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दीपिका पादुकोण की एसिड अटैक पर बनी फिल्म 'छपाक' हुई रिलीज, जानें एसिड गिरने पर क्या हो फर्स्ट एड

Updated at: Jan 09, 2020
तन मन
Written by: अनुराग अनुभवPublished at: Dec 10, 2019
दीपिका पादुकोण की एसिड अटैक पर बनी फिल्म 'छपाक' हुई रिलीज, जानें एसिड गिरने पर क्या हो फर्स्ट एड

एसिड अटैक सर्वाइवर्स पर बनी दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक का ट्रेलर रिलीज हो गया है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान दीपिका पादुकोण भावुक हो गईं और रोने लगीं।

दीपिका पादुकोण की नई फिल्म 'छपाक' रिलीज हो गई है। एसिड अटैक सर्वाइवर्स पर बनी ये फिल्म अपनी रिलीज से पहले से ही काफी चर्चा बटोर चुकी है। ये फिल्म लक्ष्मी अग्रवाल नाम की एक लड़की की असल जिंदगी पर आधारित है। 'एसिड अटैक' के मामले हम आए दिन अखबारों की सुर्खियों और न्यूज चैनल्स में देखते रहते हैं। इसका सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं होती हैं। मगर एसिड अटैक का शिकार होने के बाद एक लड़की की सामान्य चल रही जिंदगी किस हद तक बदल जाती है और उसे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसी के इर्द-गिर्द फिल्म 'छपाक' की कहानी घूमती नजर आती है। फिल्म में दीपिका पादुकोण 'मालती' का किरदार निभा रही हैं, जो कि एक एसिड अटैक सर्वाइवर है।

ट्रेलर लांच के दौरान जब भावुक हुई थीं दीपिका पादुकोण।

लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी पर आधारित है फिल्म छपाक

लक्ष्मी अग्रवाल साल 2005 में महज 15 साल की उम्र में एसिड अटैक का शिकार हुई थीं। उन पर ये एसिड 32 साल के गुड्डा उर्फ नईम खान ने फेंका था, जिसके शादी के प्रस्ताव को लक्ष्मी ने रिजेक्ट कर दिया था। आमतौर पर ऐसी घटनाओं के बाद लोग डर और सहम जाते हैं, मगर लक्ष्मी अग्रवाल ने डरना नहीं, बल्कि लड़ना चुना। उन्होंने साल 2006 में जनहित याचिका दायर की और एसिड की सार्वजनिक बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा लक्ष्मी ने अन्य एसिड अटैक सर्वाइवर्स के साथ मिलकर भूख हड़ताल भी किया था। यही कारण है कि आज लक्ष्मी हजारों एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए न सिर्फ उम्मीद की किरण हैं, बल्कि ताकत और हिम्मत भी बन गई हैं।

लक्ष्मी की मेहनत साल 2013 में रंग लाई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने ये नियम लागू किया था कि 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति के एसिड खरीदने पर प्रतिबंध लगाया जाए और एसिड की खरीददारी से पहले दुकानदार को पहचानपत्र दिखाया जाए।

फिल्म छपाक को मेघना गुलजार ने डायरेक्ट किया है और इसे फॉक्स स्टूडियोज के साथ मिलकर दीपिका पादुकोण और मेघना गुलजार ने प्रोड्यूस किया है। उम्मीद की जा रही है कि इस फिल्म के बाद एसिड अटैक के सर्वाइवर्स के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।

एसिड अटैक और मेंटल हेल्थ

एसिड अटैक वैसे तो गंभीर स्थितियों में व्यक्ति की जान भी ले सकता है। मगर यदि व्यक्ति बच भी जाए, तो झुलसी हुई त्वचा के साथ सामान्य जिंदगी जीना उसके लिए आसान नहीं होता है। ठीक हो जाने के बाद भी एसिड से जलने के निशान लंबे समय तक और कई बार पूरी उम्र त्वचा पर दिखाई देते हैं। एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मानसिक स्थिति को समझना हमारे लिए मुश्किल हो सकता है। मगर ऐसे बहुत सारे मामले सामने आए हैं, जिसमें एसिड अटैक की शिकार लड़कियों ने अपने स्कार्स को लेकर शर्मिन्दगी छोड़ी और लोगों के बीच ये मैसेज पहुंचाने में सफलता प्राप्त की, कि उनकी खूबसूरती उनके लिए गर्व का विषय है।

एसिड अटैक होने पर फर्स्ट एड

एसिड अटैक होने पर स्वयं पीड़ित और आसपास मौजूद लोग कैसे मदद कर सकते हैं, ताकि व्यक्ति की त्वचा को नुकसान से बचाया जा सके, इस संबंध में ओनलीमायहेल्थ की टीम ने Dr Dilish Malik (Retd Gp Cpt), MBBS, MD (Aerospace Medicine) से बातचीत की है। उन्होंने कुछ खास बातें बताई हैं, जो इस तरह हैं-

एसिड अटैक के बाद पीड़ित को जितनी जल्दी हो सके, अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर अस्पताल दूर हो तो कुछ प्राथमिक उपचार के द्वारा त्वचा को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। एसिड अटैक के मामले में सर्वाइवर को जितनी जल्दी संभव हो सके, अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि उसकी त्वचा को नुकसान से ज्यादा से ज्यादा बचाया जा सके।

डॉ. दिलिश मलिक के अनुसार, "ऐसी घटनाओं में स्टेप बाई स्टेप चीजों को फॉलो करना बेहद जरूरी है। फर्स्ट एड के लिए जितनी जल्दी से जल्दी संभव हो और जितना ज्यादा ठंडा पानी मिल सके, उसका इस्तेमाल करना चाहिए। ध्यान रखें एसिड को धोने के लिए सिर्फ और सिर्फ पानी का इस्तेमाल करना है, जो खूब ठंडा हो तो बेहतर है, अन्य किसी चीज का नहीं। किसी कपड़े या चीज से त्वचा को छूने या पोंछने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। ठंडा पानी डालने से एसिड के कारण त्वचा पर होने वाली जलन से राहत मिलती है और त्वचा को होने वाला नुकसान भी कम होता है।

अन्य जरूरी बातें-

  • एसिड के संपर्क में आने के बाद घाव और एसिड को सबसे पहले पानी और सोडा बाइकार्बोनेट के मिश्रण से धोएं।
  • इसके बाद जलते हुए बर्फ के ठंडे पानी को डाल दें।
  • जबकि इन चरणों का पालन करने वाले रोगी के साथ एक सहायक है, रोगी को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
  • जब तक पीड़ित को अस्पताल न पहुंचा दिया जाए और डॉक्टर से निर्देश न मिले तब तक बहते पानी को डालना बंद न करें।

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