नौकरी बदलना है तरक्की का मूलमंत्र

    नौकरी बदलना है तरक्की का मूलमंत्र

    तरक्‍की पाने का अगर कोई मूल मंत्र मिल जाये तो इससे अच्‍छा क्‍या होगा। वाकई में तरक्‍की पाने के लिए आपका निरंतर कार्यरत होना आवश्‍यक होता है। या फिर कुछ और है जीवन में सफलता पाने का तरीका।

    एक वह भी दौर था जब व्‍यक्ति किसी कंपनी से जुड़ता और आखिर तक वहीं काम करता रहता। आखिर में उसी से रिटायर हो जाता। ऐसे वयक्ति को काफी ईमानदार और भरोसे वाला माना जाता था। वह बड़े फख्र से बताता कि अमुक कंपनी में मैंने 25 साल गुजार दिये हैं। वहीं से रिटायर हुआ हूं। और भी न जाने क्‍या-क्‍या। तब उसी कंपनी में मिलने वाली तरक्‍की से वह खुश रहता। लेकिन, आज जमाना दूसरा है। लगातार एक ही कंपनी में काम करते रहने का आज की दुनिया में पिछले जमाने की सोच का हिस्‍सा माना जाता है।

     

    करियर में आगे बढ़ने का मूल मंत्र है नया सीखते रहिये। और जो व्‍यक्ति लगातार एक ही कंपनी में काम करता रहता है, उसके लिए माना जाता है कि वह नया सीखने को तैयार नहीं। वह जोखिम उठाने को तैयार नहीं। वह उसी दायरे में खुश है जो उसे दिया गया है। ऐसा व्‍यक्ति भले ही अपने काम को लेकर कितना ही आश्‍वस्‍त क्‍यों न हो, लेकिन बाजार के जानकारों की नजर में उस व्‍यक्ति के अंदर नया सीखने और करने की क्षमता और उत्‍साह का अभाव होता है।

     

    success

    वैश्‍विक सर्वे भी इस बात की तस्‍दीक करते हैं कि लगातार आगे बढ़ने के लिए एक निश्‍चित समय के बाद नौकरी छोड़ देनी चाहिए। इससे आप आगे के लिए तैयार होते रहते हैं। जानकार मानते हैं कि जब आपको यह अहसास होने लगे कि अमुक नौकरी अथवा कंपनी में कुछ नया सीखने को नहीं बचा है, तभी वह वक्‍त होता है कि आप नयी नौकरी के बारे में गंभीरता से विचार करना शुरू कर दें।

     

    करियर में तरक्की का मूल मंत्र क्या है? जब यह सवाल एक वैश्विक सर्वेक्षण में भारत के नौकरीपेशा युवाओं से पूछा गया, तो अधिकांश ने कहा कि जल्दी-जल्दी कंपनी बदलते रहना ही तरक्की का सटीक फार्मूला है।

     

    दुनिया में सर्वाधिक 56 फीसदी भारतीय नौकरीपेशा युवाओं ने कहा कि करियर में तरक्की के लिए अच्छा तरीका, मौका देखकर 'स्विच' करना [कंपनी बदल देना] है। सर्वे में दुनिया के चुनिंदा देशों के 25 से 35 साल के आयुवर्ग के नौकरीपेशा युवाओं से राय जानी गई। नौकरी बदल कर तरक्की पाने की सोचने वाले युवाओं का आंकड़ा अमेरिका में 43 फीसदी, ब्रिटेन में 41 फीसदी, ब्राजील में 39, चीन में 38 और जर्मनी में 37 फीसदी रहा। सर्वे में, एक ही संस्थान में नौकरी करते रहने और इसी से संतुष्ट रहने वाले युवाओं का प्रतिशत भारत में सबसे कम निकलकर आया। यही हालात चीन में भी हैं।

     

    नवंबर 2009 से जनवरी 2010 के बीच कराए गए इस अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि करियर में तरक्की और बेहतर बदलाव के लिए युवाओं में मुख्य रूप से सात कारक प्रेरक का काम करते हैं। इनमें पहला, ज्यादा से ज्यादा कमाने की चाहत। दूसरा, बेहतर प्रदर्शन के लिए अपनी कार्यकुशलता और योग्यता में वृद्धि करना। तीसरा, ऊंचा ओहदा और रुतबा हासिल करना। चौथा, वरिष्ठता और नेतृत्व की भूमिका में आना। पांचवां, अन्य क्षेत्र की नौकरी पाने के लिए भी योग्यता हासिल करना। छंठा, एक बेहतर भविष्य के लिए पुख्ता रास्ता तैयार करना और सातवां, बेहतर करियर के लिए एक विकल्प हमेशा तैयार रखना।

    success and job

    अध्ययन में पाया गया कि इन कारकों में से पहला कारक यानी अधिक से अधिक कमाई करने की चाहत, दुनियाभर के युवाओं को जल्द से जल्द नौकरी बदलने और सदैव अवसर की तलाश में रहने के लिए प्रेरित करता है। इस मामले में ब्रिटेन के युवाओं का सोचना हालांकि कुछ अलग है। ब्रिटिश युवा बेहतर प्रदर्शन के लिए अपनी कार्यकुशलता और योग्यता में वृद्धि करने पर जोर देते हैं।

     

    Image Courtesy- Getty Images


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