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सीने में दर्द और जलन का कारण हो सकता है 'प्लूरिसी' रोग, फेफड़ों की झिल्लियों में हो जाता है इंफेक्शन

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 28, 2018
सीने में दर्द और जलन का कारण हो सकता है 'प्लूरिसी' रोग, फेफड़ों की झिल्लियों में हो जाता है इंफेक्शन

सीने में जलन हो या दर्द, हमारा ध्यान दिल की बीमारी (खासकर हार्ट अटैक) की तरफ जाता है। मगर ऐसा फेफड़े के रोग (प्लूरिसी) के कारण भी हो सकता है। प्लूरिसी फेफड़ों की झिल्लियों में होने वाला इंफेक्शन है, जो खतरनाक हो सकता है।

सीने में दर्द और जलन हो, तो ये सिर्फ हार्ट अटैक या दिल की बीमारी का संकेत नहीं होता है, बल्कि कई बार फेफड़ों की बीमारी के कारण भी ऐसा हो सकता है। प्लूरिसी फेफड़ों से संबंधित रोग है। हमारे फेफड़ों की सुरक्षा के लिए उन पर पतली झिल्ली का दोहरा खोल चढ़ा होता है। इन झिल्लियों को प्लूरा कहते हैं। इसकी एक तह फेफड़ों के बाहरी भाग पर चढ़ी रहती है और दूसरी तह पसलियों के भीतरी भाग पर। इन्हीं झिल्लियों में होने वाले संक्रमण को प्लूरिसी कहते हैं। इस संक्रमण के कारण झिल्लियों में सूजन आ जाती है। इन दोनों झिल्लियों के बीच द्रव की एक पतली पर्त होती है जो इन्हें चिकनाहट प्रदान करती है। इस रोग के कारण इन झिल्लियों में सूजन आ जाती है और ये अपेक्षाकृत मोटी हो जाती हैं। इस वजह से दोनों झिल्लियां आपस में टकराने लगती हैं। इस टकराहट के कारण झिल्लियों के बीच का द्रव एक जगह ठहरने लगता है और जमने लगता है। इसके कारण रोगी को छाती में तेज जलन और दर्द महसूस होता है जो कभी-कभी असहनीय हो सकता है।

क्या हैं रोग के लक्षण

चूंकि ये रोग फेफड़ों से संबंधित है इसलिए इस रोग के कारण मरीज को सांस लेने, छींकने और खांसने में बहुत परेशानी होती है। इस रोग का सबसे आम लक्षण सीने में तेज दर्द और जलन है, जिसके कारण छींकने और खांसने में तेज दर्द होता है। प्लूरिसी के कारण सांस लेने और छोड़ने में भी तकलीफ होती है और दर्द महसूस होता है। इस रोग के कारण छाती भारी लगने लगती है और खांसने के दौरान मुंह से कुछ गंदे पदार्थ भी निकल सकते हैं। इसके अलावा बुखार आना, भूख न लगना और शरीर का वजन तेजी से कम होने लगना आदि प्लूरिसी के लक्षण हैं।

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प्लूरिसी रोग के कारण

प्लूरिसी में तीन तरह से सूजन आ सकती है- शुष्क प्लूरिसी, नम प्लूरिसी और एम्पाइमा प्लूरिसी। फेफड़े में बैक्टीरियल इंफेक्शन या छाती की मांसपेशियों में वायरल संक्रमण शुष्क प्लूरिसी के कारण होता है। कई बार फेफड़ों की टीबी, फेफड़े का  ट्यूमर जैसे रोग होने पर खून की सप्लाई रुक जाने से भी प्लूरा की तहों में सूजन आ जाती है। नम प्लूरिसी तब होती है जब प्लूरिसी में पानी भर जाता है। टीबी के कारण प्लूरा में पानी भर जाता है। इसके अलावा निमोनिया, ट्यूमर, कैंसर के कारण भी प्लूरा प्रभावित हो सकती है। पेट के अंदरूनी अंगों में सूजन होने पर भी ये तकलीफ हो सकती है। दिल, गुर्दे और जिगर में से किसी एक के ठीक से काम न करने पर भी प्लूरा में पानी भर सकता है। इसके अलावा एम्पाइमा होने पर प्लूरिसी में खून इक्ट्ठा हो जाता है। चोट से प्लूरा में खून एकत्र होने व संक्रमण हो सकता है।

सही समय पर इलाज जरूरी

प्लूरिसी रोग खतरनाक और जानलेवा होता है इसलिए इसका सही समय पर इलाज जरूरी है। सीने में तेज जलन, दर्द, चुभन आदि को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। पेट के किसी भाग में कोई सूजन समझ आए या भूख न लगे और छाती भारी लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उचित सलाह लें। छाती के एक्स-रे या अल्ट्रासांउड में प्लूरा में पानी और मवाद के लक्षण दिख जाते हैं। अगर अल्ट्रासाउंड में प्लूरिसी रोग का पता चलता है तो इसका सही कारण जानने के लिए छाती के अंदर से सुई के माध्यम से नमूना निकालकर जांच की जाती है।

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घरेलू इलाज

प्लूरिसी के लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लेकिन इसके दर्द से तत्काल राहत के लिए कुछ घरेलू नुस्खों की मदद ली जा सकती है। दर्द से राहत के लिए गरम पानी से सिंकाई या इलैक्ट्रिक हीटिंग पैड असरकारी है। अगर आप नियमित श्वासन से जुड़े व्यायाम करते हैं तो प्लूरिसी होने का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है क्योंकि इससे फेफड़े को खुलने में मदद मिलती है।

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