1918 में स्पेनिश फ्लू और अब कोरोना को मात देने वाले 106 साल के बुजुर्ग की कहानी भरेगी आत्मविश्वास, पढ़ें लेख

Updated at: Jul 06, 2020
1918 में स्पेनिश फ्लू और अब कोरोना को मात देने वाले 106 साल के बुजुर्ग की कहानी भरेगी आत्मविश्वास, पढ़ें लेख

कोरोना की तरह दुनियाभर में 1918 में स्पेनिश फ्लू नाम की महामारी ने तांडव मचाया था। लेकिन इस बुजुर्ग ने तब भी कमाल किया था और अब भी। 

Jitendra Gupta
विविधWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 06, 2020

वर्ष1918 में महज 4 साल की उम्र में स्पेनिश फ्लू नाम की महामारी से पार पाने वाले दिल्ली के एक 106 वर्षीय व्यक्ति ने COVID-19 को मात देकर एक नई मिसाल कायम की है और उन लोगों में आत्मविश्नवास भरने का काम किया है, जो जिंदगी और मौत की लड़ाई से जूझ रहे हैं। इन 106 वर्षीय बुजुर्ग ने न सिर्फ कोरोना को मात दी है बल्कि अपने 70 साल के बेटे की तुलना में तेजी से ठीक भी हुए हैं। दोनों पिता-पुत्र का इलाज दिल्ली के एक कोरोना अस्पताल में चल रहा था। 

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परिवार के अन्य सदस्य भी कोरोना से ग्रस्त                                                      

चिकित्सकों के मुताबिक, 106 वर्षीय मरीज को हाल ही में ठीक होने के बाद राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) से छुट्टी दे दी गई थी, जहां उनकी पत्नी, बेटे और परिवार के एक अन्य सदस्य को भी नोवल कोरोनोवायरस संक्रमण होने के बाद भर्ती कराया गया था। 

1918 में हुए फ्लू के शिकार 

अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक के मुताबिक, "शायद, ये दिल्ली में COVID-19 का पहला रिपोर्टेड केस है, जो 1918 के जानलेवा स्पैनिश फ़्लू महामारी से गुजरा है। स्पेनिश फ्लू ने भी ठीक वैसी ही तबाही मचाई थी जैसी कि COVID-19 ने दुनियाभर में मचाई थी। बुजुर्ग ने न केवल COVID -19 को मात दी है बल्कि अपने बेटे की तुलना में तेजी से ठीक भी हुए हैं। उनका बेटा भी उम्र में बहुत अधिक है।  

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अस्पताल को इस बात की जानकारी नहीं                                                                     

अस्पताल का कहना है कि हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि बुजुर्ग स्पेनिश फ्लू से प्रभावित थे या नहीं। हमने अभी तक स्थिति पर बहुत अधिक दस्तावेज नहीं देखे हैं, जहां तक दिल्ली का संबंध है, लेकिन उस समय बहुत कम अस्पताल  हुआ करते थे। यह आश्चर्यजनक है कि इस 106 वर्षीय बुजुर्ग ने जीवित रहने की इच्छा शक्ति दिखाई है। अस्पताल ने पूरी स्थिति पर निगरानी रखी हुई है।     

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102 साल पहले फैली थी महामारी                                                       

स्पेनिश फ्लू एक महामारी थी जिसने 102 साल पहले पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था और उस समय वैश्विक आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा उस महामारी से प्रभावित थी।              

सबसे घातक महामारियों में से एक

अमेरिका स्थित रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक, "1918 के इन्फ्लूएंजा महामारी हाल के इतिहास में सबसे गंभीर महामारियों में से एक थी। यह एवियन मूल के जीन के साथ एक एच 1 एन 1 वायरस के कारण हुआ था। हालांकि वायरस कहां से उत्पन्न हुआ, इसके बारे में कोई सर्वसम्मति नहीं है लेकिन 1918-1919 के दौरान यह पूरे विश्व में पाया गया था।                                                                    

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करीब 4 करोड़ लोगों की हुई थी मौत

अमेरिका में स्पेनिश  फ्लू पहली बार 1918 में वसंत माह में सैन्य कर्मियों में पाया गया था। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि इस स्पेनिश फ्लू से अमेरिका में लगभग 6,75,000 मौतें हुई थीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1918-1919 की महामारी स्पेनिश फ्लू विशेष रूप से वायरल थी और दुनिया भर में कम से कम इससे 4 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।              

भारत में भी फैली थी ये बीमारी        

ऐसा माना जाता है कि भारत में प्रथम विश्व युद्ध के बाद से लौटें सैनिकों के साथ ये बीमारी यहां फैली थी। स्पेनिश फ़्लू के पहले मामले उन क्षेत्रों में दर्ज किए गए जो प्रवेश के प्रमुख बंदरगाह हैं, जैसे कि मुंबई (तब बॉम्बे), कोलकाता (कलकत्ता), दिल्ली और चेन्नई (मद्रास),यहां बड़ी संख्या में लोग विदेश से लौटे थे।

भारत में स्पेनिश फ्लू से होने वाली मौतें दुनियाभर में होने वाली मौतों का लगभग पांचवा हिस्सा मानी जाती हैं। हालांकि भारत में मृत्यु दर के आंकड़े बहुत अधिक व्यापक और विवादास्पद रहे हैं।

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