डिलिवरी के दौरान होने वाली आम जटिलताएं

    डिलिवरी के दौरान होने वाली आम जटिलताएं

    डिलिवरी के दौरान होने वाली आम जटिलताएं आमतौर पर इतनी खतरनाक नहीं होतीं। लेकिन, कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि डॉक्‍टर को त्‍वरित फैसला लेना पड़ सकता है। ये बेकाबू हालात शिशु और मां दोनों के लिए काफी कठिन हो सकते हैं।

    गर्भावस्‍था के दौरान महिला को कई तरह  की परेशानियां हो सकती हैं। यह जटिलाएं यूं तो सामान्‍य ही होती हैं, लेकिन कई बार हालात बेकाबू भी हो सकते हैं। ऐसे में उन परेशानियों से निपटने के लिए जरूरी है कि आप स्‍वयं को किसी भी विकट परिस्थिति के लिए तैयार रखें।

    delivery ke doran hone wali aam jatiltayeनौ महीने के सुरक्षित गर्भावस्था के बाद एक सुरक्षित प्रसव हो ऐसा हमेशा नहीं होता। प्रसव के दौरान बच्‍चे के जन्‍म से पहले बहुत सारी जटिलताएं आती हैं, जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है। गर्भनाल की समस्‍यायें,  गर्भ में बच्‍चे का उल्‍टा हो जाना और समय पूर्व प्रसव ऐसी कुछ समस्‍यायें हैं जिनसे किसी भी गर्भवती महिला को जूझना पड़ सकता है। इसके साथ ही अन्‍य कई समस्‍यायें भी होती हैं। आइए जानें, ऐसी ही कुछ समस्‍याओं के बारे में, जो प्रसव के दौरान महिला को परेशान कर सकती हैं।

     

    गर्भनाल का आगे की ओर बढ़ाव

    नाल की रस्सी को बच्चे की जीवन रेखा कहा जाता है, क्योंकि इसके जरिए ही भ्रूण को ऑक्सीजन और माता के शरीर से अन्य पोषक तत्त्‍व मिलते है। प्रसव से पहले या प्रसव के दौरान जब गर्भाशय ग्रीवा से गर्भनाल निकल जाता है तो बच्चा पैदा करने के लिए जन्म नहर में पर्ची नाल प्रोलाप्‍सेड कॉर्ड हो सकता है। कुछ मामलों में, गर्भनाल योनि के माध्यम से खून बाहर आता है यह भ्रूण के लिए अवरोध पैदा करता है जो मां और बच्चे के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में तत्काल चिकित्सा पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

     

     

    भ्रूण सिर के बजाय पांव से बाहर आता है

    जब किसी बच्चे का जन्‍म होता है और उसके पैर प्रसव के दौरान पहले बाहर आते है। तो ऐसे में समस्‍या पैदा होती है। ऐसे में जन्म के दौरान सिर के फंस जाने के खतरे के कारण जोखिम ज्‍यादा बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में गर्भाशय ग्रीवा पहले ब्लॉक रहता है फिर चौड़ा होता है। ऐसे में बच्‍चे के जन्‍म के लिए शल्यक्रिया आवश्यक हो जाती है। व्यायाम, तैराकी और इस तरह के व्यायाम द्वारा आप बच्‍चे को सामान्य रूप से जन्म देने में मदद मिल सकती है।


    प्‍लेसेनटॉल का अचानक टूटना

    जब नाल गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता होता है और भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की प्राप्ति बंद हो जाती है, तो इसे नाल झड़ जाना कहते है। यह उल्लंघन भी अस्थायी हो सकता है और ऐसे में गर्भवति को पूरी तरह आराम करने को कहा जाता है। यदि नाल पूरी तरह से अलग हो जाता है,तो ऐसे में प्रसव की आवश्यकता होती है।

     


    समय से पहले प्रसव

    गर्भधारण के मामलों में लगभग 10-12% समय से पहले प्रसव होता है। सामान्य स्वस्थ गर्भावस्था के लिए गर्भ को 39-40 सप्ताह के आसपास की जरूरत होती है। लेकिन 35 सप्ताह से पहले प्रसव समय से पहले का प्रसव माना जाता है,और समय से पहले बच्चे के जन्म होना उसमें कई दोषों और कमियों के विकास की संभावना को बढ़ा देता है। समय से पहले बच्‍चे का जन्‍म उसमें अपरिपक्व अंग के खतरे को बढ़ाता।


    लंबे समय तक प्रसव

    जब गर्भाशय ग्रीवा काफी नहीं खुलता तब लम्बे समय तक प्रसव होता है,ऐसे में सुरक्षित रूप से एक बच्चे को जन्‍म देने में परेशानी आती है। साथ ही एक असामान्य रूप से बड़े सिर के बच्चे को भी जन्म देने में परेशानी आती है, ऐसे में प्रसव लंबा होता है। अगर महिला को लंबे समय तक प्रसव की संभावना है, तो उसे शल्यक्रिया द्वारा ही बच्चे को जन्‍म देना चाहिए।

     

    ये इस तरह की समस्‍यायें हैं जिनका सामना किसी भी गर्भावती महिला को करना पड़ सकता है। आमतौर पर इन समस्‍याओं से आसानी से निपटा जा सकता है, लेकिन कई बार परि‍स्थितियां बेकाबू हो सकती हैं, ऐसे में शिशु और मां दोनों के लिए खतरा हो सकता है।

     

     

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    Disclaimer:

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