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बारिश में बढ़ जाता है एलर्जी का खतरा, सिर और हाथ-पैरों में दर्द हैं इसके लक्षण

विविध By Rashmi Upadhyay , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 08, 2019
बारिश में बढ़ जाता है एलर्जी का खतरा, सिर और हाथ-पैरों में दर्द हैं इसके लक्षण

सर्दियों का मौसम जब करवट लेता है यानि कि इसके ठंड के साथ कुछ बदलाव होते हैं तो यह कई परेशानियों का सबब बनता है। जब सर्दी में बारिश होती है तो इससे एलर्जी होने का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। जो लोग सेंसटिव होते हैं या थोड़े कमजोर होते हैं उन्हें ए

सर्दियों का मौसम जब करवट लेता है यानि कि इसके ठंड के साथ कुछ बदलाव होते हैं तो यह कई परेशानियों का सबब बनता है। जब सर्दी में बारिश होती है तो इससे एलर्जी होने का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। जो लोग सेंसटिव होते हैं या थोड़े कमजोर होते हैं उन्हें एलर्जी अपनी गिरफ्त में जल्दी लेती है। हर इंसान अलग होता है और उसे अलग तरह से एलर्जी होती है। जब एलर्जी का स्तर बढ़ जाता है या जो लोग अक्सर एलर्जी का शिकार होते हैं उन्हें एलर्जी अटैक आने का भी खतरा रहता है। हालांकि एलर्जी होने के कई कारण होते हैं। इस मौसम में अपने घर को कीटाणु-मुक्त रखने की कोशिश करें, क्योंकि ज्य़ादातर एलर्जी के कीटाणु घर में ही मौजूद होते हैं। आज हम एलर्जी होने के कारण और इससे बचने के कुछ उपाय बता रहे हैं।

क्या है एलर्जी होने का कारण

हमारे घरों में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जिनका ध्यान रख आप अपने बच्चे को एलर्जी से बचा सकती हैं। घर में रहने वाली धूल व मिट्टी एलर्जी का मुख्य कारण होती है। ये कण फर वाले खिलौनों व बिस्तर पर भी मिलते हैं। अपने बच्चे के लिए जितनी भी तरह के प्रसाधन इस्तेमाल कर रही हैं जैसे साबुन, क्रीम व पाउडर उनमें किसी प्रकार के रसायन न हों यह ध्यान रखें। बच्चे की स्किन बहुत सेंसटिव होती है, उसे एलर्जी भी बहुत जल्दी होती है। बच्चे की हाइजीन व सफाई का ध्यान बहुत ज्यादा रखने से भी बच्चे अति संवेदनशील हो एलर्जिक हो जाते हैं। धूल-मिट्टी में पलने वाला बच्चा ज्यादा स्वस्थ रहता है क्योंकि उसे बचपन से मिट्टी के संपर्क में आने वाले बैक्टीरिया से पहचान होती है। उसका इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाता है।

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ये भी हो सकती है वजह

एलर्जी फैलाने वाले बैक्टीरिया एस्थमा के रोगियों को सर्वाधिक परेशान करते हैं। इसके अलावा ठंड के मौसम में दरी, कंबल, कार्पेट या रजाई में बैक्टीरिया बहुत पनपते हैं। घर में पेट्स हैं तो उनके बालों के जरिए भी ये बैक्टीरिया इधर-उधर फैलते हैं। पशुओं के बालों के अलावा उनके लार और मल-मूत्र में भी ये बैक्टीरिया होते हैं, जो जूतों, कपड़ों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

बदलता मौसम भी है कारण

धूल-मिट्टी के कणों, जानवरों के बालों या परफ्यूम आदि के इस्तेमाल से एलर्जी की आशंका ज्य़ादा रहती है। यूं तो ये सारी चीजें साल भर वातावरण में रहती हैं, लेकिन सर्दियों में ज्य़ादा सक्रिय हो जाती हैं। एक और वजह यह है कि सर्दियों में लोग घर बंद कर लेते हैं, ऊनी कपड़े पहनते हैं, कंबल-रजाई का इस्तेमाल करते हैं, साथ ही बंद घरों में हीटर का प्रयोग करते हैं। इनके कारण भी एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है। जैसे ही घर का वातावरण अनुकूल होता है, एलर्जी फैलाने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। इनकी वजह से सर्दी-जुकाम, आंखों में जलन या स्किन एलर्जी होने लगती है। यदि ये सब लक्षण एक ह$फ्ते से अधिक दिखें तो डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें।

एलर्जी से बचने के तरीके

  • सर्दी के मौसम में एलर्जी से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिकार क्षमता को बढ़ाएं। इसके लिये आप रोज़ाना सुबह-शाम एक चमच्च च्यवनप्राश खा सकते हैं और आंवला का सेवन कर सकते हैं। एलर्जी से निपटना मुश्किल तो है लेकिन यदि सावधानी बरतें तो इस परेशानी से बचा जा सकता है। 
  • घर में हवा की आवाजाही की पर्याप्त व्यवस्था हो। सर्दियों में कंबल, ऊनी कपड़ों, कार्पेट्स, सॉफ्ट टॉयज में छोटे-छोटे कीटाणु छिप कर बैठ जाते हैं। इसके अलावा कई बार लोग सर्दियों में घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर लेते हैं और रूम हीटर चलाते हैं। घर बंद रहने से धूप नहीं आ पाती और बैक्टीरिया भी पनपने लगते हैं। इसी की वजह से एग्जीमा की समस्या पनपती है।
  • सजावटी पौधे भी एलर्जी की वजह बन सकते हैं। यदि एलर्जी की समस्या है तो इस मौसम में इंडोर पौधों के बजाय आर्टिफिशियल पौधे कमरे में रखें। एलर्जी या एस्थमा के रोगियों को घर में कार्पेट्स या पेट्स रखने से बचना चाहिए। यदि कार्पेट बिछाते हों तो हफ्ते-दस दिन में एक बार इन्हें धूप में अवश्य सुखाएं।
  • घर में मौजूद पालतू जानवरों से संभव दूरी बनाएं। खासतौर पर तब जबकि आपको उनके बालों से एलर्जी है। पालतू पशुओं को अपने लिविंग रूम से दूर ही रखें। पालतू पशुओं को नियमित रूप से नहलाएं और उनके बाल अधिक बड़े न होने दें।
  • इसके अलावा घर को साफ सुथरा रखने के साथ-साथ जरूरी कीटनाशकों को भी इस्तेमाल करें ताकि मच्छर पैदा न हों।
  • घर में वूलन का कारपेट इस्तेमाल नहीं करें और सॉफ्ट टॉय जैसे टैडी बीयर आदि को साफ रखें।
  • अगर आप वूल के प्रति एलर्जिक हैं तो वूलन के ब्लेंकेट के बजाय बाज़ार में मौजूद ‘एक्रिलिक’ रजाई और सिंथेटिक तकियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • घर में प्रोपर वेंटिलेशन की व्यवस्था रखें।

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