Subscribe to Onlymyhealth Newsletter
  • I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण और लक्षण

दर्द का प्रबंधन By Rahul Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 25, 2014
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण और लक्षण

ऑस्टियोपोरोसिस अर्थात हड्डियों का कमजोर होना ऐसी समस्या है, अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ होने लगती है। ये पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है।

Quick Bites
  • ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।  
  • यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होता है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण जल्दी दिखाई नहीं देते हैं।
  • इसका पता करने के लिए बीएमडी टेस्ट किया जाता है।

ऑस्टियोपोरोसिस अर्थात हड्डियों का कमजोर होना ऐसी समस्या है, जिसका उम्रदराज लोगों को अधिक सामना करना पड़ता है। 50 साल की उम्र के बाद हर तीन में एक महिला को यह समस्या होती है। ये समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। आंकड़े बताते हैं कि पूरी दुनिया में हर तीन में से एक महिला और हर पांच में से एक पुरुष को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण फ्रैक्चर होने का जोखिम बना रहता है। इसलिए इस समस्या के बारे में तथा इससे बचाव के तरीकों के बारें में जानकारी होना बेहद जरूरी हो जाता  है। तो चलिये विस्तार से जानें ऑस्टियोपोरोसिस के कारण और लक्षण और इससे बचाव के तरीके।

 

Symptoms of Osteoporosis in Hindi

 

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

ऑस्टियोपोरोसिस का शाब्दिक अर्थ पोरस बोन्स है। अर्थात ऐसी बीमारी, जिसमें हड्डियों की गुणवत्ता और घनत्व कम होता जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण सामान्यत: जल्दी दिखाई नहीं देते हैं। दरअसल हमारी हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स से बनी होती हैं। लेकिन अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ ये मिनरल नष्ट होने लगते हैं, जिस  वजह से हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और वे कमजोर होने लगती हैं। कई बार तो हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि काई छोटी सी चोट भी फ्रैक्चर का कारण बन जाती है। गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ के मुताबिक महिलाओं में हीप फ्रेक्चर (कुल्हे की हड्डी का टूट जाना) की आशंका, स्तन कैंसर, यूटेराइन कैंसर तथा ओवरियन कैंसर जितनी ही है।

क्या है कारण

ऑस्टियोपोरोसिस होने के कई कारण होते हैं, जिनमें प्रमुख कारण के रूप में आनुवंशिक, प्रोटीन की कमी, विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, व्यायाम न करना, बढ़ती उम्र, धूम्रपान, डायबिटीज, थाइरॉयड तथा शराब का सेवन आदि शामिल होते हैं। इसके अलवा दौरे की दवाओं तथा स्टेरॉयड आदि के सेवन से भी कभी-कभी ये समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक पीने, ज्यादा नमक खाने तथा महिलाओं में जल्दी पीरियड्स खत्म होने से भी इस बीमारी को पांव पसारने का मौका मिल सकता है।

 

Symptoms of Osteoporosis in Hindi

 

क्या हैं लक्षण

यूं तो आरंभिक स्थिति में दर्द के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ खास लक्षण नहीं दिखाई देते, लेकिन जब अक्सर कोई मामूली सी चोट लग जाने पर भी फ्रैक्चर होने लगे, तो यह ऑस्टियोपोरोसिस का बड़ा संकेत होता है। इस बीमारी में शरीर के जोडों में जैसे रीढ़, कलाई और हाथ की हड्डी में जल्दी से फ्रैक्चर हो जाता है। इसके अलावा बहुत जल्दी थक जाना, शरीर में बार-बार दर्द होना, खासकर सुबह के वक्त कमर में दर्द होना भी इसके लक्षण होते हैं। इसकी शुरुआत में तो हड्डियों और मांसपेशियों में हल्का दर्द होता है, लेकिन फिर धीरे-धीरे ये दर्द बढ़ता जाता है। खासतौर पर पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में हल्का सा भी दबाव पड़ने पर दर्द तेज हो जाता है। क्योंकि ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती दौर में अक्सर पता नहीं लग पाता, इसलिए इसके जोखिम से बचने के लिए पचास साल की आयु के बाद डॉक्टर नियमित अंतराल पर एक्स-रे कराने की सलाह देते हैं, ताकि इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके।

बीमारी हो जाने पर क्या करें

ऑस्टियोपोरोसिस होने पर जंपिंग और स्किपिंग जैसी भारी एक्सरसाइज करना संभव नहीं होता। तो ऐसे में वॉक, एरोबिक्स, डांस तथा लाइट स्ट्रेचिंग करें। इसके अलावा योग भी ऑस्टियोपोरोसिस में अराम पहुंचाता है। जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव लाएं। क्योंकि निष्क्रिय जीवनशैली ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी के खतरे को और भी ज्यादा बढ़ा देती है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रहें। पोष्टिक आहार लें, जिनमें कैल्शियम और विटामिन डी भरपूर मात्रा में हो। दूध से बने उत्पाद कैल्शियम के अच्छे श्रोत होते हैं, इनका सेवन करें।


ऑस्टियोपोरोसिस की जांच के लिए बीएमडी टेस्ट अर्थात बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट भी कराया जाता है। डॉक्टर मानते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद हर तीन वर्ष में एक बार बोन डेंसिटी टेस्ट करा लेना चाहिए। एक बात और, बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने वाले व एथलीट आदि की बोन डेंसिटी कम होने का खतरा रहता है, इसलिए इन्हें अपने खान-पान पर खास ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा आयुर्वेद व होम्योपैथी भी इसके इलाज में कारगर होती है।

Written by
Rahul Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागSep 25, 2014

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

More For You
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK