बॉडी टेम्परेचर चेक करने से नहीं होती कोरोना की सही पहचान! जानें क्यों एक्सपर्ट मान रहे टेम्परेचर चेक करना गलत

Updated at: Jul 24, 2020
बॉडी टेम्परेचर चेक करने से नहीं होती कोरोना की सही पहचान! जानें क्यों एक्सपर्ट मान रहे टेम्परेचर चेक करना गलत

भीड़भाड़ वाली जगहों पर आपने अक्सर गार्ड को बॉडी टेम्परेचर चेक करते हुए देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वास्तव में ये कितना सही है? 

Jitendra Gupta
लेटेस्टWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 24, 2020

लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद कई ऑफिस, बड़ी-बड़ी दुकानें, स्टोर और क्लीनिक जैसे कई संस्थान पूरे तरीके से खुल चुके हैं। आप बाजार जाने के लिए घर से निकलते होंगे और इन स्टोर पर एक गार्ड बाहर ही बैठकर वहां आने वाले लोगों का बॉडी टेम्परेचर चेक कर रहा होगा। अगर आपके बॉडी टेम्परेचर 100 या उससे ज्यादा आता है तो गार्ड आपको अंदर जाने से मना कर सकता है या फिर आपसे थोड़ी देर रुककर दोबारा एंट्री करने को कहता है। ऐसा आपके साथ भी कई बार हुआ होगा इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन क्या आपने गौर किया है कि ऐसा क्यों हैं। 

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मौजूदा वक्त में किसी भी बिल्डिंग या स्टोर में प्रवेश करने से पहले आपके बॉडी टेम्परेचर की जांच करना एक नया नियम बन चुका है, जिसका पालन लगभग सभी लोग कर रहे हैं। वास्तव में अधिकांश स्टोर, केंद्र और हाउसिंग सोसाइटी इसे कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश मानते हैं, जिस कारण इसका बड़ी सख्ती से पालन भी किया जा रहा है। बॉडी टेम्परेचर की जांच के पीछे का कारण संदिग्ध COVID रोगियों की पहचान करना है ताकि कोरोनावायरस को फैलने से रोका जा सके। अगर आपका बॉडी टेम्परेचर 100.4 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर निकलता है, तो आपको कहीं भी अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। 

सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने सभी कार्यालय से अपने कर्मचारियों की रोजाना बॉडी टेम्परेचर जांच करने की सलाह दी है। लेकिन वैज्ञानिक इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। किसी भी व्यक्ति का बॉडी टेम्परेचर जांचने के अभ्यास का विज्ञान समर्थन नहीं करता है और वास्तव में कोरोनावायरस के प्रसार में योगदान कर सकता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट का मानना है कि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि टेम्परेचर की जांच करने से वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती हैा इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता व्यक्ति के बॉडी टेम्परेचर की जांच की जाए या नहीं। हालांकि इस प्रैक्टिस को रोका जाना चाहिए।

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संदिग्ध मामलों की पहचान करने के लिए शरीर के तापमान की जांच करने का विचार 2000 के दशक के महामारी प्रकरण का एक हिस्सा रहा है। उस समय तापमान मापना एक विश्वसनीय संकेतक था क्योंकि 83 प्रतिशत SARS संक्रमण से संक्रमित व्यक्तियों में बुखार जैसा शुरुआती संकेत दिखाई देता था। लेकिन इस बार नोवल कोरोनावायरस के समय  में बॉडी टेम्परेचर की जांच करना किसी काम की नहीं है। एक अध्ययन में ये कहा गया है कि SARS-CoV2 (कोरोनावायरस) संक्रमण से आधी से कम आबादी को बुखार होता है। इतना ही नहीं संक्रमण से पीड़ित किसी भी व्यक्ति में कोई भी लक्षण दिखने से पहले ही वे संक्रमित हो चुके होते हैं। 

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वास्तव में, इस संक्रमण के आगे सबसे कमजोर व्यक्ति (65 वर्ष से अधिक उम्र) और बिना संकेत वाले ज्यादातर मामलों में बुखार का अनुभव नहीं करते हैं।

अन्य बीमारियों के दौरान भी हो सकता है बुखार

कई अन्य बीमारियां ऐसी हैं, जिसमें बुखार आपको फ्लू होने पर सबसे आम लक्षण के रूप में  सामने आता है। इस प्रकार, मानसून के मौसम की शुरुआत के साथ तापमान की जांच भी अप्रभावी हो जाती है। यह लोगों को सुरक्षा की झूठी भावना का भी अहसास करा सकती है और कुछ लोग इस बात को भलीभांति जानते हैं कि उन्हें संक्रमण हो सकता है और बुखार भी इसलिए वे किसी भी स्क्रीनिंग से गुजरने से पहले बुखार कम करने वाली दवा ले सकते हैं। इस प्रकार, भीडभाड़ वाली जगहों पर संक्रमित रोगियों की पहचान कर पाना और उन्हें अलग करने के लिए बॉडी टेम्परेचर की जांचत करना एक विश्वसनीय फिल्टर नहीं है।

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