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दूषित और गंदा पानी पीने से हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां, जानें इनके लक्षण और बचाव

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By Atul Modi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 18, 2019
दूषित और गंदा पानी पीने से हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां, जानें इनके लक्षण और बचाव

भारत में जल‍जनित रोगों से होने वाली मौते असामान्‍य नहीं हैं। यहां हम आपको 5 ऐसी बीमारियों के बारे में बता रहे हैं जो दूषित जल के कारण होती हैं। इसके बारे में जानें और खुद का ब

पानी से संबंधित बीमारियां मौतों का सबसे आम कारण हैं। घरेलू उपयोग और पीने के लिए स्वच्छ पानी की कमी के कारण विकासशील देशों के शहरी और ग्रामीण दोनों हिस्सों में मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे भारत अछूता नहीं है। देश के ज्‍यादातर हिस्‍से सूखे की मार झेल रहे हैं, जहां पर लोगों को पीने का साफ पानी तक नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित पानी की वजह से कई रोग ऐसे हैं जो जानलेवा हैं। भारत में जलजनित बीमारियों के कारण होने वाली मौतों का प्रतिशत बहुत ज्‍यादा है। यहां, भारत में होने वाली 5 सबसे घातक जल जनित बीमारियों के बारे में हम आपको बता रहे हैं। 

 

डायरिया 

डायरिया भारत में पानी से संबंधित सबसे अधिक प्रचलित बीमारी है। यह ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है जो अक्सर उन्‍हें मृत्यु की ओर ले जाता है। डायरिया का संक्रमण दूषित भोजन और पीने के पानी से होता है। डायरिया का असर 2 सप्ताह तक रह सकता है और व्यक्ति को पूरी तरह से डिहाइड्रेट कर सकता है। 

दस्त के लक्षणों में शामिल हैं, चक्कर आना, चेतना की कमी, निर्जलीकरण, त्‍वचा का पीला होना, बहुत कम या पेशाब न होना, और कुछ मामलों में खूनी मल शामिल है। दूषित पानी में पाए जाने वाले कई विषाणुओं से डायरिया फैल सकता है। ज्‍यादातर समाज का गरीब तबका दूषित पानी के संपर्क में आता है, और यही कारण है कि दस्त की दर उनके बीच सबसे अधिक है।

हैज़ा 

भारत में हर साल हजारों लोग हैजे का शिकार होते हैं। हैजा एक जलजनित बीमारी है। बार-बार दस्‍त लगना इसके सामान्‍य लक्षण हैं। अगर इसका समय पर इलाज न किया गया तो व्‍यक्ति की जान भी जा सकती है। हैजा तब होता है जब कोई पानी में वाइब्रियो कोलेरी जीवाणु घुल जाता है। 

हैजा के कुछ सामान्‍य लक्षणों में दस्‍त और फीवर शामिल हैं। हैजा बच्चों और वयस्कों दोनों को हो सकता है। भारत में हैजे से संबंधित मौतें अच्छी गुणवत्ता वाले पानी की कमी वाले स्थानों में सबसे आम हैं। 2010 में, ओडिशा में लगभग 140 लोगों की मौत हुई थी। 

मलेरिया

मलेरिया या मलेरिया बुखार प्लास्मोडियम परजीवी मच्छर द्वारा फैलता है जो झीलों, पोखरों, तालाबों और धान के खेतों में प्रजनन करता है। इन घातक परजीवियों के लिए स्थिर पानी एक और पसंदीदा प्रजनन स्थल है। मलेरिया ज्यादातर भारत में बच्चों को मारता है। हालांकि, वयस्‍कों में प्रतिरक्षा कमजोर होने के साथ होता है। 

मलेरिया बुखार के लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द और उल्टी शामिल हैं। कभी-कभी ये लक्षण एनीमिया के साथ भी जुड़े होते हैं। एक सप्ताह बीतने के बाद ही मलेरिया संक्रमण दिखाई देता है। इसलिए, इसका तुरंत इलाज जरूरी है। 

जापानी इंसेफलाइटिस 

जापानी इंसेफेलाइटिस एक जलजनित रोग है। जो Culex Tritaeniorhynchus और Culex Vishnui प्रकार के मच्छरों के कारण होता है। इन मच्छरों का पसंदीदा प्रजनन स्‍थल पानी से भरे धान के खेत हैं। इसलिए, जापानी एन्सेफलाइटिस भारत के कृषि क्षेत्रों में प्रमुख रूप से पाया जाता है। जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस बच्चों पर सबसे ज्यादा हमला करता है और कुछ मामलों में पानी से संबंधित यह बीमारी मौत का कारण बन सकती है।

जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षणों में बुखार, उल्टी, सिरदर्द और गंभीर मामलों में कोमा, दौरे और अंत में मृत्यु शामिल हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए टीका बहुत महंगा है इसलिए भारत में आर्थिक रूप से पिछड़े ज्यादातर परिवार इसे वहन नहीं कर पाते हैं। 

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फाइलेरिया

फाइलेरिया एक परजीवी बीमारी है और यह उन लोगों को प्रभावित करती है जो गटर या नालों के आसपास रहते हैं। फाइलेरिया मच्छरों द्वारा फैलता है जो रूके हुए पानी में प्रजनन करते हैं। यह कीड़ा मनुष्यों को प्रभावित करता है और एलिफेंटाइटिस की ओर ले जाता है।

फाइलेरिया से अंधापन हो सकता है, और तेजी से स्किन पिगमेंटेशन और इसके कीड़े शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं। भारत में ग्रामीण आबादी के लिए फाइलेरिया एक चिंता का विषय है, खासकर जिनका प्रमुख व्यवसाय कृषि है। हालांकि, फाइलेरिया का इलाज किया जा सकता है और दवाओं से रोका जा सकता है, लेकिन ग्रामीण भारत में दवाओं की कमी से कई मामलों में ऐसा नहीं हो पाता है। 

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जल‍जनित कई बीमारियां है जिससे भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों जूझ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकारों को दूषित जल का प्रबंधन करें। इसके अलावा हमारा और आपका भी कर्तव्‍य है कि जल को दूषित होने से बचाएं। दूषित जल के प्रयोग से बचें। 

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Written by
Atul Modi
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJun 18, 2019

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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