बच्चों में कोरोना के इलाज की नई गाइडलाइन: CT Scan, स्टेरॉइड और रेमडेसिविर के प्रयोग पर दिये गए ये निर्देश

बच्चों में कोरोना के मामलों को देखते हुए सरकार ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों को अपनाकर माता-पिता संक्रमित बच्चों का ध्यान रख सकते हैं।

Meena Prajapati
लेटेस्टWritten by: Meena PrajapatiPublished at: May 03, 2021
Updated at: Jun 11, 2021
बच्चों में कोरोना के इलाज की नई गाइडलाइन: CT Scan, स्टेरॉइड और रेमडेसिविर के प्रयोग पर दिये गए ये निर्देश

कोरोना की दूसरी लहर का पीक जा चुका है। इस लहर में कोरोना से हर उम्र के लोग संक्रमित हुए और बहुतों ने अपनी जान गंवाई। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में कोरोना की तीसरी लहर भी आ सकती है, जो संभवता बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो। अभी तक की कोरोना लहरों में बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे पर वाहक के रूप में जरूर काम कर रहे थे। सरकार का कहना है कि अभी तक 1 से 3 फीसद बच्चों में कोरोना के गंभीर लक्षण दिखाई दिए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी कर बताया है कि अगर बच्चों में कोरोना हो जाए तो उनका (New Guidelines for Management of Covid - 19 in Children) कैसे करें। 

बच्चों में रेमडेसिविर, सीटी स्कैन और स्टेरॉइड के प्रयोग को लेकर नई गाइडलाइन

स्टेरॉइड्स के लिए- नई गाइडलाइन के मुताबिक स्टेरॉइड का प्रयोग अस्पताल में भर्ती कोविड संक्रमित थोड़े गंभीर या बहुत गंभीर बच्चों में ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से स्टेरॉइड का प्रयोग नहीं करना है।डायरेक्ट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसिस (DGHS) के जारी बयान के मुताबिक, एसिम्पटोमैटिक और माइल्ड इन्फेक्शन में स्टेरॉयड का प्रयोग नुकसानदायक बताया गया है। 

रेमडेसिविर के लिए- 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए रेमडेसिविर का प्रयोग नहीं करना है। सरकार का मानना है कि ये दवा बच्चों के लिए कितनी सुरक्षित है, इस पर कोई स्टडी नहीं है।

सीटी स्कैन के लिए- नई गाइडलाइन के अनुसार कोविड संक्रमित बच्चों का हाई रिजॉल्यूशन वाला सीटी स्कैन की जांच बहुत जरूरी होने पर सोच-समझकर ही की जाए।

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कोविड-19 से बच्चों को ऐसे बचाएं ( Management of children with Covid – 19 disease)

कोविड-19 इंफेक्शन से पीड़ित बच्चे asymptomatic (बिना लक्षण के), हल्के लक्षण के, सीमित बीमारी या गंभीर बीमार हो सकते हैं। इन लक्षणों से बचाने के लिए माता-पिता को निम्न उपाय अपनाने हैं। 

लक्षण रहित बच्चों को इलाज की जरूरत नहीं : भारत सरकार

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिडाट्रिक उम्र के बच्चों के लिए दिशानिर्देश जारी करके बताया है कि ऐसे बच्चो जो कोरोना पॉजिटिव तो हैं पर कोई लक्षण दिखाई नहीं ((asymptomatic)) दे रहे हैं, उन्हें इलाज की जरूरत नहीं है। हालांकि उनमें संभावित लक्षणों पर नजर रखने को जरूर कहा गया है।  इन लक्षणों में खांसी, जुकाम, बुखार, थकान, गले में दर्द, स्मेल का जाना आदि बच्चों में दिखाई दे रहे हैं। कुछ बच्चों में gastrointestinal या atypical लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बच्चों में इस वक्त मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेटरी सिंड्रोम भी बच्चों में दिखाई दे रहा है।

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माइल्ड इन्फेक्शन के लिए जारी निर्देश

जिन बच्चों में कोरोना की गंभीरता हल्की है उनमें गले में दर्द, नाक से खून बहना, खांसी की दिक्कत सामने आ रही है। ऐसे बच्चों में सांस लेने में कोई दिक्कत नही हो रही है। कुछ बच्चों में gastrointestinal लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे बच्चों को किसी जांच की जरूरत नहीं होती है। ऐसे बच्चों में घर पर आइसोलेट करके और सिम्टोमैटिक ट्रीटमेंट करके इलाज किया जा सकता है। 

Mild disease : होम आइसोलेशन में ध्यान रखने योग्य बातें 

  • -घर में मरीज को आइसोलेट करने की पूरी व्यवस्था हो।
  • -मरीज का ध्यान रखने वाले केयरटेकर हों।
  • -अगर संभव हो तो आरोग्य सेतु एप को डाउनलेड करें। 
  • -जो माता पिता मरीज की कंडीशन की निगरानी कर रहे हैं वे डॉक्टर को उसकी रोजाना की रिपोर्ट बताएं। 
  • -माता पिता ने सेल्फ आइसोलेशन की अंडरटेकिंग भरी और होम आइसोलेशन के सभी निर्देशों का पालन करेंगे। 
  • -जिन बच्चों में मोटापा (BMI> 2SD), जन्मजात हृदय रोग, गंभीर फेफड़ों की बीमारी, पुरानी अंग की शिथिलता (chronic organ dysfunction) जैसी बीमारियां हैं, और कोरोना के हल्के लक्षण हैं, तो उनका भी इलाज घर में किया जा सकता है। अगर सुविधाओँ की कमी की वजह से इन बच्चों का इलाज घर पर नहीं होता है और स्थिति गंभीर होती है, तब अस्पताल में भर्ती कराना पड़ाता है।

