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किचन के काम बन रहे हैं आजकल कपल्स के तलाक की बड़ी वजह

डेटिंग टिप्स By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 07, 2017
किचन के काम बन रहे हैं आजकल कपल्स के तलाक की बड़ी वजह

क्या घरेलू कार्यों में सहयोग से शादी सफल हो सकती है?

क्या घरेलू कार्यों में सहयोग से शादी सफल हो सकती है? इस पर समय-समय पर बहस होती रही है, लेकिन नए शोधों के अनुसार प्यार का खुमार तब और सिर चढ़ कर बोलता है, जब घरेलू कार्यों में पति-पत्नी की बराबर की हिस्सेदारी होती है। यानी सहयोग व बराबरी पर आधारित रिश्ते ही टिकाऊ होते हैं। शादी को सफल बनाने का नया नियम है- घरेलू कार्यों में साझेदारी।

घरेलू कार्यों में साझेदारी से पति-पत्नी के आपसी रिश्ते सुधरते हैं, इसे भले ही शोध अब साबित कर रहे हों, मगर यह एक व्यावहारिक बात है जिसे आज के हर दंपती को स्वीकारना चाहिए। तमाम सलेब्रिटीज और आम लोग भी मानते हैं कि शादी की सफलता धैर्य, समर्पण, विश्वास, संवाद, सम्मान और आपसी समझदारी पर निर्भर करती है। आज के समय में जहां स्त्री-पुरुष दोनों घर से बाहर निकल कर काम कर रहे हैं, वहां घरेलू कार्यों में साझेदारी भी वह महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे लेकर तकरार होती है और जिसे वैवाहिक जीवन में नकारा नहीं जा सकता।

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तलाक की बड़ी वजह

आजकल तलाक के ज्य़ादातर मामलों में घरेलू कार्यों को लेकर आए दिन होने वाली खटपट या नैगिंग जैसे कारण प्रमुख हो रहे हैं। रिसर्च में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली है कि विवाहेतर संबंधों को भी कई बार कपल्स माफ कर देते हैं, लेकिन काम के बंटवारे को लेकर होने वाले झगड़े समझौतों में कम ही बदल पाते हैं।

समानता की हकीकत

स्त्री-पुरुष की बराबरी को लेकर शोधों में भले ही सकारात्मक नतीजे दिख रहे हों, भारत में वास्तविकता थोड़ी अलग है। कई सर्वे में ये महिलाओं ने खुद स्वीकारा है कि उनका ज्यादातर समय घर के कामों में बीत जाता है और पति के साथ वे वक्त नहीं बिता पातीं। दिलचस्प बात यह है कि 76 फीसद पुरुष भी यही मानते हैं कि खाना बनाने, कपड़े धोने या बच्चों की देखभाल जैसे कार्य स्त्रियों के ही हैं।

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बदलना होगा नजरिया

पुरुषों के साथ ही स्त्रियों को भी अपना नजरिया बदलना होगा। यदि वे खुशहाल दांपत्य जीवन की चाह रखती हैं तो उन्हें भी पति का सहयोग लेने को तैयार होना होगा और घरेलू जिम्मेदारियों को खुद पर ओढऩे और इसे महिमामंडित करने से बचना होगा। परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस धारणा से बाहर निकलना होगा कि घरेलू काम सिर्फ स्त्री को ही करने चाहिए। स्त्री-पुरुष के अलग-अलग कार्यों वाली बहस अब पुुरानी हो चुकी है।

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