• shareIcon

छुटिटयों के दौरान अभिभावकों की भूमिका

परवरिश के तरीके By रीता चौधरी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / May 29, 2012
छुटिटयों के दौरान अभिभावकों की भूमिका

छुटिटयों के दौरान अभिभावक क्‍या- क्‍या करें।

गर्मियों की छुटिटयां ही एक ऐसा मौका होता है, जब बच्चे अपनी बोरिंग लाइफ जैसे क्लासरूम, किताबे, परिक्षा, होमर्वक इत्यादि से छुटकारा पाते है। इन छुटिटयों को सही तरीके से व्यवस्थित कर इन छुटिटयों की मस्ती को और भी बढ़ाया जा सकता है। ताकि स्‍कूल जाने वाले बच्चे इन छुटिटयों का पूरा-पूरा आनंद ले सके।
गर्मियों की छुटिटयों के दौरान बहुत सी बाते है, जो बच्चे करना पंसद करते है, जैसे- ज्यादा देर तक सोना, देर रात तक पिक्चार देखना, लगातार टीवी देखना, दोस्तों से गप्पे  मारना, अपने गांव जाना, रात को कार्ड खेलना इत्यादि। अभिभावको को यह बात समझनी चाहिए कि आपके बच्चे के लिए यह सब करने की यह सही उम्र है। और अभिभावको को कोशिश करनी चाहिए कि हर एक्टीविटी आपके बच्चे को कुछ सिखाए।

छुटिटयों के समय बच्चों की जरूरत यह होती है कि वह जीवन के नये उददेश्यों की खोज करें, जैसे- समर क्ला‍स, परिवार के साथ कही घूमने जाना या स्कूल प्रोजेक्ट बनाना इत्यादि। गर्मियों की छुटिटयां बच्चों को मौका देती है कि वह विभिन्न रोचक एक्टिविटी के द्वारा अपना सामान्य ज्ञान बढ़ा सके। इस तरह की एक्टिविटी ना सिर्फ उनका आत्मिविश्वास और ज्ञान बढ़ाते है बल्कि आने वाले जीवन में उनके काम भी आते है।     

अभिभावकों के लिए छुट्टियों के मंत्र
 
•    हमेशा अपने बच्चे के साथ रहें और उनके साथ मस्ती करें, कोशिश करें उनके बचपन को जीने की।

•    बच्चों के साथ खेले और उनके साथ टीवी भी देखे।

•    उनकी सफलता और असफलता दोनों में उनके साथ रहें और उनका आत्मविश्वास बढ़ाए।

•    लोगों के सामने अपने बच्चें को हतोत्साहित ना करें।

•    अपने बच्चे के साथ साकारात्मक सोच अपनाएं।

•    कभी भी अपने बच्चे को किसी दबाब में ना रखें।

•    अपने बच्चे को उनके प्रोजेक्ट बनाने में मदद करें, साथ ही उसे और रोचक बनाए।

•    बच्चों को समर क्लास में जाने के लिए प्रोत्साहित करें, और उनकी तैयारी कराए चाहे वह डांस, संगीत, पियानो, वाइलन, कैशियो , गिटार, तैराकी, ऐरोबीक, जूडो, स्केटिंग या कुछ भी करना चाहते हो।


•    उनके प्राइवेसी का भी पूरा ख्याल रखें।

•    अपने बच्चों की बातों को ध्यान से सुने कि वह आपसे क्या कहना चाहते है।

•    कोशिश करें कि कम से कम एक समय का खाना अपने बच्चे के साथ जरूर खाएं।

•    जब आपका बच्चा अलग सा व्यवहार करें, तब शांत रहें और गुस्सा ना करें।

•    अपने बच्चे को यह अहसास करवाएं कि वह आपके लिए खास है और ऐसा आप उसे गले लगा कर, चूम कर या कोई खिलौना देकर कर सकते है।

•    अपने बच्चे को प्यार करें, जैसा वह है, इसलिए नहीं कि जैसा आप उसे बनाना चाहते है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK