एम्स ने माना होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों के पास हमेशा रहनी चाहिए ये 1 चीज, नहीं तो हो सकती है मौत

Updated at: Aug 10, 2020
एम्स ने माना होम आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीजों के पास हमेशा रहनी चाहिए ये 1 चीज, नहीं तो हो सकती है मौत

एम्स के डॉक्टरों ने हाल ही में एक स्टडी केस पेश करते हुए ये बताया कि होम आइसोलेशन वाले रोगियों को अपने पास ये चीज रखनी बहुत ही जरूरी है। 

Jitendra Gupta
लेटेस्टWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Aug 10, 2020

एक तरफ जहां भारत में कोरोनोवायरस के नए मामलों की संख्या बढ़ रही है उसके बावजूद, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना का ग्राफ करीब-करीब सुधरता दिखाई दे रहा है। इस अत्यधिक संक्रामक रोग के खिलाफ दिल्ली ने अपनी लड़ाई में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। दिल्ली में कोरोनोवायरस के अब तक 10,000 से अधिक एक्टिव मामले हैं और अब तक 4,098 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों की संख्या 5,372 है, जो कोरोनावायरस के एक्टिव मामलों का लगभग 50 प्रतिशत है। दिल्ली में जिन लोगों को COVID-19 के हल्के से मध्यम लक्षण हैं, उन्हें आमतौर पर होम क्वरांटाइन किया गया है और उन्हें रोगसूचक उपचार दिया जा रहा है। इसलिए, होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों के लिए उपचार का सही तरीका सुनिश्चित करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने घर पर रहने वाले COVID-19 रोगियों के लिए कुछ तरीकों का उल्लेख किया है। एक्सपर्ट्स ने इन रोगियों से अपने ऑक्सीजन के स्तर पर नजर रखने के महत्व को भी रेखांकित किया है ताकि किसी भी खतरे को टाला जा सके। साथ ही ये उन लोगों के लिए भी जरूरी है, जो होम आइसोलेशन में रह रहे हैं।  

oximeter

क्या कहती है एम्स की 'हैप्पी हाइपोक्सिया' केस स्टडी

COVID-19 पर नेशनल क्लिनिकल ग्रैंड राउंड्स के एक इंटरैक्टिव सत्र में दिल्ली स्थित AIIMS के चिकित्सा विशेषज्ञों ने COVID-19 रोगियों के लिए उपचार के तरीकों पर चर्चा की खासकर जो होम क्वरांटाइन में हैं। एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के मुताबिक, डॉक्टरों ने बुखार, गले में खराश और सांस फूलने वाली 35 वर्षीय महिला की केस स्टडी को साझा किया। महिला को तब अस्पताल ले जाया गया जब उसका ऑक्सीजन लेवल 67 प्रतिशत तक गिर गया था। महिला को बाद में नोवल कोरोनवायरस टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। 

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कम ऑक्सीजन लेवल खतरनाक क्यों ?

एक्सपर्ट का कहना है कि लोगों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हैप्पी हाइपोक्सिया  या  साइलेंट हाइपोक्सिया एक ऐसी स्थिति है, जब किसी कोविड-19 रोगी को बिना किसी खास परेशानी महसूस हुए उसका ब्लड ऑक्सीजन स्तर असामान्य रूप से कम होता चला जाता है। इस मामले में, भले ही ऑक्सीजन लेवल खतरनाक रूप से निम्न स्तर तक गिरता हो लेकिन रोगी को सांस लेने में तकलीफ या सांस की समस्याओं के कोई अन्य स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते हैं। बिना लक्षण या सामान्य रूप से रोगग्रस्त रोगियों के शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में कमी का यह साइलेंट कारण कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

होम क्वरांटाइन में मरीजों को अपने पास रखना चाहिए पल्स ऑक्सीमीटर 

यही कारण है कि एम्स के चिकित्सा एक्सपर्ट और डॉक्टर कोविड-19 रोगियों की करीबी से निगरानी करने पर जोर दे रहे हैं भले ही वे होम-आइसोलेशन पर ही क्यों न हों। आमतौर पर COVID में, मरीज कई अन्य नैदानिक सुविधाओं के बिना हाइपोक्सिमिया की गिरफ्त में आते हैं। 

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oximeter benefits

घर में मौजूद कोरोनवायरस रोगियों के ऑक्सीजन लेवल पर नजर रखने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग करना उचित है। इस छोटे से उपकरण, जिसे रक्त में ऑक्सीजन का प्रतिशत मापने के लिए किसी व्यक्ति की उंगली, पैर की अंगुली या कान पर चिपकाया जा सकता है।

ऑक्सीजन लेवल कब माना जाता है बहुत कम?

अगर आप अपने ऑक्सीजन लेवल को मापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग कर रहे हैं, तो 95 SpO2 के नीचे किसी भी रीडिंग को कम और असामान्य माना जाता है। अगर आपका लेवल 93 SpO2 से कम हो जाता है, तो भी आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, भले ही आपको सांस लेने में कोई बड़ी परेशानी महसूस न हो। पल्स ऑक्सीमीटर की मदद से अपने ऑक्सीजन लेवल को मापने का सही तरीका सीखना भी महत्वपूर्ण है ताकि आप गलत माप पर भरोसा न करें।

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