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मलेरिया की पहचान पर खुद से न लें पेनकिलर, नहीं तो हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं

अन्य़ बीमारियां By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 25, 2019
मलेरिया की पहचान पर खुद से न लें पेनकिलर, नहीं तो हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं

वेक्टर-जनित रोग मलेरिया एक घातक बीमारी है। मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। मलेरिया एक पैरासाइटिक रोग है क्योंकि यह एनोफेलीज मच्छर प्लासमोडियम नामक पैरासाइट ढोती हैं। जब यह मच्छर काटता है, तो पैरासाइट खून में जा कर रेड ब्लड सेल्

वेक्टर-जनित रोग मलेरिया एक घातक बीमारी है। मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। मलेरिया एक पैरासाइटिक रोग है क्योंकि यह एनोफेलीज मच्छर प्लासमोडियम नामक पैरासाइट ढोती हैं। जब यह मच्छर काटता है, तो पैरासाइट खून में जा कर रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है। चिकित्सकों का कहना है कि जब एनोफेलीज मच्छर काटता है तो उसके बाद शरीर में दर्द होता है, जिसपर खुद से बाजार से पेनकिलर लेकर खाना स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर गौरव जैन ने इस बारे में बताते हुए कहा कि मलेरिया होने की पहचान होने पर खूद से किसी पेनिकलर का इस्तेमाल ना करें क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। पेनकिलर के ज्यादा इस्तेमाल से सीने में जलन, पेट दर्द और उल्टी की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही पेन किलर के अधिक इस्तेमाल से लीवर के सेल्स डैमेज हो जाते है और किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। मलेरिया की पहचान होने पर डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही इलाज शुरू करें।

उन्होंने कहा, ''अगर गर्भवती महिला मलेरिया से संक्रमित हो तो यह संक्रमण उसके द्वारा बच्चे तक पहुंच सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से इलाज कराना चाहिए।  साल 2017 में भारत में 1.31 मिलियन लोगों में मलेरिया के मामले देखे गए,जिनमें 23,900 लोगों की मौत हो चुकी है। ''

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वहीं  श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के सीनियर कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर अरविंद अग्रवाल ने बताया, "भारत में मलेरिया की स्थिति की बेहद खराब है, जिसमें भारत 15 मलेरिया प्रभावित देशों में तीसरे स्थान पर आता है। इसके साथ ही भारत में 1.31 मिलियन लोगों में मलेरिया के मामले देखे गए, जिनमें 23,900 लोगों की मौतें चुकी है। पूरी दुनिया में मलेरिया के मरीजों की तुलना में साल 2017 में मलेरिया के कुल मामलों में से 80 प्रतिशत मामले भारत में थे।"

उन्होंने कहा, ''हालांकि साल 2016 की तुलना में2017 में भारत में मलेरिया के मामले तेजी से कम हुए हैं।'' 

मलेरिया की पहचान के तरीके

  • ब्लड टेस्ट
  • माइक्रोस्कोप टेस्ट
  • रैपिड एंटीजन टेस्ट

 

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मलेरिया से बचाव के तरीके

  • अपने घर या घर के आस-पास पानी ना जमा होने दें।
  • अपने आस-पास साफ-सफाई रखें।
  • घर से बाहर निकलते समय फुल स्लीव के कपड़े पहनें।
  • रूम कूलर, फूलदान का पानी हफ्ते में एक बार बदलें।
  • पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
  • पीने के पानी में क्लोरीन की गोली मिलाएं और पानी उबालकर पीएं।
  • समय-समय पर अपने घर एंव गार्डेन में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराते रहें।
  • मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी और मच्छर मारने की दवा का प्रयोग करें।

डॉक्टर अरविंद अग्रवाल ने बताया, ''मलेरिया के इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं का प्रकार रोग की गंभीरता और क्लोरोकाइन के प्रतिरोध की क्षमता पर निर्भर करता है।''

वहीं नोएडा स्थित जे.पी. अस्पताल के इंटरनल मेडिसीन की सीनियर कंसलटेंट डॉ. ए. ज़ीनत अहमद ने बताया कि मलेरिया बुखार एक संक्रामक बीमारी है, जो व्यक्ति को फीमेल मच्छर एनोफिलीज के काटने से होता है। ये लीवर और ब्लड सेल्स को संक्रमित करके व्यक्ति को बीमार बना देता है। ठंड के साथ बुखार आना, पसीना आना, शरीर में दर्द होना और उल्टी आना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। मलेरिया से हमारे लीवर और किडनी को क्षति पहुंचती है और यह मौत का कराण भा बन सकता है।

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