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क्‍या एक्‍सपायर्ड दवाओं का सेवन है नुकसानदेह!

तन मन By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 17, 2016
क्‍या एक्‍सपायर्ड दवाओं का सेवन है नुकसानदेह!

एक्‍सपायर दवाओं को लेकर आप बहुत कंफ्यूज रहते हैं क्‍योंकि महंगी दवाओं को फेंकना भी नहीं चाहते और न ही आप एक्सपायर दवाएं खाकर किसी साइड इफेक्ट का शिकार होना चाहते हैं, तो आइए इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए पढ़ें यह आर्टिकल।

अचानक से रात को खाना खाने के बाद आपके पेट में दर्द होने लगा, और आपने दवाओं की दराज खोल जैसे ही दवा निकाली और पाया कि यह तो कुछ हफ्तों पहले ही एक्‍सपायर हो चुकी है। अब आप क्‍या करेंगे? आमतौर पर आप उस दवा को फेंक देते हैं क्योंकि माना जाता है कि एक्‍सपायर दवा असरदार नहीं रहती या जहर में तब्दील हो जाती है। या ऐसे समय में आप बहुत कन्फ्यूज रहते हैं क्‍योंकि आप महंगी दवाओं को फेंकना भी नहीं चाहते और न ही आप एक्सपायर दवाएं खाकर किसी साइड इफेक्ट का शिकार होना चाहते हैं।

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लेकिन अमेरिकी मानकों के लिहाज से, सही तरीके से स्टोर करने पर दवा के एक्सपायर होने का समय, दवा के असली असर का कम से कम 90 प्रतिशत जरूर रह जाता है। जाहिर है, दवा के एक्सपायर होने की तारीख इस बात का इशारा नहीं करती है कि तय तारीख के बाद कोई दवा अचनाक अपना असर खो देगी या जहरीली हो जाएगी।

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, “100 दवाओं से अधिक के 90 प्रतिशत हिस्सा, काउंटर से ली दवा और उसके परचे पर लिखी दवा दोनों, अपनी एक्सपायरी की तारीख के 15 साल बाद भी बिलकुल दुरुस्त थे, और उनमें उनके असली असर का अधिकतर हिस्सा बरकरार था।”

असर और क्षमता

किसी भी दवा का असर, जब यह बनकर तैयार होती है उसी समय से कम होना शुरू हो जाता है, यह ड्रग डीके कहलाता है। इसलिए दवा किसी खास अवधि के बाद बेकार नहीं होती।

 

सुरक्षा और जहरीलापन

एक्‍सपायर दवाएं जहरीली और नुकसानदेह हो जाती है, इस बारे में बहुत मुश्किल ही कोई वैज्ञानिक सुबूत हैं, यह सिर्फ सामान्‍य धारणा और विश्‍वास है। सिर्फ 1963 में, खराब टेट्रासाइक्लीन के इस्तेमाल से इंसानों में जहरीला असर छोड़ने की एकमात्र रिपोर्ट थी, जो कि औषधीय उत्पाद के भौतिक या रासायनिक रूप में गिरावट की वजह से किडनी खराब होने की थी। उसके बाद से, टेट्रासाइक्लीन के प्रोडक्‍ट को इस समस्या को खत्म करने के लिए बदल दिया गया। कहने का तात्‍पर्य यह भी है कि इस क्षेत्र में अधिक अध्ययन नहीं किया गया है और एक्सपायर हो चुकी दवाओं के विषैलेपन की किसी अन्य रिपोर्ट का अभाव हमें आश्वस्त ही करता है।

एक्सपायर जीवन-रक्षक दवाओं से जरूर बचना चाहिए

मिर्गी के लिए ली जाने वाली दवा और आमतौर पर इस्तेमाल में आने वाली एंटी-एंजिनल दवाओं आदि को इनके एक्सपायरी की तारीख के बाद इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। गर्भनिरोधक गोलियां, आई-ड्रॉप और इंसुलिन भी इसी वर्ग में आती हैं। कुछ जीवन रक्षक टीके भी एक्सपायरी की तारीख के बाद इस्तेमाल नहीं किए जाने चाहिए। इसके अलावा अगर दवा के भरोसे जीवित है तो भी तय कीजिए कि उनकी एक्सपायरी की तारीख सही हो।

 

एक्सपायर्ड डेट वाली दवा के इस्तेमाल में सावधानी

  • फ्लूइड और सस्पेन्शन वाली दवाएं टैबलेट या कैप्सूल की तुलना में कम स्थायी होती हैं।
  • दवाओं का असर कम हो जाता है अगर उनको सही तरीके से बताए गए तापमान पर ड्राई परिस्थितियों में न रखा जाए।
  • ऐसे किसी भी दवा का इस्तेमाल न करें, जो किसी भी तरह से संदिग्ध लग रही हो।
  • दवा का तभी इस्तेमाल करें जब दवा उसी रंग-रूप में हो, जैसा कि उसे असली रूप में होना चाहिए।
  • टूटे टैबलेट, रंग फीके पड़े इंजेक्शन, नर्म हो चुके कैप्सूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।  



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Image Source : Getty
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