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सर्वाइकल कैंसर और प्रेग्नेंसी

कैंसर By रीता चौधरी , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 30, 2012
सर्वाइकल कैंसर और प्रेग्नेंसी

ज्यादातर महिलाएं सर्वाइकल कैंसर के होने पर अपना आत्मविश्‍वास खो देती है उन्हें लगता है कि अब वो कभी मां नहीं बन सकती, लेकिन ऐसा नहीं है।

सर्वाइकल कैंसर आज के दौर में महिलाओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी बन चुकी है। ज्यादातर महिलाएं सर्वाइकल कैंसर के होने पर अपना आत्मविश्‍वास खो देती है उन्हें लगता है कि अब वो कभी मां नहीं बन सकती, लेकिन ऐसा नहीं है। कई मामलों में आप दोबारा मां बन सकती है। लेकिन ये आपके कैंसर के स्टेज पर निर्भर करता है, कि आपका कैंसर किस स्टेज में है।

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सर्वाइकल कैंसर के स्टेज

•    स्टेज 0

स्टेज 0 कैंसर सतही परत तक ही सीमित रहता है। ऐसे में कैंसर सर्विक्स एपिथीलियम तक सीमित रहता है।

•    स्टेज 1

स्टेज 1  कैंसर सर्विक्स तक सीमित रहता है।

•    स्टेज 2

स्टेज 2 कैंसर सर्विक्स (ग्रीवा) से आगे फ़ैल जाता है, लेकिन ये पैल्विक दीवार या योनि के निचले भाग तक नहीं पहुँचता है।

•    स्टेज 3
 
स्टेज 3 कैंसर पैल्विक दीवार, योनि के निचले भाग या यूरेटर के अंदर तक फैल जाता है।

•    स्टेज 4

जब कैंसर पैल्विक दीवार, योनि के निचले भाग या यूरेटर के अंदर तक फैल जाता है, तो ये कैंसर का स्टेज 4 कहलाता है।

•    स्टेज 5

स्टेज 5 कैंसर पेल्विस से आगे तक फैल जाता है या मूत्राशय या रेक्टम या दोनों में एक साथ फैल जाता है।

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स्टेज 0 और स्टेज 2 का इलाज करते समय आपका डॉक्टर इस बात पर भी ध्यान देता है कि यदि आप बच्चा पैदा करना चाहती हैं, तो आप ऐसा करने में सक्षम रहें। डॉक्टर यह कोशिश करता है कि सर्वाइकल  कैंसर के स्टेज 0 या स्टेज 2 के इलाज को गर्भावस्था के दौरान से लेकर प्रसव के बाद तक के लिए रोक दिया जाए।

 


स्टेज 0 कैंसर से पीड़ित महिला जो गर्भवती होना चाहती है, उसका इलाज आमतौर पर इनमें से किसी एक तरीके से किया जाता है:

1.    लेजर सर्जरी के जरिए, जिसमें सतही ऊतक की परत को गर्म और वाष्पीकृत किया जाता है।

2.    क्रायोसर्जरी के जरिए, जिसमें एपिथीलियल ऊतक को जमाया जाता है।

3.    कोनिजेशन के जरिए, जिसमें ग्रीवा ऊतक के एक शंकु को शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया जाता है। कोनिजेशन स्टेज 2 कैंसर से ग्रस्त उन महिलाओं के लिए किया जा सकता है जो गर्भधारण करने की सोच रही हैं।

4.    लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्स्सिजन प्रक्रिया (एलईईपी), जिसमें कम वोल्टेज, उच्च आवृत्ति रेडियो तरंगों को तार की एक पतली पाश, जिसका उपयोग सर्विक्स में से असामान्य कोशिकाओं को हटाने के लिए एक काटने वाले उपकरण के रूप में किया जाता है, के बीच से गुज़ारा जाता है।

इन प्रक्रियाओं के बाद, असामान्य कोशिकाओं की जांच के लिए एक साल तक लगभग हर चार महीने के बाद और दूसरे साल में हर छह महीने के बाद एक पैप परीक्षण किया जाता है।


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वे महिलायें जो गर्भधारण के बारे में नहीं सोच रही हैं, उनमें स्टेज 2 में न्यूनतम घातक कैंसर का इलाज हिस्टेरेक्टोमी के जरिए किया जाता है। यह प्रक्रिया कैंसर को निकाल देती है और इसे वापस आने से रोकती है। अंडाशय अपनी जगह पर रहता हैं इसलिए हार्मोन कार्यशीलता सामान्य रहती है।

बड़ी स्टेज 2 और स्टेज 4 कैंसर के लिए या तो रेडिकल हिस्टेरेक्टोमी (गर्भाशय, सर्विक्स के साथ-साथ अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और पेल्विस में रीजनल लिम्फ नोड्स को भी हटाना) या कीमोथेरेपी के साथ लेजर इलाज की जरूरत होती है। ऑपरेशन और लेजर चिकित्सा के बीच का चुनाव महिला की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, और इसके साथ ही हानिकारक प्रभावों या जटिलताओं पर भी निर्भर करता है। स्टेज 3 और स्टेज 4 कैंसर का इलाज लेजर द्वारा किया जाता है।

 

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