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माइल्ड लक्षण दिखने पर घर पर ये करें ट्रीटमेंट (Treatment of mild illness in home isolation is symptomatic)

1. बुखार के लिए पैरासिटामोल 10-15 mg/kg/dose, हर 4-6 घंटे में इसे रिपीट करें। 

2. बड़े बच्चे और किशोरों में अगर गला खराब होने की दिक्कत हो रही है तो वे नमक के पानी से गरारे करें।

3. ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लें। न्यूट्रशीनल डाइट लें। 

4. इन लक्षणों में एंटीबॉयोटिक्स की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि इन लक्षणों में बच्चों में हाइड्रोक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine), Favipiravir, Ivermectin, lopinavir/ritonavir, Remdesivir और Umifenovir की जरूरत नहीं है। इसके अलावा  Immunomodulators, Tocilizumab, Interferon B 1 a, Convalescent plasma infusion or dexamethasone की भी आवश्यकता नहीं है। 

5. घर पर निगरानी-परिजन या केयरटेकर को एक मॉनिटरिंग चार्ट बनाना चाहिए। जब बच्चा रो नहीं रहा हो, छाती में जलन, शरीर में नीलापन, यूरीन आउटपुट, ऑक्सीजन सैच्युरेशन होने पर बच्चे की रेस्पाइरेटरी रेट्स को 2-3 बार दिन में जांचना चाहिेए। अगर संभव हो तो बच्चे को तरल पदार्थ दें। माता पिता लगातार डॉक्टर से बात करते रहें माता पिता को पता होना चाहिए कि इमरजेंसी की स्थिति में किससे संपर्क करें।

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बच्चों में कोविड-19 के मोडरेट लक्षण (Management of children with Moderate Covid – 19 disease)

  • -श्वसन दर : दो महीने से कम उम्र के बच्चे में respiratory rate प्रति मिनट 60 से कम होना, 2 से 12 महीने के बच्चे में रेस्पाइरेटरी रेट प्रति मिनट 50 से कम, 1 से 5 साल के बच्चे में रेस्पाइटेरी रेट प्रति मिनट 40 से कम और 5 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों में रेस्पाइेटरी रेट प्रति मिनट 30 से कम होने पर मोडरेट लक्षण माने जाते हैं। ऑक्सीजन सैच्युरेशन 90 फीसद से अधिक होना चाहिए। 
  • -मोडरेट कोविड-19 बीमारी से पीड़ित बच्चे निमोनिया का भी शिकार हो सकते हैं। जो नैदानिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकता है
  • -इन लक्षणों में कोई लैब टैस्ट की आवश्यकता नहीं होती है। 

बच्चों में मोडरेट कोविड-19 लक्षण का इलाज

  • जिन बच्चों में कोविड के मध्यम लक्षण हैं, उन्हें कोविड हेल्थ सेंटर या सेंकेंडरी लेवर हेल्थकेयर में भर्ती किया जाता है। 
  • बच्चों को तरल पदार्थ और एलैक्ट्रोल पिलाएं। ओरल फीड कराएं।
  • खराब स्थिति में फ्ल्युड थेरेपी दी जाए। 
  • मध्यम लक्षण दिखाई देने पर बुखार आने पर पैरासिटामोल दें। बाकी डॉक्टर के संपर्क में रहें। 

बच्चों में गंभीर कोविड-19 के लक्षण (Management of children with Severe Covid-19 disease)

  • जिन बच्चों का SpO2 लेवल 90 फीसद से कम होता है उनमें कोविड की गंभीरता दिखाई देती है। ऐसे बच्चों में गंभीर निमोनिया, Acute Respiratory Distress Syndrome, Septic Shock, Multi-organ dysfunction syndrome (MODS) और सायनोसिस के साथ निमोनिया जैसी बीमारियों की गंभीरता होती है। 
  • ऐसे बच्चों में छाती में घुरघुराहट, छाती में दिक्कत, सुस्ती, नींद जैसी परेशानियां दिखाई देती हैं।

बच्चों में गंभीर कोविड-19 के लक्षण का इलाज

  • ऐसे बच्चों को कोविड अस्पतालों में भर्ती कराना चाहिए। कुछ बच्चों को आइसीयू की भी जरूरत पड़ सकती है। 
  • ऐसे बच्चों में कंप्लीट ब्लड काउंट, लिवर और रिनल फंक्शन टेस्ट और छाती का एक्स-रे किया जाता है। इस स्थिति के लक्षणों को लेकर भारत सरकार ने दवाओं की भी जानकारी दी है। इसके अलावा आप डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं। बच्चों में Multisystem inflammatory syndrome दिखाई देने पर भी डॉक्टर से संपर्क करें या फिर भारत सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी की मदद लें। 

भारत सरकार की ओर से 18 साल से ऊपर वालों के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू हो गया है, लेकिन अभी भी 18 से कम उम्र के बच्चों में इसका खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारत सरकार ने एडवाइजरी कर लोगों को बताया है कि वे घर पर भी बच्चे को कैसे कोविड के लक्षणों से बचा सकते हैं। किन लक्षणों के दिखने के पर क्या कर सकते हैं।

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