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गले के कैंसर के लिए जिम्‍मेदार है तम्‍बाकू का सेवन और प्रदूषित वातावरण

कैंसर By Kriyanshu Saraswat , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Oct 09, 2013
गले के कैंसर के लिए जिम्‍मेदार है तम्‍बाकू का सेवन और प्रदूषित वातावरण

सिगरेट और तम्‍बाकू के सेवन के अलावा भी गले का कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं। गले का कैंसर होने के अन्‍य कारणों के बारे में जानने के लिए इस लेख को पढ़ें।

गले की कोशिकाओं में असामान्‍य वृद्धि कैंसर का प्रमुख कारण होता है। ज्‍यादातर लोग यह जानते हैं कि गले के कैंसर का प्रमुख कारण तम्‍बाकू और उससे बने उत्‍पाद होते हैं। लेकिन, क्‍या केवल तम्‍बाकू ही इस बीमारी का एकमात्र कारण है। जी नहीं, गले का कैंसर कई अन्‍य कारणों से भी हो सकता है।

causes of throat cancerमुंह और गले की कैंसर की समस्‍या महिलाओं के मुकाबले पुरुषों को ज्‍यादा होती है। दूसरा सबसे सामान्‍य कैंसर फेफड़ों का कैंसर है। गले के कैंसर की समस्‍या महानगरों में तेजी के साथ फैल रही है। सिगरेट और तम्‍बाकू का सेवन करने वाले तो इस बीमारी के संभावित शिकार होते ही हैं साथ ही परोक्ष धूम्रपान यानी पैसिव स्‍मोकिंग भी इस बीमारी का एक बड़ा कारण है। ऐसे लोग भी गले के कैंसर के आसान शिकार बन सकते हैं।


पहले यह कैंसर आमतौर पर उम्रदराज लोगों को होता था, लेकिन अब 20 से 25 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हालांकि इसके सबसे ज्‍यादा शिकार 40 से 50 वर्ष की उम्र के लोग हैं। समय पर पता चलने के बाद इसका उपचार संभव है। इसके उपचार में लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है। इस लेख के जरिए हम बात करते हैं गले के कैंसर के कारणों के बारे में।

 

गले के कैंसर के कारण

कैंसर कई तरह का होता है। किसी भी तरह के कैंसर के सटीक कारणों के बारे में बता पाना मुश्किल है। फिर भी कार्सिनोजंस जैसी कुछ चीजें कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देती हैं। यानी जो लोग स्मोकिंग करते हैं या किसी भी रूप में तम्‍बाकू का सेवन करते हैं, उन्हें मुंह और गले का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है।

 

तम्‍बाकू का सेवन

गले के कैंसर के अधिकतर मामलों में तम्‍बाकू का सेवन गले के कैंसर का प्रमुख कारण पाया गया है। धूम्रपान से भी कई प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ता है। तम्‍बाकू के सेवन और धूम्रपान से श्‍वास नली की कार्य प्रणाली पर विपरीत असर पड़ता है और इससे गले का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। बीड़ी इस मामले में सिगरेट के मुकाबले कहीं ज्यादा नुकसानदेह है। इसके अलावा गुटखा, पान मसाला और खैनी आदि के सेवन से भी कैंसर हो सकता है।

 

अल्‍कोहल का सेवन

कम मात्रा में अल्‍कोहल के सेवन से गले के कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता। ज्‍यादा मात्रा में शराब का सेवन कहीं न कहीं इस खतरे को बढ़ा देता है। अगर कोई व्‍यक्ति एल्‍कोहल के साथ धूम्रपान भी करता है, तो उसके इस रोग से ग्रस्‍त होने का खतरा अधिक होता है। अल्‍कोहल और निकोटिन साथ में लेने से मैलिग्‍नेंट कोशिकाएं बढ़ जाती हैं। यही कोशिकाएं आगे चलकर गले के कैंसर का कारण बनती हैं।

 

प्रदूषित वातावरण

प्रदूषित वातावरण भी गले के कैंसर का एक प्रमुख कारण है। गले के कैंसर की कोशिकाओं के पनपने में वातावरण में मौजूद इं‍डस्ट्रियल डस्‍ट, वुड डस्‍ट, कैमिकल डस्‍ट और रोड डस्‍ट के कण मुख्‍य होते हैं। सल्‍फर डाई ऑक्‍साइड, क्रोनियम और आर्सेनिक भी कैंसर की आशंका को बढ़ाते हैं।

 

टाइट बेल्‍ट बांधना

हाल में हुए एक स्कॉटिश शोध के अनुसार, जो लोग अधिक टाइट बेल्ट पहनते हैं, उन्हें सामान्‍य लोगों के मुकाबले गले का कैंसर होने की आशंका ज्‍यादा रहती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक टाइट बेल्ट पहनने वाले लोग एसिड रिफलक्स की समस्या से अधिक परेशान रहते हैं और उनके पेट का एसिड ऑस्फेगल ग्रंथि को प्रभावित करता है। इससे उन्हें गले के कैंसर का खतरा बना रहता है।

 

गले के कैंसर के लक्षण

कई बार गले के कैंसर के लक्षण आसानी से पहचान में नहीं आते। फिर भी कुछ लक्षण ऐसे ही, जिनके होने पर आप सचेत जो जाएं और तुरंत डॉक्‍टरी जांच करा लें। आवाज में बदलाव हो रहा है या आपको भारीपन महसूस हो रहा है तो आपको गले का कैंसर हो सकता है। इसके साथ ही मुंह से खून आने, गले में जकड़न होने, सांस लेने में तकलीफ होने या फिर खाना खाने में परेशनी होने पर भी गले के कैंसर की समस्‍या हो सकती है।


कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, समय से जानकारी ही इसका बचाव है। आजकल कैंसर के रोगियों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है। कैंसर होने का कोई एक कारण नहीं होता, यह परेशानी और भी कई कारणों से हो सकती है।

 

 

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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