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गर्भधारण में देरी मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय

महिला स्‍वास्थ्‍य By जितेंद्र गुप्ता , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 11, 2019
गर्भधारण में देरी मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय

तेजी से बदलते चलन ने न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है बल्कि उनके भीतर कई गंभीर समस्याओं को विकसित किया है। इन्हीं गंभीर समस्याओं में से मीनोपॉज और स्तन कैंसर सबसे घातक बीमारियों में से एक हैं।

मौजूदा वक्त में तेजी से बदलती जीवन ने महिलाओं की जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। तेजी से बदलते चलन ने न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है बल्कि उनके भीतर कई गंभीर समस्याओं को विकसित किया है। इन्हीं गंभीर समस्याओं में से मीनोपॉज और स्तन कैंसर सबसे घातक बीमारियों में से एक हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं को सावधानी बरतने के साथ-साथ कुछ सलाह दी है, जिसके सहारे वह खुद को स्वस्थ रख सकती हैं।

नोएडा स्थित जेपी अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ ऑब्सट्रेटिक एंड गाइनोकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट  डॉक्टर रीनु जैन ने बताया कि मां बनना हर महिला के जीवन का बेहद सुखद एहसास होता है, इस एहसास को शब्दों में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है। लेकिन आज हमें कई ऐसी महिलायें देखने को मिलती है जो कामकाजी होने के कारण  40-45 वर्ष की आयु में गर्भधारण करने का विचार करती है, जो की गर्भधारण के लिए एक जोखिमपूर्ण आयु है।

उन्होंने कहा कि गर्भधारण में देरी मां और शिशु दोनों के लिए ही स्वस्थ व् उचित विकल्प नहीं है। इस आयु में केवल गर्भ को धारण करने में ही नहीं बल्कि बाद के आने वाले दिनों में भी कई समस्याएं हो सकती है। अधिक आयु में गर्भधारण से गर्भपात का जोखिम भी बढ़ सकता है। आज के तनाव भरे जीवन में महिलाओं के शरीर में काफी परिवर्तन आ रहे हैं, पहले के समय में मीनोपॉज 50-55 की आयु में होते थे वही आज 40-45 आयु की महिलाओ में भी मीनोपॉज होने लगे है। इसलिए हम यही सलाह देते हैं कि सही आयु में गर्भधारण करके आने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है और आप मां बनने का पूर्ण सुख भोग पाएंगे।

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वर्तमान समय में जीवनशैली में आ रहे बदलाव के कारण अधिक से अधिक युवा महिलाओं में स्तन कैंसर होने की आशंका है। महिलाओं में सबसे घातक कैंसर में से एक स्तन कैंसर से 40 वर्ष से कम आयु की 7 प्रतिशत से अधिक महिलाएं पीड़ित हैं। महिलाएं आम तौर पर इसके निदान में देरी करती हैं। कई युवा महिलाएं इसके चेतावनी संकेतों को अनदेखा करती हैं, जिस कारण ही यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई महिलाएं यह भी मानती हैं कि इस तरह की जटिलताएं होने के लिए उनकी उम्र अभी कम है या मामूली असर हानिरहित है।

युवा महिलाओं में स्तन कैंसर का निदान इसके बाद के चरणों में किया जाता है और यह इसलिए यह अधिक आक्रामक पाया जाता है। युवा महिलाओं में मृत्यु दर भी अधिक होती है और मीनोपॉज का खतरा अधिक होता है।

साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के गाइनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी की एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. कनिका बत्रा मोदी ने कहा, ''जीन में आनुवंशिकी उत्परिवर्तन कैंसरयुक्त जीन के पारित होने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा देता है। फिर भी 90 प्रतिशत मामले अप्रत्याशित होते हैं। किसी महिला में 40 वर्ष की आयु सीमा के भीतर स्तन कैंसर का पता चलने पर उसमें ओवरी और स्तन कैंसर दोनों के लिए जोखिम कारक दोगुना हो जाता है। कैंसर के होने का खतरा तब भी बढ़ जाता है जब 60 साल से कम उम्र की महिलाओं में ट्रिपल निगेटिव स्तन कैंसर होता है। यह एक प्रकार का स्तन कैंसर है, जिसमें एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स, प्रोजेस्टेरोन रिसेप्टर्स और ह्युमन एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर का अभाव होता है।''

उन्होंने कहा, ''हालांकि सेल फोन और इसके टॉवर से गैर-आयनीकरण विकिरणों के कारण कैंसर होने का कोई प्रमाणित प्रमाण नहीं है लेकिन कई कैंसर सोसायटी ने इसके लंबे समय तक उपयोग पर चिंता जताई है। सेल फोन एक प्रकार की ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं जिसे रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों के रूप में जाना जाता है। यह किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष क्षति नहीं पहुंचाती है लेकिन इसे मनुष्यों के लिए एक संभावित कैंसर कारक माना जाता है, खासकर मस्तिष्क ट्यूमर के लिए।''

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डॉ. कनिका ने कहा, ''इस बारे में लोगों को बहुत कम पता है कि पुरुषों को भी स्तन कैंसर होने की आशंका होती है। पुरुषों में स्तन ऊतक महिलाओं की तुलना में छोटा होता है लेकिन वयस्क पुरुष स्तन में ऊतक की प्रकृति उसी तरह की होती है जैसी यौवन से पहले लड़की के स्तन की होती है। पुरुष स्तन कैंसर में विवाद का कारण यह है कि पुरुषों में इसके होने का कम संदेह होने के कारण उनमें महिलाओं की तुलना में बाद के चरण में इसका निदान किया जाता है।''

उन्होंने बताया कि इसके अलावा उनके स्तन में ऊतक की मात्रा कम होने के कारण इन कैंसर का जल्द पता लगाना मुश्किल हो जाता है और वे आसपास के ऊतकों में भी जल्दी फैल जाते हैं। इसके अलावा हाल के कई शोधों से यह भी पता चला है कि किसी पुरुष की मां के स्तन कैंसर से पीड़ित होने पर उस पुरुष के प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है।

मोटापा शरीर में एक क्रोनिक इंफ्लामेटरी अवस्था की शुरुआत करता है, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कैंसर का कारण बन सकता है। स्तन, एंडोमेट्रियल, एसोफैगल, पित्ताशय, आंत्र, अग्नाशय, यकृत,  गुर्दे आदि जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन इनके होने के सटीक कारण अस्पष्ट हैं।

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