अधिकांश भारतीयों की डाइट से फल और सब्जियां गायब! जानें देश में अमीरों-गरीबों का प्रतिदिन कितना है कैलोरी इनटेक

Updated at: Jun 25, 2020
अधिकांश भारतीयों की डाइट से फल और सब्जियां गायब! जानें देश में अमीरों-गरीबों का प्रतिदिन कितना है कैलोरी इनटेक

एक अध्ययन में सामने आया है कि ज्यादातर भारतीयों की डाइट से फल और सब्जियां गायब हैं। वे अनहेल्दी फूड का शिकार हो रहे हैं।  

Jitendra Gupta
विविधWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jun 25, 2020

हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में ये सामने आ्या है कि इंसानों के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावशाली डाइट की तुलना में औसत भारतीयों की डाइट बहुत ही ज्यादा अनहेल्दी है, जिसमें अनाज की अधिक खपत तो है, लेकिन प्रोटीन, फलों और सब्जियों की पर्याप्त मात्रा बिल्कुल भी नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) और CGIAR के कृषि और पोषण और स्वास्थ्य पर स्वास्थ्य कार्यक्रम (A4NH) द्वारा व्यापक रूप से किए गए अध्ययन के ये निष्कर्ष सभी राज्यों और आय के स्तर पर लागू होते हैं। ये निष्कर्ष कई भारतीयों द्वारा स्वस्थ आहार प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों को भी रेखांकित करते हैं।   

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डाइट में पोषण की कमी उजागर करता है अध्ययन

इस शोध लेख की प्रमुख लेखिका और A4NH प्रोग्राम मैनेजर मनिका शर्मा बताती हैं कि हमारा ये अध्ययन ईएटी-लैंसेट डाइट वर्तमान में मौजूद ढेर सारी पोषण और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का कोई विश्लेषण नहीं है बल्कि ये इस बात पर केंद्रित है कि भारतीय डाइट कितनी हेल्दी और टिकाऊ है। हमारा ये  अध्ययन इसका मूल्यांकन करने के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि बात करें पोषण की तो हम भारतीय डाइट को इष्टतम से नीचे पाते हैं। ईट लैंसेट कमिशन ऑन फूड, प्लैनेट एंड हेल्थ द्वारा प्रकाशित ईट-लैंसेट रिफ्रेंस डाइट का तात्पर्य है खाने की आदतों को बदलना, खाद्य उत्पादन में सुधार और खाद्य अपव्यय को कम करना, जो कि भविष्य में 10 अरब की आबादी को एक स्वस्थ ग्रह के भीतर जगह दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है।    

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प्लांट बेस्ड डाइट पर जोर देता है अध्ययन

ईट-लैंसेट रिफ्रेंस डाइट में बड़ी मात्रा में प्लांट बेस्ड खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी जाती है और प्रसंस्कृत मांस व स्टार्चयुक्त सब्जियों का सेवन कम करने को कहा जाता है। हालांकि शोध में यह  भी दर्शाया गया है कि भारत में आय और खाने को लेकर प्राथमिकताएं अलग-अलग तरह की हैं। यह अध्ययन हाल ही में BMC पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुआ था। 

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कितना कैलोरी इनटेक अंतर है अमीर और गरीब  

इस शोध में नेशनल सैंपल सर्वे (2011-12) के 68 वें दौर के उपभोग के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया जिसमें उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों और डाडट स्तरों की तुलना की। ये अध्ययन विभिन्न आय समूहों, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, और भौगोलिक क्षेत्रों में कैलोरी की खपत में अंतर की तुलना करता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष आय समूहों के बीच समग्र कैलोरी सेवन में असमानता को दिखाते हैं। अध्ययन के मुताबिक, 10 प्रतिशत अमीर व्यक्ति प्रति दिन 3,000 से अधिक किलो कैलोरी का उपभोग करते हैं, जबकि 10 प्रतिशत सबसे गरीब व्यक्ति प्रति दिन केवल 1,645 किलो कैलोरी का उपभोग करते हैं।             

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औसत भारतीय इतनी कैलोरी लेते हैं   

बात करें औसत भारतीयों की तो ज्यादातर लोग लगभग प्रतिदिन 2,200 किलो कैलोरी का सेवन करते हैं, जो कि ईट-लैंसेट रिफ्रेंस डाइट के अनुशंसित स्तर से 12 प्रतिशत कम है। इस अध्ययन की सह-लेखक और आईएफपीआरआई रिसर्च एनालिस्ट कुहू जोशी का कहना है कि हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि कैलोरी की मात्रा कम होने के बावजूद मोटापा अभी भी भारत में क्यों बढ़ रहा है। शोधकर्ता इसके पीछे गतिहीन जीवन शैली को संभावित कारण के रूप में देखते हैं और आहार, जीवन शैली और स्वास्थ्य के बीच संबंधों की जटिलताओं को दिखाते हैं। संतुलित आहार के बारे में बात करते हुए ये अध्ययन अधिकांश भारतीय घरों की डाइट में  कुछ खाद्य समूहों की कमी पर ध्यान केंद्रित करता है। ईट-लैंसेट डाइट हमारी दैनिक कैलोरी का एक तिहाई हिस्सा साबुत अनाज से प्राप्त करने की सलाह देता है, जो कि औसत भारतीय आहार का 47 प्रतिशत हिस्सा है। सबसे गरीब ग्रामीण परिवारों में यह संख्या 70 प्रतिशत है।      

डाइट से फल-सब्जियां है गायब 

शोधकर्ताओं ने बताया कि इस बीच, फलों से प्राप्त होने वाला कैलोरी 40 प्रतिशत से कम है। फल, सब्जियां, और पशु स्रोत खाद्य पदार्थ आम तौर पर अधिक महंगे होते हैं और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और अनाज की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने पाया कि उच्चतम आय वर्ग के शहरी घराने अपने कुल दैनिक कैलोरी का लगभग एक तिहाई हिस्सा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे कि ब्रेड, बेकरी उत्पाद, परिष्कृत गेहूं का आटा, मिठाई और चिप्स का सेवन कर प्राप्त करते हैं। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दैनिक कैलोरी सेवन का 10 प्रतिशत है।   

स्त्रोतः (आईएएनएस)      

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