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छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है 'चांदीपुरा वायरस', गुजरात में 5 साल की बच्ची की मौत

लेटेस्ट By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jul 18, 2019
छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है 'चांदीपुरा वायरस', गुजरात में 5 साल की बच्ची की मौत

चांदीपुरा वायरस एक खतरनाक वायरस है, जो 14 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। वायरस से प्रभावित होने के 2-3 दिन बाद ही बच्चे कोमा में चले जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। गुजरात में मंगलवार को एक 5 साल की बच्ची की मौत चांदीपुरा वायरस इंफ

क्या आपने 'चांदीपुरा वायरस' के बारे में सुना है? ये एक तरह का खतरनाक वायरस है, जो छोटे बच्चों को प्रभावित करता है और उन्हें बीमार बना देता है। चांदीपुरा वायरस के कारण बीते मंगलवार गुजरात में एक 5 साल की बच्ची की मौत हो गई। इसके पहले भी ये खतरनाक वायरस 2 बच्चों की जान ले चुका है। खतरनाक वायरस से प्रभावित 2 बच्चों का अभी भी इलाज चल रहा है। चांदीपुरा एक ऐसा खतरनाक वायरस है, जो छोटे बच्चों को ही अपना शिकार बनाता है। आज हम आपको बता रहे हैं क्या है खतरनाक चांदीपुरा वायरस, इसके लक्षण और बचाव के तरीके।

क्या है चांदीपुरा वायरस? (Chandipura Virus)

चांदीपुरा वायरस एक खतरनाक वायरस है, जो बच्चों के दिमाग में सूजन पैदा कर देता है, जिसे बच्चों में पहले फ्लू के लक्षण नजर आते हैं और थोड़े समय में ही वे कोमा में चले जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। इस वायरस का नाम महाराष्ट्र के एक गांव 'चांदीपुरा' के मान पर पड़ा। यही वो गांव है, जहां पहली बार 1965 में इस वायरस से बीमार बच्चों के मामले पाए गए थे। आमतौर पर ये वायरस 14 साल से छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाता है।

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क्या है चांदीपुरा वायरस के फैलने का कारण?

चांदीपुरा वायरस आमतौर पर सैंड फ्लाई (बड़मक्खी) या मच्छरों के कारण फैलता है। सैंड फ्लाई मक्खियों की एक ऐसी प्रजाति है, जो रेत और कीचड़ में पाई जाती हैं और बारिश के दौरान काफी बढ़ जाती हैं। मगर मैदानी इलाकों में भी चांदीपुरा वायरस का खतरा होता है क्योंकि मच्छर भी इस वायरस को फैला सकते हैं। जानवरों पर की गई रिसर्च बताती है कि ये वायरस रोगी के न्यूरॉन्स (तंत्रिकाओं) पर हमला करता है और उन्हें नुकसान पहुंचाता है, जिसके कारण व्यक्ति के दिमाग में सूजन आ जाती है।

चांदीपुरा वायरस के लक्षण (Symptoms of Chandipura Virus)

चांदीपुरा वायरस से प्रभावित होने पर बच्चे में निम्न लक्षण दिख सकते हैं-

  • अचानक तेज बुखार आना और सिर दर्द होना
  • मितली होना और लगातार उल्टियां होना
  • कमजोरी के कारण बेहोशी छा जाना

चांदीपुरा वायरस की जांच

चांदीपुरा वायरस के बारे में अभी चिकित्सक ज्यादा परिचित नहीं हैं, मगर फिर भी लक्षणों के आधार पर डॉक्टर रोगी के खून की जांच (Blood Test) करवा सकते हैं। गुजरात से प्राप्त खून के सैंपल्स को NIV पुणे भेज दिया गया है, जहां से रिजल्ट आने में 10-15 दिन लग जाएंगे।

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चांदीपुरा वायरस से बचाव के टिप्स और इलाज (Treatment of Chandipura Virus Infection)

चांदीपुरा वायरस के लिए अभी कोई स्पेशल इलाज नहीं है। चूंकि ये वायरस खतरनाक है और इसके लक्षण इंसेफ्लाइटिस (दिमागी बुखार) से मिलते-जुलते हैं, इसलिए ऊपर बताए गए लक्षण दिखने पर रोगी को जितनी जल्दी अस्पताल में भर्ती करवाया जाए, उतना अच्छा है। चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए जरूरी है कि मच्छर और मक्खियों से बचा जाए और खाने-पीने में स्वस्थ चीजों का सेवन किया जाए। बारिश के मौसम में खुले में मिलने वाले आहारों में मक्खियां बैठ जाती हैं, जिससे ये आहार भी आपको इस जानलेवा रोग का शिकार बना सकते हैं। इस वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई और सावधानी ही जरूरी है।

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