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अब पैदा होने वाले बच्चों में होंगे तीन लोगों के डीएनए

लेटेस्ट By Gayatree Verma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 15, 2016
अब पैदा होने वाले बच्चों में होंगे तीन लोगों के डीएनए

आईवीएफ तकनीक से अब दोगुना फायदा होगा। अब पैदा होने वाले बच्चे में तीन लोगों के डीएनए होगा। इससे बच्चों में आनुवांशिक बीमारियां ठीक हो सकेंगी।

तीन लोगों के मिलकर बच्चा पैदा करने की तकनीक का सफल परीक्षण करने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है। अमेरिका की सरकारी स्वास्थ्य एजेंसी भी तीन लोगों के डीएनए को मिलाकर बच्चे पैदा करने वाली तकनीक पर विचार कर रही है जिससे कि होने वाला बच्चा आनुवंशिक रूप से बेहतर हो। लेकिन भ्रूण को कृत्रिम रूप से बनाए जाने की तकनीक के विरोध में कई नैतिक सवाल भी खड़े हो गए हैं।
 
अमेरिका की सरकारी संस्थान ने यह तकनीक अब तक बंदरों पर टेस्ट की है जिसके नतीजों के आधार पर अमेरिक में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) अब यह तय करेगा कि इस तरह की तकनीक परीक्षण मनुष्य पर किए जाने की छूट दी जानी चाहिए या नहीं। इस तकनीक द्वारा पैदा होने वाले बच्चे को  'डिजाइनर बच्चे' कहा जा रहा है जिसमें मां से अनचाहे गुण या जेनेटिक बीमारियां न पहुंचें इसके लिए उसके गुणधर्मों में बदलाव किया जाएगा। 

 

ब्रिटेन भी कर चुका है परीक्षण

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने भी तीन लोगों के डीएनए से पैदा होने वाली आईवीएफ तकनीक का सफल परीक्षण कर चुके हैं, जिसमें मां-बाप का डीएनए निकालने के बाद डीएनए एक डोनर के एम्ब्रियो में डाला जाएगा। इस प्रकार, पैदा होने वाले बच्चे में तीन लोगों के डीएनए होंगे। इन वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पैदा होने वाले बच्चों में होने वाली आनुवंशिक बीमारियों को रोका जा सकेगा।

 

क्या है विधि

इस तकनीक में आनुवंशिक विकारों वाली महिला की अंडाणु कोशिका की आनुवंशिक सामग्री को एक स्वस्थ महिला के अंडाणु में हस्तांतरित कर दिया जाएगा। जिससे कि उसके माइटोकोंड्रिया का डीएनए आईवीएफ शिशु में पहुंच सके। इसका अर्थ यह हुआ कि शिशु को तीन अभिभावकों यानी माता,पिता और डोनर महिला से डीएनए मिलेगा।

 

 

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