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जानें किन कारणों से होते हैं आड़े-तिरछे दांत? क्या हैं इसे ठीक करने के उपाय

अन्य़ बीमारियां By अनुराग अनुभव , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 16, 2019
जानें किन कारणों से होते हैं आड़े-तिरछे दांत? क्या हैं इसे ठीक करने के उपाय

आड़े-तिरछे दांत होने पर आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर दांतों का शेप ठीक नहीं है, तो भोजन ठीक तरह से टुकड़ों में टूटता नहीं है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा टेढ़े-मेढ़े दांत आपकी मुस्कान और हंसी को भी ख

भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने के लिए दांतों का स्वस्थ होना जरूरी है। आड़े-तिरछे दांत होने पर आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर दांतों का शेप ठीक नहीं है, तो भोजन ठीक तरह से टुकड़ों में टूटता नहीं है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा टेढ़े-मेढ़े दांत आपकी मुस्कान और हंसी को भी खराब करते हैं। दांतों के आड़े-तिरछे या टेढ़े-मेढ़े होने की समस्या को चिकित्सीय भाषा में मालोक्लुजन कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं क्यों होता है दांतों का टेढ़ापन और किन तरीकों से किया जा सकता है इन्हें ठीक।

क्यों होती है दांतों के टेढ़ेपन की समस्या

दांतों के टेढ़ेपन के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर ये बचपन में की गई कुछ सामान्य गलतियों के कारण होता है, जैसे-

  • हर समय होठों को चूसते रहना।
  • बचपन में बार-बार मुंह का गलत शेप बनाना (बच्चे अक्सर दूसरों को चिढ़ाने के लिए आड़ा-तिरछा मुंह बनाते हैं)
  • 3 साल की उम्र के बाद भी बच्चे को पैसिफायर (अंगूठा चूसने की आदत छुड़ाने के लिए प्लास्टिक या रबर की चूसनी) देना।
  • छोटे बच्चे को बहुत लंबी बोतल से दूध पिलाना।
  • बचपन में लगी किसी चोट के कारण दांतों का टूट जाना।
  • टूटे हुए दांतों के स्थान पर प्राकृतिक रूप से तिरछे दांत निकल आना।
  • मुंह से सांस लेने के कारण भी दांतों का शेप बिगड़ जाता है।

बचपन में अंगूठा चूसने से दांतों का टेढ़ापन

आमतौर पर अगर जबड़े की हड्डी के लिहाज से आपके दांत बहुत छोटे हैं, तो दांतों के बीच गैप आ जाता है। कई बार बच्चों की गलत आदत भी दांतों के बीच इस तरह के रिक्त स्थान का कारण बनती है। जो बच्चे बचपन से अंगूठा चूसते हैं उनमें ये समस्या देखी जाती है। दरअसल बच्चे के अंगूठा चूसने की आदत के कारण नए दांत निकलते समय मसूड़ों पर दबाव पड़ता है और दांत टेढ़े-मेढ़े निकलने लगते हैं। कई बार मसूड़ों के किसी रोग या इंफेक्शन के कारण भी दांतों के बीच गैप की समस्या हो सकती है।

किन तरीकों से ठीक करते हैं आड़े-तिरछे दांत

आमतौर पर अगर दांत टेढ़े-मेढ़े या आड़े-तिरछे हैं, तो उन्हें इन तरीकों से ठीक किया जाता है-

  • दांतों को सही शेप में लाने के लिए ब्रेसेस का इस्तेमाल करना।
  • सामान्य से ज्यादा दांत निकल आने या दो दांतों के बीच नया दांत निकल आने पर कुछ दांतों को निकाल देना।
  • जबड़े से जु़ड़ी समस्याओं के लिए सर्जरी करना।
  • जबड़े की हड्डी में समस्या होने पर प्लेट लगाना।
  • दांतों की कैपिंग करना

दांतों के टेढ़ेपन से अपने बच्चे को बचाना है, तो इन बातों का ध्यान रखें

  • अगर देखें कि बच्चे के दूध वाले दांत तो गिरे नहीं हैं, उन के पास ही गलत जगह पर पक्के दांत निकलने लगे हैं। ऐसे में आप बच्चे को डैंटिस्ट के पास ले जाकर दूध के दांत निकलवाएगें नहीं तो पक्के दांत किसी ओर जगह पर अपनी जगह बना लेंगे।
  • आप अपने बच्चे को हर छःमहीने के बाद डैंटिस्ट के पास लेकर जायें ताकि वह उनकी आदतें जैसे कि अंगूठा चूसना, जींभ से बार बार अपने ऊपरी दांतों को धकेलना, दांतों से होंठ अथवा गाल काटते रहना आदि आदतें जो दांतों को टेढ़ा-मेढा करती हैं,को नोटिस करें और आदतों से मुक्ति दिलाने में मदद करें।
  • अगर किसी बच्चे में मुंह से सांस लेने की आदत है तो भी इस आदत को दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि इस आदत की वजह से ऊपर वाले आगे के दांत बाहर की तरफ़ आने लगते हैं।
  • टेढ़े-मेढ़े दांतों का इलाज वैसे तो किसी भी आयु में किया जाता है लेकिन इसका इलाज जितना जल्दी हो उतना अच्छा होता है क्योंकि कम उम्र में जबड़े मुलायम रहते हैं जिससे परिणाम जल्दी और ज्यादा अच्छे मिलते हैं।

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