नार्कोलेप्‍सी से जुड़े हैं ये जोखिम

Updated at: Jul 24, 2015
नार्कोलेप्‍सी से जुड़े हैं ये जोखिम

नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें रोगी कभी भी और कहीं भा अचानक से सो जाता है। यह बीमारी अधिकांशतः 15 से 25 साल की आयु के लोगों को अपना शिकार बनाती है। नार्कोलेप्‍सी से कई प्रकार के जोखिम भी जुड़े होते हैं।

Rahul Sharma
मानसिक स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Rahul SharmaPublished at: Jul 24, 2015

नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें रोगी कभी भी और कहीं भा अचानक से सो जाता है। इस बीमारी में रोगी कभी भी बैठे-बैठे या काम करते हुए सो जाता है, यहां तक कि हंसते या रोते हुए भी। साथ ही रोगी दिन भर उनींदा और थका हुआ रहता है। कितना भी सो लेने के बाद रोगी को लगता है, कि वह सोया ही नहीं है। यह बीमारी अधिकांशतः 15 से 25 साल की आयु के लोगों को अपना शिकार बनाती है। नार्कोलेप्‍सी से कई प्रकार के जोखिम भी जुड़े होते हैं। चलिये जानें नार्कोलेप्‍सी और इससे जुड़े जोखिम क्या हैं -

 

Narcolepsy in Hindi

 

नार्कोलेप्सी क्या है

नार्कोलेप्सी के रोगी हमेशा सुस्त महसूस करते हैं और उन्हें अधिक समय तक जागने में कठिनाई होती है। हालांकि अभी तक वैज्ञानिक इस बीमारी का ठोस कारण पता लगाने में सफल नहीं हो पाए हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुवांशिकी और वायरस के संयोग से ऐसी स्थिति पैदा होती है। महिलाओं इस बीमारी के लक्षण मरीज़ में लम्बे समय से हो सकते हैं लेकिन बीमारी का पता बहुत दिनों बाद चलता है।


नार्कोलेप्सी के जोखिम कारक

बाहरी व निजी जीवन में नार्कोलेप्सी व्यक्तिगत रूप से आपके लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। चलिये जानें कि इस रोग के कारण किस तरह के जोखिम पैदा हो सकते हैं -


Narcolepsy in Hindi


अंतरंग रिश्तों के साथ हस्तक्षेप

बहुत ज्यादा सोना सेक्स ड्राइव को कम या नपुंसकता का कारण बन सकता है, तथा नार्कोलेप्सी से पीड़ित व्यक्ति अंतरंग पलों के दौरान भी सो सकते हैं। यौन रोग से उत्पन्न समस्याएं आगे भावनात्मक कठिनाइयों से और भी जटिल हो सकती हैं।

शारीरिक नुकसान

नींद के ये अटैक नार्कोलेप्सी से पीड़ित व्यक्ति को शारीरिक नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। यदि ड्राइविंग करते हुए इस तरह का स्लीप अटैक आए तो एक्सीडेंट हो सकता है। वहीं यदि भोजन तैयार करते समय आप सो जाएं तो कट जाने व जल जाने का खतरा अधिक होता है।

मोटापा

नार्कोलेप्सी से पीड़ित रोगी के ओवर वेट होने की आशंका सामान्य लोगों से दो गुना तक अधिक होती है। वजन बढ़ाने की ये घटना निष्क्रियता, ज्यादा खाने, हाइपोसर्टेन की कमी या अन्य कारकों के संयोजन से संबंधित हो सकती है।


नार्कोलेप्सी के मरीज हमेशा सुस्त रहते हैं। इन रोगियों में मनासिक समस्याओं जैसे डिप्रेशन, बाइपोलर डिस्ऑर्डर और सीजोफ्रेनिया भी शामिल हो सकते हैं। इसलिये इसके लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिये और समय रहते चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिये।


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