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छोटे बच्चों को क्यों होती है हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या? जानें कैसे करें कंट्रोल

बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 14, 2019
छोटे बच्चों को क्यों होती है हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या? जानें कैसे करें कंट्रोल

हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों की समस्या को आमतौर पर बड़ी उम्र के लोगों की बीमारियां समझा जाता है। मगर आजकल छोटे-छोटे बच्चों और युवाओं में भी कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने की समस्याएं बहुत ज्यादा सामने आ रही हैं। अगर बच्चे के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की म

हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों की समस्या को आमतौर पर बड़ी उम्र के लोगों की बीमारियां समझा जाता है। मगर आजकल छोटे-छोटे बच्चों और युवाओं में भी कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने की समस्याएं बहुत ज्यादा सामने आ रही हैं। अगर बच्चे के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बचपन से ही ज्यादा है, तो बहुत कम उम्र में ही उसे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक या दिल की अन्य बीमारियों का खतरा रहता है। आइए आपको बताते हैं बच्चों में क्यों बढ़ रही है कोलेस्ट्रॉल की समस्या और कैसे कर सकते हैं इससे बचाव।

बच्चों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण

  • परिवार में अनुवांशिक रूप से हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या या दिल की बीमारियों की परंपरा हो, तो बच्चे को भी इसका खतरा होता है। कोलेस्ट्रॉल की समस्या मां-बाप से बच्चों में आ जाती है जिससे उन्हें छोटी उम्र में ही इस खतरनाक समस्या से जूझना पड़ता है।
  • कोलेस्ट्रॉल का अन्य कारण आजकल की जीवनशैली और खानपान है। बचपन से ही बहुत अधिक वसा युक्त और फास्ट फूड्स का सेवन, जिससे धमनियों (आर्टरी) में प्लाक जम जाता है।
  • मोटापे के कारण भी कई बार धमनियों में रक्त प्रवाह में परेशानी आती है, जिससे समस्या हो सकती है। खानपान की अनियमितता और जंक फूड्स, फास्ट फूड्स की वजह से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। मोटापे के कारण कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी बढ़ जाती है। इसलिए बच्चों को फास्ट फूड्स और जंक फूड्स से दूर रखें और उन्हें हेल्दी डाइट की आदत डालें।

बचपन से ही करवाएं कोलेस्ट्रॉल की जांच

शरीर में कोलेस्ट्रॉल के कम या ज्यादा होने का पता खून की जांच द्वारा संभव है। इसके अलावा अगर परिवार में पहले से कोई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से परेशान है या किसी की हृदय रोग के कारण मृत्यु हुई है तो बच्चों की स्क्रीनिंग जरूरी है। 2 से 8 साल की उम्र के उन बच्चों की भी स्क्रीनिंग जरूरी है जिनका वजन बहुत ज्यादा है और बॉडी मास इंडेक्स 25 प्रतिशत से ज्यादा है। बच्चे की पहली स्क्रीनिंग 2 से 8 साल के बीच करवानी चाहिए। अगर स्क्रीनिंग में फास्टिंग लिपिड प्रोफाइल सामान्य है तब भी 3 से 5 साल बाद फिर से स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।

बच्चों को बादाम जरूर खिलाएं

बादाम में पाया जाने वाला फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिंस बुरे कोलेस्ट्रॉल को घटाने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होते हैं। इनमें मौजूद फाइबर देर तक पेट भरे होने का एहसास दिलाता है। इससे व्यक्ति नुकसानदेह फैटयुक्त स्नैक्स के सेवन से बचा रहता है। प्रतिदिन 5 से 10 दाने बादाम के खाने से ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित रखता है। इस बात का ध्यान रखें कि घी-तेल में भुने और नमकीन मेवों का सेवन न करें। इससे हाई ब्लडप्रेशर की समस्या हो सकती है। बादाम को पानी में भिगोकर और पिस्ते को वैसे ही छील कर खाना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। पानी में भिगोने से बादाम में मौजूद फैट कम हो जाता है और इनमें विटमिन ई की मात्रा बढ जाती है।

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कैसे बचाएं बच्चों को कोलेस्ट्रॉल की समस्या से

  • बच्चों को जंक फूड्स और फास्ट फूड्स से दूर रखना चाहिए और उन्हें वसा वाले आहार कम खाने देना चाहिए।
  • बच्चे के आहार में फल, सब्जियां, नट्स और दूध-दही आदि को जरूर शामिल करें।
  • बच्चों को ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट वाले आहार देने की सीमा तय करनी चाहिए।
  • बच्चों को 30 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांस फैट और 10 प्रतिशत से ज्यादा सैचुरेटेड फैट देने से उनमें हाई कोलेस्ट्रॉल की संभावना बढ़ जाती है।
  • इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल की समस्या से बचाव के लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। अगर बच्चा व्यायाम नहीं करता है तो उसे बाइकिंग, तैराकी, टहलने, दौड़ने आदि की आदत डलवाएं।
  • इसके अलावा डांसिंग भी एक तरह का व्यायाम है और बच्चों को इसमें आनंद भी खूब आता है।

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