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क्‍या वाकई व्‍यस्‍कों को विटामिन डी सप्‍लीमेंट लेने की जरूरत है

लेटेस्ट By एजेंसी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 16, 2013
क्‍या वाकई व्‍यस्‍कों को विटामिन डी सप्‍लीमेंट लेने की जरूरत है

विटामिन डी को हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद अहम माना जाता है। लेकिन, न्‍यूजीलैंड में हुए ताजा शोध में यह जानने का प्रयास किया गया कि व्‍य‍स्‍कों के लिए विटामिन डी का सप्‍लीमेंट लेना कितना फायदेमंद होता है।

व्‍यस्‍कों के लिए विटामिन डी सप्‍लीमेंट की जरूरतहड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन-डी को बेहद जरूरी माना जाता है। हमें अपनी खुराक में विटामिन-डी युक्‍त पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन, एक ताजा शोध इस प्रचलित मान्‍यता से अलग राय सामने रखता है। इस शोध के मुताबिक स्वस्थ वयस्कों को विटामिन डी सप्लिमेंट लेने की जरूरत नहीं है।



इस शोध के मुताबिक विटामिन-डी सप्लिमेंट का हड्डियों के घनत्व (बोन डेंसिटी) पर खास अच्छा असर नहीं होता, बोन डेंसिटी से ही ओस्टियोपोरोसिस का पता चलता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें कुछ और कारण भी हो सकते हैं और लोगों को विटामिन डी सप्लिमेंट लेना बंद नहीं करना चाहिए।

 

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 23 अध्ययनों का विश्लेषण किया जिनमें 4,000 स्वस्थ लोग शामिल थे। ब्रिटेन में सरकार अभी बच्चों और 65 साल से ज्‍यादा उम्र के लोगों को रोजाना विटामिन डी सप्लिमेंट लेने की सलाह देती है।

न्यूजीलैंड के शोधकर्ताओं की इस टीम ने जुलाई 2012 तक स्वस्थ वयस्कों में बोन मिनरल डेंसिटी पर विटामिन डी के असर का पता लगाने वाले सभी बेतरतीब परीक्षणों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में जो लोग शामिल थे उन्होंने औसतन दो साल तक सप्लिमेंट लिए थे।

 

बोन मिनरल डेंसिटी से किसी हड्डी की मज़बूती का पता चलता है। इससे शरीर में मौजूद बोन मिनरल की मात्रा भी पता चलती है। इसे अक्सर ओस्टियोपोरोसिस के जोखिम से जोड़कर देखा जाता है, बोन मिनरल डेंसिटी कम होने पर हड्डियों के फ्रैक्चर का खतरा काफी बढ़ जाता है। ये परीक्षण अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, फ़िनलैंड और नॉर्वे समेत कई देशों में हुए थे।

 

बीबीसी डॉटकॉम की हिन्‍दी बेवसाइट में प्रकाशित इस खबर में शोधकर्ताओं ने कहा कि हमारे आंकड़ों से लगता है कि विटामिन डी की कमी की संभावना वाले लोगों को ही कम खुराक दिए जाने से अहम संसाधन मिल सकते हैं जिनका कहीं और बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि परीक्षणों के नतीजों में विटामिन डी सप्लिमेंट लेने वाले लोगों को किसी खास फायदे के बारे फ़ायदे का पता नहीं चला, लेकिन कूल्हे के जोड़ के पास बोन डेंसिटी में कम लेकिन अहम बढ़ोतरी का पता चला। हालांकि शोधकर्ताओं का मानना है कि इस असर का चिकित्सकीय महत्व होने की संभावना नहीं है।

 

इस अध्ययन में शामिल ऑकलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इयान रीड कहते हैं कि शोध इस बात की तस्‍दीक करता है कि व्‍यस्‍कों को विटामिन डी सप्लिमेंट लेने की जरूरत नहीं है। रीड कहते हैं, "हमारे आंकड़ों से लगता है कि विटामिन डी की कमी की संभावना वाले लोगों को ही कम खुराक दिए जाने से अहम संसाधन मिल सकते हैं जिनका कहीं और बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।

 

ब्रिटेन का स्वास्थ्य विभाग अभी सलाह देता है कि गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं और 65 साल से ज़्यादा उम्र वाले लोगों को रोज़ाना 10 माइक्रोग्राम विटामिन डी सप्लिमेंट लेना चाहिए जबकि छह महीने से पांच साल की उम्र तक के बच्चों को 7 से 8.5 माइक्रोग्राम की विटामिन ड्रॉप दी जानी चाहिए।

 

हालांकि सरे विश्वविद्यालय में पोषण विज्ञान विभाग में शोधकर्ता डॉक्टर लॉरा त्रिपकोविक का कहना है कि ये शोध अहम है लेकिन बहुत निश्चित नहीं है। त्रिपकोविक का कहना है कि बोन डेंसिटी पर विटामिन डी के असर को लेकर कोई सबूत न मिलने से उन्‍हें कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि ओस्टियोपोरोसिस में जीन, आहार और वातावरण जैसे कई कारक शामिल हैं।

 

डॉक्टर त्रिपकोविक का मानना है कि विटामिन डी सप्लिमेंट लेने का कोई मतलब नहीं है अगर लोग नियमित रूप से कैल्शियम युक्त एक अच्छा और संतुलित भोजन न लें और कसरत न करें।

 


हमें ज्‍यादातर विटामिन डी त्वचा पर सूरज की रोशनी पड़ने से मिल जाता है लेकिन विटामिन डी मछली, अंडों और जई जैसे अनाज में भी मिलता है। हालांकि सप्लिमेंट के रूप में ज्‍यादा विटामिन डी लेना भी नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि कैल्शियम जमा हो जाता है और गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकता है।

 

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