हाई ब्लड शुगर वाले कोरोना रोगियों को मौत का खतरा डबल! शोधकर्ताओं ने बताया कितने दिन होते हैं मरीजों पर भारी

Updated at: Jul 12, 2020
हाई ब्लड शुगर वाले कोरोना रोगियों को मौत का खतरा डबल! शोधकर्ताओं ने बताया कितने दिन होते हैं मरीजों पर भारी

एक नए अध्ययन में ये सामने आया है कि जिन कोरोना रोगियों का ब्लड शुगर हाई रहता है उन्हें मौत का खतरा डबल हो जाता है। जानिए क्या है कारण।

Jitendra Gupta
लेटेस्टWritten by: Jitendra GuptaPublished at: Jul 12, 2020

दुनियाभर में तबाही का मंजर फैला रहा कोरोनावायरस उन लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, जिनका ब्लड शुगर आसामान्य रूप से बहुत ज्यादा रहता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि कोरोना के मरीजों की बढ़ती शुगर के कारण उन्हें गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है और उनके मरने की संभावना भी डबल हो जाती है। 

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पिछले अध्ययनों से ये निष्कर्ष सामने आया है कि हाइपरग्लाइसेमिया (असामान्य रूप से हाई ब्लड शुगर) अन्य स्थितियों के अलावा निमोनिया, स्ट्रोक, दिल के दौरे, आघात और सर्जरी में मृत्यु दर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा हुआ है। हालांकि, डायबिटीज की पहचान के बिना कोरोना रोगियों के क्लिनिकल परिणाम और अस्पताल में जाते वक्त फास्टिंग ब्लड शुगर (एफबीजी) स्तर के बीच किसी प्रकार का सीधा संबंध अच्छी तरह से स्थापित नहीं किया गया है।

चीन स्थित हुआझेंग विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों ने कहा है कि इस अध्ययन से ये पहली बार पता चला है कि अस्पताल में भर्ती होने पर बढ़ा हुए एफबीजी स्वतंत्र रूप से 28 दिनों की मृत्यु दर में वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही पहले डायबिटीज की पहचान किए बिना अस्पताल में आने वाले कोरोना रोगियों को होने वाली परेशानियों के प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है। 

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डायबेटोलॉजिया जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों के लिए शोधकर्ताओं ने दो अस्पतालों में प्रवेश के वक्त मरीजों के एफबीजी और कोरोना रोगियों की 28-दिवसीय मृत्यु दर के बीच संबंध की जांच की। इस अध्ययन में सभी कोरोना रोगियों का लगातार 28-दिनों तक मूल्यांकन किया गया और 24 जनवरी से 10 फरवरी तक चीन के वुहान स्थित दो अस्पतालों में आने वाले मरीजों का एफबीजी लेवल भी चेक किया गया। 

इन दोनों अस्पतालों में डेमोग्राफिक और क्लिनिकल डेटा, 28 दिनों से मिले परिणाम, अस्पताल में जटिलताएं और कोरोना रोगियों के CRB-65 स्कोर का विश्लेषण किया गया। CRB-65 स्कोर निमोनिया की गंभीरता का आकलन करने के लिए एक प्रभावी उपाय है और ये चार संकेतकों पर आधारित होता है। पहला भ्रम का स्तर, श्वसन दर, सिस्टोलिक रक्तचाप या डायस्टोलिक रक्तचाप और आयु। 24 जनवरी से 10 फरवरी तक 605 कोरोना रोगियों को भर्ती किया गया, जिसमें से 114 की अस्पताल में मृत्यु हो गई।

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अध्ययन के परिणामों से ये पता चला कि अधिक एफबीजी समूह वाले मरीजों की मृत्यु कम एफबीजी वाले समूह की तुलना में 2.3 गुना तक अधिक थी। वहीं जिनका (प्री-डायबिटिक) एफबीजी बीच में था उनकी कम एफबीजी वाले समूह की तुलना में मृत्यु होने की संभावना 71 फीसदी थी। 

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आंकड़ों से यह भी पता चला है कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में 75 प्रतिशत अधिक मौत होने की संभावना थी और जिन लोगों का CRB 65 स्कोर अधिक था उन्हें भी मौत का खतरा अधिक था। इसके अलावा अध्ययन में सामने आया कि एफबीजी और सीआरबी 65 स्कोर को एक साथ देखने पर सबसे ज्यादा एफबीजी समूह के रोगियों में मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

सबसे कम एफबीजी समूह की तुलना में उच्चतम एफबीजी वाले समूह में जटिलताओं का जोखिम भी चार गुना अधिक पाया गया जबकि  मध्य (प्री-डायबिटिक) समूह को ये 2.6 गुना अधिक था।  शोधकर्ताओं का कहना है कि हमने यह भी पाया कि जिन लोगों में 7.0 mmol / l या इससे अधिक का FBG था उन्हें मृत्यु दर का खतरा अधिक है, भले ही रोगी को निमोनिया हो या नहीं। 

उन्होंने कहा कि डायबिटीज से संबंधित स्थिति वाले रोगियों, जैसे कि गंभीर सेप्सिस, प्रणालीगत इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स सिंड्रोम (एसआईआरएस) और दर्दनाक मस्तिष्क की चोट के कारण असामान्य रूप से हाई ब्लड शुगर होता है। 

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