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हर 3 महीने बाद बदलना चाहिए कुकिंग ऑयल, जानें क्या हैं इसके फायदे

अन्य़ बीमारियां By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 21, 2019
हर 3 महीने बाद बदलना चाहिए कुकिंग ऑयल, जानें क्या हैं इसके फायदे

खाना बनाने के लिए हम जिस तेल का इस्तेमाल करते हैं उसे कुकिंग ऑयल कहते हैं। कुकिंग ऑयल का हमारे स्वास्थ्य से बहुत गहरा संबंध होता है। बाजार में कई तरह के तेल मिलते हैं और हमें उन सब का इस्तेमाल करना चाहिए। चाहे तिल का तेल हो, ऑलिव ऑयल हो, कोकोनट ऑय

खाना बनाने के लिए हम जिस तेल का इस्तेमाल करते हैं उसे कुकिंग ऑयल कहते हैं। कुकिंग ऑयल का हमारे स्वास्थ्य से बहुत गहरा संबंध होता है। बाजार में कई तरह के तेल मिलते हैं और हमें उन सब का इस्तेमाल करना चाहिए। चाहे तिल का तेल हो, ऑलिव ऑयल हो, कोकोनट ऑयल हो या सन फ्लावर ऑयल हो हर तेल के अपने अपने फायदे होते हैं और हमें सभी का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कुकिंग ऑयल हमारे शरीर में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर सही कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल न किया जाए तो इससे धमनियों में प्लाक जमने से ब्लड प्रेशर के साथ-साथ दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर बदल बदल कर कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल किया जाए तो शरीर को वह सभी जरूरी तत्व मिलते हैं जिनकी जरूरत होती है।

तिल का तेल

तिल के तेल को काले और सफेद तिल के बीज से निकाला जाता है। इस तेल मैग्नीशियम, कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और लेसिथिन का बहुत अच्छा स्रोत है। तिल का तेल स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। यह आपके दिल पर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित बनाये रखने में मदद करता है इसलिए तिल के तेल को हृदय रोगियों को लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल में अन्य तेलों के मुकाबले मोनोसैचुरेटेड फैट्स ज्यादा होता है। इसमें ढेर सारे एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें फाइटोन्यूट्रिएटंस ओलेकैंथेल और ओलेइक एसिड भी भरपूर मात्रा में होता है। ऑलिव ऑयल के सेवन से शरीर में फैट का वितरण नियंत्रित रहता है और अतिरिक्त चर्बी जमा नहीं होती है। यह दिल की बीमारियों और हाई ब्लडप्रेशर से बचाव करता है। इससे शरीर ग्लूकोज को आसानी से पचाता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

कोकोनट ऑयल

नारियल तेल में बना खाना न सिर्फ अधिक पौष्टिक होता है बल्कि अधिक समय तक फ्रेश भी रहता है। नारियल तेल में बना खाना स्वादिष्ट तो होता ही है साथ ही इसमें कई तरह के पोषक तत्वों का अवशोषण करने का गुण भी पाया जाता है। नारियल के तेल में 92 फीसदी सैचुरेटेड फैट पाया जाता है। इसमें सैचुरेटेड फैट होता है, लेकिन कोलेस्ट्रॉल नहीं होता। यह तेल सेहत के लिहाज से ठीक है, डीप फ्राई के लिए उपयुक्त नहीं। इसमें वही वसा होती है, जो मां के दूध में होती है। इसे 'सुपरफूड' की उपाधि ठीक ही दी गई है।

सन फ्लावर ऑयल

सूरजमुखी के तेल का सेवन करने से दिल स्‍वस्‍थ रहता है और दिल की बीमारियां नहीं होती हैं। इसमें मौजूद लिनोलेइक एसिड रक्त धमनियों में खून का थक्का बनने से रोकता है। सूरजमुखी का तेल का तेल विटामिन ई का भंडार है। इसमें सेचुरेटेड फैट बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है। सूरजमुखी का तेल चाहे वह रिफाइंड हो या अनरिफाइंड, दोनों ही तरह से दिल के लिए फायदेमंद माना जाता हैं। इसमें सही मात्रा और सही अनुपात में मौजूद मोनो और पॉलीसेचुरेटेड फैट के कारण यह कॉलेस्ट्रोल लेवल को कम रखता है।

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