंसुलिन के साथ रक्त शर्करा के उच्च स्तर व कार्बनिक अम्ल जिसे किटोन्स कहते हैं की कमी से रोगी में डिहाईड्रेशन की समस्या हो जाती है। कीटोएसिडोसिस(ketoacidosis) में दिमाग पर असर हो सकता है। इसमें रोगी बीमार हो जाता है और सिर दर्द की समस्या होती है। कीटोएसिडोसिस सामान्यत: टाइप 1 मधुमेह रोगियों में पाया जाता है लेकिन यह किसी भी मधुमेह रोगी में विकसित हो सकता है। पुरुष व महिला दोनों ही बराबर मात्रा में कीटोएसिडोसिस प्रभावित होते हैं।

  • हृदयघात

डायबिटीज में हृदयाघात का खतरा बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि शरीर ग्लूकोज की ज्यादा मात्रा होने से कोलोस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है जो कि हृदयाघात का मुख्य कारण है। साथ ब्लड में शुगर की मात्रा से रक्त धमनियां क्षतिग्रस्त हो सकती है। ऐसा पाया गया है कि मधुमेह रोगियों में हृदय रोग का खतरा दुगना होता है। मधुमेह में रक्त धमनियों में रुकावट, व्लड क्लॉट व शिराओं का संकुचन की समस्याएं होने का खतरा बना रहता है। अगर रक्त धमनियां दिमाग में किसी बाधा के कारण रक्त का प्रवाह नहीं कर पा रहीं हैं तो इसे दिमाग की क्रियाएं नहीं होगीं और मृत्यु भी हो सकती है।

  • हाइपोग्लाइसीमिया

हाइपोग्लाइसीमिया के विकसित होने का कारण मधुमेह हो सकता है। मधुमेह रोगियों में डायबिटीज का  बहुत ज्यादा ईलाज लेने से हाइपोग्लाइसीमिया की समस्या पैदा हो सकती है। यह समस्या तब होती है जब ब्लड शुगर( ग्लूकोज) काफी कम होता है। हाइपोग्लाइसीमिया से दिमाग पर भी गंभीर असर हो सकता है और सिर दर्द, दोहरा दिखाई देना, धुंधला दिखाना, ज्यादा भूख लगना, चक्कर आना व भम्र पैदा होने की शिकायत हो सकती है। ग्लूकोज की पर्याप्त मात्रा लेने से यह लक्षण अपने आप दूर हो जाते हैं।

 

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Written by
Gayatree Verma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागApr 12, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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