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देसी गाय का A2 दूध इन 2 बड़े रोगों से रखता है दूर, जानें क्यों?

लेटेस्ट By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 10, 2018
देसी गाय का A2 दूध इन 2 बड़े रोगों से रखता है दूर, जानें क्यों?

चाहे बच्चा हो या बड़ हो, दूध पीना सभी के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है।

चाहे बच्चा हो या बड़ हो, दूध पीना सभी के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। दूध में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होते हैं। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्‍व भर में लोगों की प्रोटीन की 13 प्रतिशत आवश्‍यकता दूध व दुग्‍ध उत्‍पादों से ही पूरी होती है। आजतक शायद आपने सिर्फ गाय और भैंस के दूध में अंतर के बारे में सुना होगा। लेकिन आज हम आपको A1 व A2 दूध में अंतर बता रहे हैं। ऐसा हो सकता है आप इस तरह के दूध का नाम भी पहली बार सुन रहे हो। लेकिन A1 एवं A2 दूध आजकल खूब चर्चा में हैं और आपके लिए इनके बीच का अंतर जानना बहुत जरूरी है।

क्या है A1 व A2 दूध में अंतर 

वैज्ञानिकों का ऐसा दावा है कि A2 किस्म का दूध, A1 किस्म के दूध से कई गुणा स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होता है। A2 किस्म का दूध देसी नस्‍ल की गाय से प्राप्त होता है। इस किस्म की गाय ताजी और हरी घास खाती हैं। साथ ही A2 किस्म का दूध देने वाली गाय सफेद नहीं बल्कि गहरे भूरे रंग की होती है। इसमें A1 किस्म के दूध की तुलना में अधिक प्रोटीन और पोषक तत्व होते हैं। इस तरह का दूध डायबिटिज, हृदय रोग एवं न्‍यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से बचाता है एवं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ता है। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि लंबे समय तक A1 टाइप का दूध पीने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्यांए होने का खतरा भी रहता है।

केवल दूध के प्रोटीन के आधार पर ही भारतीय गोवंश की श्रेष्ठता बतलाना अपर्याप्त होगा। क्योंकि बकरी, भैंस, ऊँटनी आदि सभी प्राणियों का दूध विष रहित ए2 प्रकार का है। भारतीय गोवंश में इसके अतिरिक्त भी अनेक गुण पाए गए हैं। भैंस के दूध के ग्लोब्यूल अपेक्षाकृत अधिक बड़े होते हैं तथा मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव करने वाले हैं। आयुर्वेद के ग्रन्थों के अनुसार भी भैंस का दूध मस्तिष्क के लिए अच्छा नहीं, वातकारक (गठिाया जैसे रोग पैदा करने वाला), गरिष्ठ व कब्जकारक है। जबकि गो दूग्ध बुद्धि, आयु व स्वास्थ्य, सौंदर्य वर्धक बतलाया गया है।

क्या कहती है अमेरिका की रिसर्च

आमतौर पर दूध में 83 से 87 प्रतिशत तक पानी, 3.5 से 6 प्रतिशत तक वसा (फैट), 4.8 से 5.2 प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेड, 3.1 से 3.9 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है। इस प्रकार कुल ठोस पदार्थ 12 से 15 प्रतिशत तक होता है। जबकि लैक्टोज 4.7 से 5.1 प्रतिशत तक होता है। शेष तत्व अम्ल, एन्जाईम विटामिन आदि 0.6 से 0.7 प्रतिशत तक होते है। गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन 2 प्रकार के हैं। एक ‘केसीन’ और दूसरा है ‘व्हे’ प्रोटीन। दूध में केसीन प्रोटीन 4 प्रकार का मिला हैः

अल्फा एस1 (39 से 46 प्रतिशत)

एल्फा एस2 (8 से 11 प्रतिशत)

बीटा कैसीन (25 से 35 प्रतिशत)

कापा केसीन (8 से 15 प्रतिशत)

गाय के दूध में पाए गए प्रोटीन में लगभग एक तिहाई ‘बीटा कैसीन’ नामक प्रोटीन है। अलग-अलग प्रकार की गऊओं में अनुवांशिकता (जैनेटिक कोड) के आधार पर ‘केसीन प्रोटीन’ अलग-अलग प्रकार का होता है जो दूध की संरचना को प्रभावित करता है, या यूं कहे कि उसमें गुणात्मक परिवर्तन करता है। उपभोक्ता पर उसके अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं।

Image source- Friendsofindia

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