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क्‍या सूरज की रोशनी की कमी से जुड़ा है मायोपिया

लेटेस्ट By Aditi Singh , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 27, 2015
क्‍या सूरज की रोशनी की कमी से जुड़ा है मायोपिया

निकट दृष्टि दोष के बारे में हम अक्सर सुनते रहते हैं, ये हमारी आम समस्याओं में से एक है पर क्या हम इसके कारणों के बारें में जानते हैं, सूरज की रोशनी पर्याप्‍त न मिलने से भी यह समस्‍या हो सकती है।

सूर्य की रोशनी की कमी से मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष की बीमारी हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया की नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के मुताबिक कम से कम तीन घंटे सूर्य के प्रकाश में रहना जरूरी है ताकि मायोपिया को रोकने वाले रसायन डोपामाइन का निर्माण हो सके। दुनियाभर में निकट दृष्टि दोष एक महामारी बनता जा रहा है। इस लेख में सूर्य की रोशनी की कमी और मायोपिया के संबंधों के बारे में जानें।  
Myopia

वैश्विक समस्या है मायोपिया

यूरोप और अमरीका के लगभग 30-40 प्रतिशत लोगों को चश्मे की जरूरत होती है और कुछ एशियाई देशों में यह आंकड़ा 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ड‍बलिन स्थित चिल्ड्रेन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के इयान फ्लिटक्रॉफ्ट कहते हैं, “निकट दृष्टि दोष एक औद्योगिक बीमारी है।” वे कहते हैं, "संभव है कि हमारे जीन अब भी निकट दृष्टि दोष तय करने में भूमिका निभा रहे हों, लेकिन पर्यावरण में बदलाव ही वो कारण था, जिससे समस्या इस कदर उभरी।"

क्या होता है मायोपिया

निकट दृष्टि दोष आंखों की बीमारी है, जिसमें निकट की चीजें तो साफ-साफ दिखतीं हैं किन्तु दूर की चीजें देखने में समस्‍या होती है। आंखों में यह दोष उत्पन्न होने पर प्रकाश की समान्तर किरणपुंज आंख द्वारा अपवर्तन के बाद रेटीना के पहले ही प्रतिबिम्ब बना देता है (न कि रेटिना पर) इस कारण दूर की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब स्पष्ट नहीं बनती (आउट आफ फोकस) और चींजें धुंधली दिखतीं हैं। जिन लोगों को दो मीटर या 6.6 फीट की दूरी के बाद चीजें धुंधली दिखती हैं, उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है।

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सूरज की रोशनी से संबंध

आम तौर पर सूरज की रोशनी को इसकी वजह माना जाता है। बच्चों पर भी हुए शोध में पता चला कि जो बच्चे सूरज की रोशनी का ज़्यादा मजा लेते हैं, उन्हें चश्मों की ज़रूरत उतनी ही कम होती है। शायद इसकी वजह ये है कि सूरज की रोशनी से विटामिन डी मिलता है, जो कि स्वास्थ्य प्रतिरक्षा तंत्र और दिमाग़ के साथ-साथ आंखों को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। सूरज की किरणें सीधे आंख में ही डोपामाइन रिलीज़ करती हैं। डोपामाइन आंखों की स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। फ़्लिटक्रॉफ्ट की सलाह है कि आंख के संदर्भ में जो भी कार्रवाई करें, बहुत सावधानी से करें। ऐसा इसलिए क्योंकि आंखों के बारे में कई अवधारणाएं बन गई हैं और उनमें से कई सही नहीं हैं। एक अवधारणा है कि चश्मा नहीं लगाने से आंखों की रोशनी सुधरेगी। यह एकदम ग़लत है।

मायोपिया के इलाज में सूरज की रोशनी का बड़ा योगदान है। इससे मिलने वाला डोपामाइन आंखों की स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।

 

ImageCourtesy@GettyImages

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