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बच्चे का नहीं लगता पढ़ने में मन, तो इन तरीकों से कराएं फोकस

परवरिश के तरीके By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Nov 28, 2018
बच्चे का नहीं लगता पढ़ने में मन, तो इन तरीकों से कराएं फोकस

आजकल बच्चे इंटरनेट की दुनिया में इतने मस्त हैं कि उनका पढ़ने में मन ही नहीं लगता है। अगर आपका बच्चा पढ़ता नहीं है तो आपको उसे डांटने के बजाय प्यार से पेश आना चाहिए। 

आजकल बच्चे इंटरनेट की दुनिया में इतने मस्त हैं कि उनका पढ़ने में मन ही नहीं लगता है। अगर आपका बच्चा पढ़ता नहीं है तो आपको उसे डांटने के बजाय प्यार से पेश आना चाहिए। बच्चों के दिमागी विकास और उन्हें बुद्धिमान बनाने के लिए बच्चों के साथ छोटे-छोटे दिमागी खेल खेलें। पहले उन्हें विस्तार से खेल का तरीका बताएं फिर उनके साथ बच्चा बनकर ही खेलें और गलती होने पर उन्हें अवश्य बताएं। बहुत से माता-पिता की आदत होती है कि वो बच्चों पर छोटी छोटी बातों पर चिल्लाते रहते हैं। आपको अपनी इस आदत को छोड़ने की जरूरत है। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार न केवल आप दोनों के संबंध को अच्छा बनाएगा बल्कि बच्चे के विकास में भी सहायक होगा।

बच्चों के लिए ये टिप्स अपनाएं

  • अमरीका में हुए एक अध्ययन के मुताबिक़ दोपहर में खाना खाने के बाद क़रीब एक घंटे की नींद लेने से बच्चों की याददाश्त बढ़ती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाच्युसेट्स के शोधकर्ताओं के मुताबिक दिमाग़ को मज़बूत बनाने और सीखने के लिए दोपहर की नींद बेहद अहम है।
  • वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक जो महिलाएं अपने नवजात बच्चे के प्रति ज्यादा शिष्ट रहती हैं उनके बच्चों के दिमाग के हिप्पोकेंपस क्षेत्र में ज्यादा नर्व कोशिकाएं बनती हैं जिससे बच्चे का दिमाग तेज होता है।
  • यह उन बच्चों के लिए अच्छा है, जिन्हें गिनती आती है। अपने बच्चे को 1 से 20 तक गिनती में बीच-बीच में कोई अंक छोड़ दें और उसे उन मिसिंग नंबर के बारे में जानने को कहें। इससे उनके मनोरंजन के साथ दिमागी विकास भी होगा।
  • यह छोटे बच्चों के लिए बहुत अच्छा है। अपने बच्चे के सामने कोई शब्द बोलें और उसे उस शब्द का अपोजिट बताने के लिए कहें। पर यह खेल खेलते हुए इस बात का ध्यान रखें कि ऐसे शब्द बोलें जिसे वे समझ सकें।

बच्चों पर कभी चिल्लाएं नहीं

शायद ही कोई माता-पिता हों, जिन्हें अपने बच्चों पर चिल्लाना न पड़ता हो। बच्चों की शरारत, जिद, बात न मानना या फिर उनकी कोई गलती करना, गाहे-बगाहे आपको मौका दे ही देता है कि आप उन पर गुस्से से चिल्लाएं। बच्चों के साथ आपके इस व्यवहार का कारण हमेशा बच्चे ही हों ये जरूरी नहीं है। कई बार दफ्तर की फ्रस्ट्रेशन, माता-पिता के आपसी रिश्तों में खटास, थकान से पैदा हुआ चिड़चिड़ापन या फिर खराब स्वास्थ्य ऐसे कारण बन जाते हैं, जिनका गुस्सा हम बच्चों पर उतार देते हैं। लेकिन बच्चों पर चिल्लाने से आपके और आपके बच्चों के आपसी संबंध खराब हो सकते हैं। इसके साथ साथ आपकी इस आदत का बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। 

अगर आप वर्किंग वुमन और मॉम साथ में हैं तो ऐसा लगभग रोज होता होगा कि आप अपने ऑफिस के लिए तैयार होते होते अपने बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करती होंगी। ये बहुत मुश्किल काम है, खासतौर पर तब जब बच्चे छोटे हों। ऐसे में जब बच्चे आपके निर्देशों को मानकर ठीक से तैयार नहीं होते और साथ ही आप को देरी होने लगती है तो आप उनपर चिल्ला देती होंगी। इससे बचने का एक आसान तरीका ये है कि बच्चों के जागने से कुछ देर पहले उठें। अपनी तैयारी कर लें फिर बच्चों को तैयार होने में मदद करें। या फिर पहले बच्चों को तैयार करवा दें, उन्हें नाश्ता करने दें, और उस दौरान आप तैयार हो जाएं। प्लानिंग से आप इस दिक्कत का सामना कर पाएंगी।

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