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टीवी देखते समय स्‍नैक्‍स खाना हो सकता है खतरनाक

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By शीतल बिष्ट , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 31, 2019
टीवी देखते समय स्‍नैक्‍स खाना हो सकता है खतरनाक

अगर आपके बच्चे घंटों बैठकर टीवी देखते हैं, या फिर कंप्यूटर व वीडियो गेम्स का इस्तेमाल करते हैं, तो सर्तक हो जाएं। टीवी देखते समय स्‍नैक्‍स खाना सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं माना जाता है। स्नैक्स खाते समय टीवी देखना बच्‍चों के लिए खतरनाक

Quick Bites
  • टीवी देखते समय स्नैक्स हृदय रोग और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
  • गलत समय पर स्नैक्स से परहेज कर मेटाबोलिक सिंड्रोम से बचा जा सकता है।
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को ज्‍यादा रहता है।

अगर आपके बच्‍चे घंटों बैठकर टीवी देखते हैं, और टीवी देखते समय स्नैक खाना पंसद करते हैं, तो उनकी ये आदत तुरंत बदल डालिए। बच्‍चों की ये आदत जल्द ही उन्‍हें बीमार बना सकती है। खासकर किशोरावस्था में टीवी देखते समय स्नैक्स का सेवन करने की आदत हृदय रोग और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है। जी हां हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसके प्रति आगाह किया है।

अध्ययन में ऐसे बच्‍चे जो टीवी देखते समय स्नैक्स का ज्यादा सेवन करते हैं, उनके शरीर में मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा ज्यादा देखने को मिला है। यह ब्लड प्रेशर बढ़ने, हाई ब्लड शुगर, कमर के आसपास चर्बी जमा होने और असामान्य कोलेस्ट्रॉल के खतरे का कारक होता है। यह निष्कर्ष 12 से 17 साल की उम्र के 33,900 किशोरों पर किए गए अध्ययन के आधार पर निकाला गया है। ब्राजील की यूनिवर्सिटी फेडरल डो रियो ग्रांड डो सुल के शोधकर्ता बीटिज चान ने कहा, 'स्क्रीन पर समय गुजारने को सीमित करना जरूरी है, अगर ऐसा संभव नहीं है तो स्नैक्स से परहेज कर मेटाबोलिक सिंड्रोम से बचा जा सकता है'।

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मेटाबॉलिक सिंड्रोम

विशेषज्ञ अभी तक यह नहीं जान पाए हैं कि आखिर मेटाबॉलिक सिंड्रोम क्‍यों विकसित होता है। यह कई बीमारियों का मेल है और कोई अकेली बीमारी नहीं। तो, संभवत: इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

वैसे तो मेटाबॉलिक सिंड्रोम कोई एक बीमारी नहीं है। यह एक साथ कई बीमारियों के होने की वजह से होता है। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा का बढ़ना और अधिक मोटापा, ये सब चीजें मिलकर मेटाबॉलिक सिंड्रोम की वजह बनती हैं। आइए जानते हैं ऐसी कौन सी वो बीमारियां हैं जो मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लिए जिम्मेदार होती हैं।

बैड कोलेस्‍ट्रॉल की अधिकता

अगर आपके खून में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 150 मिग्रा/डेलि है, या फिर आप कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने की दवाईयां ले रहे हैं, तो आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। अधिक कोलेस्ट्रॉल धमनियों में प्लाक के रूप में जमा हो जाता है और धमनियों को ब्लॉक कर देता है, जिससे दिल का दौरा, धमनियों में रूकावट जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। ऐसे में इसे कंट्रोल करना जरूरी है।

गुड कोलेस्‍ट्रॉल कम होना

यदि पुरूषों के खून में गुड कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर 40 मिग्रा/डेलि है और महिलाओं में यह स्‍तर 50 मिग्रा/डेलि है, तो उन्‍हें मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे लोग जो पहले से कोलेस्ट्रॉल की दवाएं ले रहे हैं, उनमें इसका खतरा सामान्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा होता है।

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हाई ब्लड प्रेशर

सबसे ज्यादा मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को रहता है। सामान्‍य व्‍यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 माना जाता है। लेकिन अगर यह इस सामान्‍य स्‍तर से अधिक हो, तो आपको मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो सकता है। इसके अलावा अगर आप बीपी को काबू करने की दवा ले रहे हैं, तो भी आपको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हाई ब्‍लड प्रेशर की वजह से नसों पर दबाव बढ़ जाता है, इससे हार्ट-अटैक और स्‍ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। 

शुगर

यदि खाना खाने से पहले आपके शरीर में शुगर की मात्रा 100 से अधिक है, तो आपको सचेत रहने की जरूरत है। यह मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे की तरफ इशारा करता है, तो समझ जाइए कि आप मेटाबॉलिक सिंड्रोम की शिकार हो सकते हैं। 

मोटापा

जब शरीर में वसा की मात्रा बढ़ जाती है तो वह स्‍वास्‍थ्‍य पर हा‍निकारक प्रभाव डालने लगती है, जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द, अस्‍थमा और फेफड़ों की समस्‍या हो सकती है। पेट के आस-पास जमा अतिरिक्‍त चर्बी मेटाबॉ‍लिक सिंड्रोम का एक संभावित कारण हो सकती है। जानकार कहते हैं कि मोटापा मेटाबॉलिक सिंड्रोम के फैलने के पीछे सबसे अहम कारण है। शरीर के किसी अन्‍य हिस्‍से की अपेक्षा पेट और उसके असापास जमा होने वाली चर्बी आपके लिए अधिक घातक सिद्ध होती है। ध्‍यान रखें यह आपकी जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों पर भी निर्भर करता है।

इंसुलिन 

इंसुलिन वह हॉर्मोन होता है, जो शरीर को ग्‍लूकोज का उपयोग करने में सहायता प्रदान करता है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है। ऐसे लोग जिनमें इंसुलिन प्रतिरोधकता पैदा हो जाती है, तो इंसुलिन सही प्रकार काम नहीं कर पाता है। हमारा शरीर ग्‍लूकोज के बढ़ते स्‍तर का सामना करने के लिए इंसुलिन का अधिक से अधिक निर्माण करने लगता है। अंत में यही स्थिति डायबिटीज का कारण बनती है। पेट पर जमा चर्बी और इंसुलिन प्रतिरोधकता के बीच सीधा संबंध होता है। इसमें हॉर्मोन्‍स की भी एक भूमिका हो सकती है।  

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Written by
शीतल बिष्ट
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 31, 2019

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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