हाइपरटेंशन वाले कोरोनावायरस रोगियों में रिकवरी के बाद भी फिर से पॉजिटिव होने की हो सकती है संभावना: शोध

Updated at: Jun 26, 2020
हाइपरटेंशन वाले कोरोनावायरस रोगियों में रिकवरी के बाद भी फिर से पॉजिटिव होने की हो सकती है संभावना: शोध

अध्‍ययन से पता चला है कि हाइपरटेंशन या हृदय रोग वाले लोगों में COVID-19 से रिकवरी के बाद भी दोबारा पॉजिटिव होने की संभावना हो सकती है।

Sheetal Bisht
लेटेस्टWritten by: Sheetal BishtPublished at: Jun 26, 2020

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं, जो आपको एक बार संक्रमित करने के बाद दोबारा भी अटैक कर सकती हैं, जैसे कि कोरोनावायरस। अगर आप यह सोचकर खुश हैं कि आप कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हो गए हैं और अब ये वायरस आप पर दोबारा अटैक नहीं करेगा, तो आप सरासर गलत हैं। ऐसा सोचना, खुद को बेवकूफ बनाने जैसा है, क्‍योंकि इस वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए अभी कोई वैक्‍सीन उपलब्‍ध नहीं है। यही वजह है कि आप इससे रिकवरी के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। यदि आप हाइपरटेंशन यानि हाई ब्‍लड प्रेशर या फिर दिल की बीमारी के मरीज हैं, तो आपको कोरोनावायरस से रिकवरी के बाद भी दोबारा इससे पॉजिटिव होने की संभावना अधिक है। यहां तक कि अगर वे इस वायरस के लिए नेगेटिव टेस्‍ट आने के बाद ठीक हो गए हैं, तो भी आप बाद में फिर से पॉजिटिव पाए जा सकते हैं। इसके पीछे का कारण जानकर आप चौंक जाएंगे। कोरोनावायरस से दोबारा पॉजिटिव होने की संभावना के बारे में जानने के लिए इस लेख को आगे पढ़ें।

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अधिकांश वायरल डिजीज आती हैं और फिर चली जाती हैं। पुन: संक्रमण की संभावना बहुत कम है क्योंकि शरीर बीमारी पैदा करने वाले वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का उत्पादन करता है। लेकिन लगता है कि COVID-19 इन सबसे अलग है। कुछ मामलों में बताया गया है कि रिकवरी के बाद  मरीजों में फिर से कोरोनावायरस के लिए पॉजिटिव टेस्‍ट पाया गया। इसके अलावा, हृदय रोगों और हाई बीपी के रोगियों में सामान्‍य लोगों की तुलना में जोखिम अधिक है। ऐसा पाया गया है कि इनमें फिर से कोरोनावायरस पॉजिटिव होने की अधिक संभावना हो सकती है, जो एक खतरनाक मुद्दा है।

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COVID-19 रिकवरी के बाद भी क्‍यों होता है दोबारा पॉजिटिव होने का खतरा

चीन के हुजहोंग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एक शोध दल ने 900 से अधिक COVID-19 रोगियों के स्वास्थ्य डेटा का आंकलन किया, ताकि कुछ लोगों के दोबारा पॉजिटिव टेस्‍ट पाए जाने के पीछे का कारण पता चल सके। शोध के दौरान, उन्होंने पाया कि इनमें लगभग 6% रोगी फिर से पॉजिटिव हो रहे हैं। रिसर्च टीम ने उनकी मेडिकल हिस्‍ट्री और अन्य जानकारी एकत्र करके गहन अध्ययन किया। जिसके बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि COVID-19 से दोबारा पॉजिटिव पाए जाने और क्‍लीनिकल  लक्षणों के बीच एक संबंध है।

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अध्‍ययन के परिणाम क्‍या रहे?

अध्‍ययन के परिणाम में शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले से मौजूद हाइपरटेंशन या हाई ब्‍लड प्रेशर के साथ COVID-19 पॉजिटिव होने वाले लोगों में रिकवरी के बाद फिर से पॉजिटिव होने की संभावना थी। इस अध्‍ययन ने वृद्ध लोगों और बीमार रोगियों के स्वास्थ्य पर चिंता जताई है। टीम की ओर से जारी बयान में लिखा गया है: "50 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों में, जिन में फिर से पॉजिटिव टेस्‍ट पाये गए, वह कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हाईपरटेंशन के रोगी थे।"

इसके अलावा, एक पहलू यह भी है कि ये वायरस फेफड़ों में हो सकता है, जो टेस्‍ट में नहीं दिखा था। यह संभव हो सकता है यदि यह फेफड़ों में गहरी है और पकड़े नहीं जाने वाले स्‍थान पर है क्‍योंकि यह टेस्‍ट मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन पथ को कवर करता है। हालाँकि, इसकी संभावना कम है लेकिन संभावना अभी भी है और हमें इसकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

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कहीं आप दोबारा पॉजिटिव तो नहीं?

कहीं आप दोबारा पॉजिटिव तो नहीं? इस बात का जवाब और संकोच से बचने के लिए आप एक बार रिजल्‍ट आने के बाद नेगेटिव का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इसलिए रिकवरी के बाद मरीज को पुष्टि के लिए कुछ दिनों या 1-2 सप्ताह के बाद फिर से जांच करवानी चाहिए। यह उन लोगों के लिए अनिवार्य है, जो कोरोनावायरस से बच गए हैं। इसके अलावा, जो लोग हाई ब्‍लड प्रेशर या हृदय रोगों की समस्याओं और फेफड़ों के संक्रमण या श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। वे दूसरों की तुलना में अधिक जोखिम वाले हैं।

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