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एक्सपर्ट : मोमोज खाने से युवाओं में बढ़ रही है बीपी की समस्या, जानें इसके कारण?

अन्य़ बीमारियां By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Dec 14, 2018
एक्सपर्ट : मोमोज खाने से युवाओं में बढ़ रही है बीपी की समस्या, जानें इसके कारण?

आजकल लोगों की जिंदगी का ढंग काफी बदल गया है। मशीनों पर बढ़ती निर्भरता ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इससे हमें कई बीमारियां भी मिली हैं। 

आजकल लोगों की जिंदगी का ढंग काफी बदल गया है। मशीनों पर बढ़ती निर्भरता ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इससे हमें कई बीमारियां भी मिली हैं। उच्‍च रक्‍तचाप इनमें से एक है। यह बीमारी भले ही छोटी लगती हो, लेकिन हृदयाघात और अन्‍य हृदय रोग होने का यह प्रमुख कारण है। ऐसे में जरूरी है कि उच्‍च रक्‍तचाप को नियंत्रित रखा जाए। क्योंकि हाई ब्लडप्रेशर से शरीर के कई अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक या स्ट्रोक्स का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ सुझावों पर अमल कर उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) को काबू में लाया जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर को मापना आसान है और यह हमारे स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।

उम्र बढऩे के साथ ब्लडप्रेशर में वृद्धि होती है। युवाओं में यह लगभग 120/80 एमएमएचजी होता है। यहां पर 120 का अंक सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर कहा जाता है, जिसे आम भाषा में ऊपर का ब्लडप्रेशर कहते हैं। इसी तरह नीचे के ब्लडप्रेशर जैसे 80 को डाइस्टोलिक यानी नीचे का ब्लडप्रेशर कहा जाता है। बुजुर्गों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर प्रमुख रूप से बढ़ता है, जो लगभग 160/80 एमएमएचजी हो सकता है। युवाओं में 140 सिस्टोलिक से ऊपर ब्लडप्रेशर के होने और बुजुर्गों में 150 से अधिक होने पर आगे निगरानी की जरूरत होती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि फास्ट फूड यानि कि मोमोज, रोल और पिज्जा खाने से यह समस्या युवाओं में ज्यादा बढ़ रही है।

क्या हैं इसके दुष्प्रभाव

  • हाई ब्लडप्रेशर धमनियों को क्षति पहुंचाता है, जो हमारे शरीर के प्रत्येक अंग को रक्त की आपूर्ति करती हैं। हाई ब्लडप्रेशर दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है।
  • यह गुर्दे, किडनी और पेट के अलावा आंख को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर से मस्तिष्क की नसें फट सकती हैं।

क्या हैं इसके लक्षण

  • हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों में घबराहट का लक्षण प्रकट हो सकता है। सामान्य कार्य करने में बेचैनी के चलते उसे दिक्कत होती है। कुछ लोगों को सिर में भारीपन महसूस होता है, लेकिन कुछ लोगों में इसके कोई लक्षण प्रकट नहीं होते। इसलिए ब्लडप्रेशर की समस्या से ग्रस्त लोगों को नियमित रूप से जांच कराना चाहिए। ब्लडप्रेशर का पता अब इलेक्ट्रॉनिक मॉनीटर से भी लगा सकते हैं।
  • हाई ब्लडप्रेशर से आंखों में हुई क्षति का पता लगाने के लिए हमें अपनी रेटिना की धमनियों की जांच नेत्र विशेषज्ञ से करानी चाहिए। इसी तरह हृदय की क्षति की जांच ईसीजी से और गुर्दे की जांच पेशाब और रक्त की जांच से संभव है।
  • आज सबसे बड़ी चिंता यह है कि हाई ब्लडप्रेशर युवाओं को भी प्रभावित कर रहा है। मेरे पास नियमित रूप से 20 और 40 वर्ष की उम्र के लोग हाई ब्लडप्रेशर के कारण परामर्श लेने आते हैं। जबकि 10 साल पहले ऐसे मामले कभी-कभार ही सामने आते थे।
  • तनावपूर्ण जीवन शैली युवावस्था में हाई ब्लडप्रेशर से ग्रस्त होने का एक प्रमुख कारण है। अनियमित खान-पान व फलों और सब्जियों के बजाय जंक फूड्स और चिकनाई युक्त खाद्य पदार्र्थों को ग्रहण करना और नमक का अधिक सेवन हाई ब्लडप्रेशर के जोखिम को बढ़ा देता है। इसके अलावा व्यायाम न करना और निष्क्रिय जीवन-शैली भी इस रोग को बुलावा देती है।

क्या है इसका इलाज

हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के लिए अनेक दवाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें डॉक्टर के परामर्श से ही लेना चाहिए। इसके अलावा जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन करें। वजन को नियंत्रित रखें और धूम्रपान व शराब से परहेज करें। शारीरिक परिश्रम करें। प्रतिदिन व्यायाम करें। योग और ध्यान लाभप्रद हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ब्लडप्रेशर के बढऩे का तनाव के बढऩे से निकट का सीधा संबंध होता है। लोग अक्सर दवाएं लेने से इस कारण बचते हैं कि उन्हें स्थायी रूप से इन दवाओं को लेना होगा और ऐसी दवाओं के दुष्प्रभावों को लेकर भी वे चिंतित होते हैं। हालांकि डॉक्टर ऐसी दवाओं का चयन करते हैं, जिनका आप पर दुष्प्रभाव न हो। याद रखें-

  • नियमित रूप से ब्लडप्रेशर की निगरानी करें। भले ही कोई लक्षण प्रकट न हों।
  • यदि हाई ब्लडप्रेशर की दवा शुरू हो चुकी है, तो डॉक्टर के परामर्श से दवाएं लें। ब्लड प्रेशर केसामान्य होने पर भी दवाओं को जारी रखना चाहिए।
  • स्वास्थ्य की स्थिति में परिवर्तन होने, साइड इफेक्ट के कारण दवा के बदलने के बारे में डॉक्टर से परामर्श लें।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए घरेलू उपाय

  • नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए।
  • लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देता है। और कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित रखता है।
  • एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।
  • जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के अंतराल पर पीते रहें।
  • तरबूज के बीज की गिरी तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। इसका रोजाना सुबह एक चम्‍मच सेवन करें।

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