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गर्भाधान के बाद शरीर में ऐंठन

गर्भावस्‍था
By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jun 05, 2013
गर्भाधान के बाद शरीर में ऐंठन

गर्भाधान के बाद ऐंठन प्रेग्‍नेंसी की जटिलताओं में एक है, इसके बारे में विस्‍तार से पढ़िये हमारे इस लेख में।

Quick Bites
  • मासिक धर्म के दौरान हल्‍की ऐंठन गर्भावस्‍था का हो सकता है संकेत।
  • लिगामेंट्स के फैलाव के कारण गर्भाशय पर भी बनने लगता है तनाव।
  • गर्भाधान के बाद ज्‍यादा तेज दर्द और ब्‍लीडिंग चिंता का है विषय।
  • अस्थानिक गर्भावस्था सबसे अधिक फैलोपियन ट्यूब के अंदर होती है।

गर्भाधान के बाद कुछ महिलाओं को हल्‍के ऐंठन (क्रैंप्‍स) का अनुभव हो सकता है। इसे गर्भावस्‍था का प्रारंभिक लक्षणों में माना जाता है। गर्भाधान के बाद ऐंठन को आस्‍थानिक गर्भावस्‍था (एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेसी) या गर्भपात (इम्‍पेंडिंग मिसकैरेज) का भी संकेत मिलता है।

पेट दर्द से पीडि़त गर्भवती महिला ऐसी महिलाएं जो जल्‍द गर्भवती होना चाहती हैं और बेसब्री से गर्भधारण के प्रारंभिक लक्षणों का इंतजार करती हैं। इसके अलावा जो महिलायें अवांछित गर्भावस्‍था को लेकर चिंतित रहती हैं और वह यह भी जानना चाहती हैं कि वे गर्भवती हैं या नहीं। मासिक धर्म के दौरान हल्‍के ऐंठन को महसूस करना गर्भावस्‍था का प्रारंभिक संकेत हो सकता है।

लेकिन आमतौर पर यह ऐंठन और सामान्‍य से ज्‍यादा ब्‍लीडिंग गर्भावस्‍था की जटिलता के संकेत हो सकते हैं। गर्भाधान के बाद लगातार बह रहे खून और ऐंठन के कारणों के बारे में हम आपको विस्‍तार से जानकारी दे रहे हैं।

 

गर्भाधान के बाद हल्‍के ऐंठन

यह पूर्वकालिक (समय से पहले गर्भधारण करना) गर्भावस्‍था का संकेत हो सकता है। जल्‍दी गर्भधारण करने में गर्भ में सामान्‍य दर्द बना रहता है, साथ ही मन सुस्‍त रहता है। गर्भाधान के 8-10  दिनों में इसके लक्षण दिख जाते हैं। गर्भाधान के दौरान पुरुष का शुक्राणु और महिला के अंडाणु मिलकर निषेचन करते हैं, इसे इंप्‍लांटेशन कहते हैं। कुछ महिलाओं को इंप्‍लांटेशन के दौरान ब्‍लीडिंग और ऐंठन जैसी समस्‍या होती है।

गर्भधारण करने के बाद गर्भाशय में भ्रूण का विकास होना शुरू हो जाता है। इसके बाद महिला के शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। लिगामेंट्स गर्भाशय को तानने लगते हैं और आसपास के अंगों पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण महिलाओं के पेट में ऐंठन, अपच, कब्‍ज और पेट में सूजन जैसी समस्‍या शुरू हो जाती है। जिन महिलाओं में कैल्शियम और मैग्‍नीशियम की कमी होती है उनके पैरों में भी ऐंठन शुरू हो जाती है। इसलिए गर्भधारण के दौरान महिलाओं को अधिक पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है।

 

 

गर्भाधान के बाद गंभीर ऐंठन

गर्भपात :
गर्भाधान के बाद यदि महिला को ज्‍यादा तेज दर्द और ब्‍लीडिंग हो रही है तो यह चिंता का विषय हो सकता है। महिलाओं में पाये जाने वाले एस्‍ट्रोजन और प्रोगेस्‍टेरॉन हार्मोन गर्भावस्‍था के दौरान बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन हार्मोन में असंतुलन (खासकर प्रोगेस्‍टेरॉन के स्‍तर में गिरावट) होने से ऐंठन और गर्भपात हो सकता है। प्रोगेस्‍टेरॉन ओव्‍यूलेशन प्रक्रिया के दौरान शरीर में तापमान को सामान्‍य बनाये रखने में मदद करता है। यदि पुरूष से इंटरकोर्स के दौरान गर्भधारण होता है तो शरीर का तापमान सामान्‍य से ज्‍यादा हो जाता है। जिसे कम करने में प्रोगेस्‍टेरॉन हार्मोन मदद करता है। इसके अलावा प्रोगेस्‍टेरॉन हार्मोन के कारण ही गर्भाशय में खून का संचार ज्‍यादा होता है जो भ्रूण के लिए आवश्‍यक है।

 

अस्‍थानिक गर्भावस्‍था या एक्‍टोपिक प्रेग्‍नेंसी :

अस्थानिक गर्भधारण, गर्भावस्था का एक जटिल रूप है। अस्थानिक गर्भावस्था के दौरान गर्भ गुहा के बाहर ही प्रत्यारोपित हो जाता है। अस्थानिक गर्भधारण के असामान्य होने के कारण इसके जोखिम कारक भी बहुत से है। आमतौर पर अस्थानिक गर्भावस्था सबसे अधिक फैलोपियन ट्यूब के अंदर होती है, लेकिन कुछ ऐसे मामले भी सामने आते हैं जब अंडा फेलोपियन ट्यूब के बाहर ही निषेचित हो जाता है। ऐसे में जब भ्रूण का विकास होता है तब वह फेलोपियन ट्यूब पर दबाव डालता है जिसके कारण दर्द बढ़ता जाता है और सामान्‍य से ज्‍यादा खून बहता है। इसके अलावा अस्‍थानिक गर्भावस्‍था में निम्‍न रक्‍तचाप के कारण गर्दन में दर्द, चक्‍कर आना, बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है।

 

अन्‍य समस्‍यायें

इन दो समस्‍यायों के अलावा चिकित्‍सक इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि कहीं महिला को केवल मूत्र त्‍यागते समय ही तो किसी संक्रमण के कारण दर्द या ऐंठन तो नही हो रहा है। इसके अलावा उदर गुहा में किसी अंग की असामान्‍य स्थिति के कारण भी ऐंठन हो सकती है। असामान्‍य रक्‍तचाप, इलेक्‍ट्रोलाइट के स्‍तर में गड़बड़ी, आदि के कारण भी ऐंठन हो सकता है।

 

प्रेग्‍नेंसी प्‍लान करने से पहले सारे चेकअप करा लेने चाहिए। विटामिन और पोषणयुक्‍त आहार लेना चाहिए, स्‍मोकिंग और शराब का सेवन बिलकुल न करें। नियमित रूप से व्‍यायाम और योग कीजिए। हमेशा चिकित्‍सक के संपर्क में रहिए।

 

 

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Written by
Nachiketa Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJun 05, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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