• shareIcon

बच्चों में बढ़ रहा है डिजिटल एडिक्शन, दिमाग को पहुंच रहा है नुकसान

परवरिश के तरीके By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 12, 2018
बच्चों में बढ़ रहा है डिजिटल एडिक्शन, दिमाग को पहुंच रहा है नुकसान

शुरुआत से ही गैजेट्स से घिरे होने के कारण बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल एडिक्शन। इसकी वजह से उनके दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

पिछले एक दशक में जिस तरह से स्क्रीन वाले डिवाइसेज का इस्तेमाल लोगों में बढ़ा है, उसके गंभीर परिणाम अब दिखने शुरू हो गए हैं। आजकल बच्चे भी पूरे दिन इन डिवाइसेज से घिरे रहते हैं। दो-तीन साल के बच्चे भी मोबाइल और लैपटॉप पर गेम खेलने, गाने सुनने, वीडियो देखने और इन डिवाइसेज को ऑपरेट करने में सहज हो गए हैं। कई बार तो बच्चे इन डिवाइसेज के इतने आदी हो जाते हैं कि इनके न मिलने पर हंगामा शुरू कर देते हैं। इन सभी का बच्चों पर इतना बुरा प्रभाव पड़ रहा है कि इससे बच्चों का दिमागी और शारीरिक दोनों अवरुद्ध हो रहे हैं।

क्या है डिजिटल एडिक्शन

वाकई यह ऐसी गंभीर समस्या है, जिससे सभी पेरेंट्स जूझ रहे हैं। आजकल स्कूली बच्चों का जयादातर समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के साथ व्यतीत होता है। घर से बाहर निकल कर खेलने-कूदने की आदत छूटती जा रही है। इसकी वजह से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती, उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर पड़ता है।

इसे भी पढ़ें:- बढ़ने की उम्र में बच्चों को जरूर खिलाएं ये 5 आहार, बनेंगे स्मार्ट और लंबे

टेक्नोलॉजी एडिक्शन की वजह

इसके लिए बच्चे नहीं बल्कि पेरेंट्स जि़म्मेदार हैं। एक-दो साल की उम्र से ही रोते बच्चे को बहलाने के लिए लोग उसके हाथों में मोबाइल पकड़ा देते हैं और खुद भी सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं। ऐसे में वे बच्चे से अनुशासित व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

क्या करें माता-पिता

ऐसे मामले में स्व-अनुशासन बहुत ज़रूरी है। अपने परिवार के सभी सदस्यों के लिए कुछ निश्चित नियम बनाएं, मसलन रात को नौ बजे के बाद परिवार का कोई भी सदस्य इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करेगा, परीक्षा के दिनों में बच्चे को इंटरनेट का इस्तेमाल न ही करने दें तो अच्छा होगा।

इसे भी पढ़ें:- बच्चों पर कभी न डालें ये 5 दबाव, हाइपर पैरेंटिंग से होते हैं डिप्रेशन के शिकार

कैसे पड़ता है प्रभाव

अब अगर बच्चा बचपन से इन इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन वाले डिवाइसेज का इस्तेमाल करता है तो उसका दिमागी विकास इससे प्रभावित होता है। इन डिवाइसेज की वजह से दिमाग में विकसित होने वाली कई महत्वपूर्ण सेल्स पैदा होने के साथ ही धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे बच्चा कुछ विशेष कामों में पीछे रह जाता है। खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर सेल्स का विकास दोबारा नहीं हो पाता है और बच्चों को उस खास दिमागी विकृति के साथ ही जीवन गुजारना पड़ सकता है।

क्या हो सकती हैं परेशानियां

इन डिवाइसेज के इस्तेमाल आमतौर पर बच्चों को जो परेशानियां होती हैं वो हैं- किसी चीज पर फोकस न कर पाना, ध्यान न लगा पाना, दिमाग एकाग्र न होना, चीजें जल्दी भूल जाना, सही-गलत के निर्णय क्षमता में कमी, एटीट्यूड में बदलाव, लोगों की बातों को ठीक तरह से न समझ पाना और इसी कारण कई बार बद्तमीजी और जिद्दीपन का स्वभाव अपना लेना आदि कई परेशानियां हैं।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting Tips In Hindi

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK